Author: evenpixels

  • केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को डाक से जान से मारने की धमकी

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को डाक से जान से मारने की धमकी

    केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और LJP(R) के अध्यक्ष चिराग पासवान को डाक के जरिए जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी भरे संदेश में लिखा गया, “कट्टर आतंकवादी जल्द ही आपकी हत्या कर देंगे।”

    चिराग पासवान के कार्यालय ने इस धमकी की जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखा है।

  • दिल्ली में 2.30 लाख लोगों को मुफ्त सोलर पैनल देने की तैयारी, सरकार उठाएगी रखरखाव का खर्च

    दिल्ली में 2.30 लाख लोगों को मुफ्त सोलर पैनल देने की तैयारी, सरकार उठाएगी रखरखाव का खर्च

    दिल्ली सरकार ने सौर ऊर्जा नीति के दूसरे संशोधन को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत 2 लाख 30 हजार लोगों के घरों में मुफ्त सोलर पैनल लगाने का फैसला किया गया है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद ने नीति की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य अधिक घरों को सौर ऊर्जा से जोड़कर बिजली की लागत कम करना है।

    मार्च 2027 तक लक्ष्य पूरा करने की योजना

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 400 यूनिट तक बिजली की खपत वाले लोगों के घरों में मुफ्त सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे 2.3 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और लक्ष्य मार्च 2027 तक पूरा किया जाएगा। लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि अब पहले ही दी जाएगी, जबकि पहले यह पांच साल बाद मिलती थी। सोलर पैनल के रखरखाव का खर्च भी सरकार उठाएगी।

    तीन किलोवाट के सोलर सिस्टम पर सब्सिडी

    तीन किलोवाट के सोलर सिस्टम के लिए केंद्र सरकार 78 हजार रुपये और दिल्ली सरकार भी 78 हजार रुपये देगी। जिन उपभोक्ताओं को 200 यूनिट बिजली की सब्सिडी मिल रही है, उन्हें यह लाभ आगे भी मिलता रहेगा। दिल्ली सरकार की सब्सिडी पीएम सूर्य घर योजना के तहत केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी के अतिरिक्त होगी।

    10 केवी तक पंजीकरण शुल्क नहीं

    सरकार के अनुसार 10 केवी तक के सिस्टम पर कोई पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा। दिल्ली में अब तक 10,070 घरों में सोलर प्लांट लगाए गए हैं और इनसे 228 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न की जा रही है। फरवरी 2027 तक 500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

    पात्रता और प्रक्रिया की जानकारी जल्द होगी जारी

    कैबिनेट की मंजूरी के बाद नीति से संबंधित पात्रता, सब्सिडी लेने की प्रक्रिया और अन्य प्रावधानों की आधिकारिक जानकारी जल्द जारी की जाएगी। सरकार का फोकस लाखों नए घरों में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा का विस्तार करने और उपभोक्ताओं की बिजली लागत घटाने पर है।

  • घर खरीदने से पहले सिर्फ लोकेशन नहीं, इन 5 जरूरी बातों की भी करें जांच

    घर खरीदने से पहले सिर्फ लोकेशन नहीं, इन 5 जरूरी बातों की भी करें जांच

    घर खरीदते समय मेट्रो, स्कूल-कॉलेज और बाजार से दूरी जैसी लोकेशन से जुड़ी बातों पर सबसे पहले ध्यान जाता है। हालांकि, अच्छी लोकेशन अकेले किसी प्रॉपर्टी को सुरक्षित घर या बेहतर निवेश नहीं बनाती। प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति, RERA रिकॉर्ड, बिल्डर का पिछला प्रदर्शन, वास्तविक खरीद लागत और अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों की जांच भी जरूरी है।

    प्रोजेक्ट का RERA रिकॉर्ड जांचें

    अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट खरीदने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन जांचना चाहिए। Real Estate Act, 2016 के तहत संबंधित प्रोजेक्ट का RERA में रजिस्ट्रेशन जरूरी है, हालांकि कानून में कुछ छूट भी दी गई हैं। केवल दिए गए RERA नंबर पर भरोसा करने के बजाय संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट की स्थिति, प्रमोटर की जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों को क्रॉस-चेक करना चाहिए।

    टाइटल और दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं

    प्रॉपर्टी खरीदने में कीमत के साथ टाइटल और दस्तावेजों से जुड़ा जोखिम भी होता है। जमीन का मालिक कौन है, संपत्ति पर कोई कर्ज या कानूनी दावा तो नहीं है और जरूरी मंजूरियां उपलब्ध हैं या नहीं, इन सभी बातों की जांच जरूरी है। केवल बिल्डर या प्रॉपर्टी ब्रोकर के दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय संपत्ति के वकील से टाइटल और अन्य जरूरी कागजात की स्वतंत्र कानूनी जांच कराई जा सकती है।

    बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड देखें

    बड़े ब्रांड के नाम या मार्केटिंग कैंपेन को भविष्य में समय पर डिलीवरी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बिल्डर के पुराने प्रोजेक्टों में पजेशन समय पर मिला या नहीं, निर्माण की गुणवत्ता कैसी रही और खरीदारों की शिकायतें हैं या नहीं, इसकी जानकारी लेना जरूरी है। इसके लिए बिल्डर के दो से तीन पुराने प्रोजेक्ट देखकर वहां रहने वाले लोगों से बात करना उपयोगी हो सकता है।

    बेस कीमत के बजाय पूरी खरीद लागत निकालें

    रुपये 80 लाख के फ्लैट की वास्तविक लागत इससे अधिक हो सकती है। बेस कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, जहां लागू हो वहां जीएसटी, पार्किंग, क्लब या अन्य सुविधाओं के शुल्क, मेंटेनेंस जमा, ब्रोकरेज और इंटीरियर का खर्च भी जुड़ सकता है। होम लोन लेने पर प्रोसेसिंग, दस्तावेजीकरण और अन्य संबंधित शुल्क भी देने पड़ सकते हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक की उपभोक्ता गाइडलाइन के मुताबिक, खरीदारों को केवल ईएमआई या ब्याज दर पर ध्यान देने के बजाय लोन की पूरी लागत, शुल्क, डाउन पेमेंट और अन्य खर्चों की तुलना करनी चाहिए। सभी अतिरिक्त खर्च जोड़ने के बाद सामने आने वाली राशि ही प्रॉपर्टी की वास्तविक खरीद लागत होगी।

    अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों पर ध्यान दें

    लोकेशन महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल मौजूदा समय में मेट्रो या बाजार की दूरी देखना पर्याप्त नहीं है। घर खरीदने से पहले यह भी देखना चाहिए कि वह स्थान अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों के लिहाज से कितना उपयुक्त रहेगा।

  • ‘हनुमान अंश’ का बुंदेली भजन गाकर चर्चा में आए दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी

    ‘हनुमान अंश’ का बुंदेली भजन गाकर चर्चा में आए दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी

    फिल्म ‘हनुमान अंश’ का भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ गाने वाले दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी अपनी आवाज को लेकर चर्चा में हैं। बुंदेलखंड से ताल्लुक रखने वाले सुनील ने इस गीत को बुंदेली शैली में गाया है।

    फिल्म का निर्माण दो करोड़ रुपये के बजट में हुआ है। इसके भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ को सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है। गांव से निकले सुनील ने दृष्टिबाधा के बावजूद गायन को अपनी पहचान बनाया है।

    सुनील लोधी की आवाज और उनकी जीवन यात्रा श्रोताओं का ध्यान खींच रही है। ‘हनुमान अंश’ के इस भजन के माध्यम से उन्हें व्यापक पहचान मिली है।

  • किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान यात्रा के दौरान बिश्केक में ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से अहम मुलाकात की। इस यात्रा में किर्गिस्तान के नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को भी भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    ये मुलाकातें ऐसे समय हुई हैं, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच नया रक्षा समझौता हुआ है। इस घटनाक्रम के बीच किर्गिस्तान, ईरान और आर्मीनिया के साथ भारत का कूटनीतिक संपर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Where is My Train: ट्रेन की देरी से आया ऐप का विचार, Google ने 2018 में खरीदी कंपनी

    Where is My Train: ट्रेन की देरी से आया ऐप का विचार, Google ने 2018 में खरीदी कंपनी

    ट्रेन की देरी और उसकी सही लोकेशन नहीं मिल पाने की समस्या ने अहमद निजाम और उनकी टीम को Where is My Train ऐप बनाने का विचार दिया। वर्ष 2015 में लॉन्च हुआ यह ऐप यात्रियों को ट्रेन की लोकेशन और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। बाद में इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने Google का ध्यान खींचा और कंपनी ने वर्ष 2018 में ऐप बनाने वाली Sigmoid Labs का अधिग्रहण कर लिया।

    यात्रियों की समस्या से तैयार हुआ ऐप

    रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अक्सर यह पता नहीं चल पाता था कि उनकी ट्रेन कहां पहुंची है और उसे स्टेशन आने में कितना समय लगेगा। ट्रेन के देरी से चलने पर यह परेशानी और बढ़ जाती थी। अहमद निजाम और उनकी टीम ने इसी समस्या को देखते हुए ऐसा ऐप तैयार किया, जिससे ट्रेन की लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल सके।

    बिना इंटरनेट और GPS के ट्रेन ट्रैकिंग

    Where is My Train की प्रमुख विशेषता ऑफलाइन ट्रेन ट्रैकिंग थी। कई मामलों में उपयोगकर्ता इंटरनेट और GPS के बिना भी ट्रेन की लोकेशन पता कर सकते थे। इसके लिए ऐप मोबाइल टावर से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करता था। कमजोर इंटरनेट कनेक्शन वाले इलाकों में यह सुविधा यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हुई।

    ऐप में लाइव ट्रेन स्टेटस और टाइमटेबल के साथ PNR स्टेटस, प्लेटफॉर्म की जानकारी तथा कोच की स्थिति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इन सेवाओं के कारण यह ऐप धीरे-धीरे ट्रेन यात्रियों के बीच लोकप्रिय हो गया।

    Google ने 2018 में किया अधिग्रहण

    ऐप की बढ़ती लोकप्रियता के बाद Google ने वर्ष 2018 में इसे बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया। Google ने इस सौदे की आधिकारिक कीमत सार्वजनिक नहीं की थी। हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी कीमत करीब 280 करोड़ रुपये बताई गई। रोजमर्रा की एक सामान्य समस्या के समाधान के रूप में शुरू हुआ यह विचार इस अधिग्रहण तक पहुंचा।

  • सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट: गिरवी शेयर, पर्सनल गारंटी और NCLT विवाद की पूरी कहानी

    सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट: गिरवी शेयर, पर्सनल गारंटी और NCLT विवाद की पूरी कहानी

    ज़ी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट गिरवी रखे शेयरों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हुए घाटे और व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी देनदारियों के कारण लगातार गहराता गया। लेनदारों के लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के बीच नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT ने 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान और 25 लाख रुपये की प्रक्रिया फीस पर उन्हें देनदारियों से मुक्त करने का आदेश दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद NCLT की नई पीठ ने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए संपत्तियों के हस्तांतरण पर भी पाबंदी लगा दी।

    ज़ी के शेयर गिरवी रखकर जुटाई गई पूंजी

    सुभाष चंद्रा ने 1990 के दशक में निजी सैटेलाइट चैनल ज़ी टीवी की शुरुआत की थी। बाद में समूह ने मीडिया से बाहर पूंजी की अधिक जरूरत वाले क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाया। इन परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से ज़ी एंटरटेनमेंट यानी ZEEL में प्रमोटर हिस्सेदारी और शेयरों को गिरवी रखा गया। शेयर बाजार में ज़ी का प्रदर्शन मजबूत रहने तक यह व्यवस्था चलती रही, लेकिन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी और घाटा बढ़ने से समूह का वित्तीय संतुलन बिगड़ गया।

    वर्ष 2019 की शुरुआत में सामने आया कि समूह पर करीब 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। जनवरी 2019 में एक संदिग्ध कंपनी से समूह के जुड़ाव की खबरों के बाद उसकी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। ZEEL का शेयर 26 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि डिश टीवी के शेयर में करीब 33 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे गिरवी रखे शेयरों का मूल्य भी तेजी से घट गया।

    शेयरों का मूल्य कम होने पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अतिरिक्त रकम या संपत्तियों की मांग की। गिरवी का जरूरी अनुपात कायम नहीं रहने पर लेनदारों ने शेयर बेचकर वसूली शुरू की। इस बिकवाली से शेयरों पर दबाव और बढ़ा तथा उनकी कीमतें नीचे जाती रहीं। नतीजतन, गिरवी शेयरों पर लिए गए कर्ज और बाजार में गिरती कीमतों का संकट एक-दूसरे को बढ़ाता चला गया।

    पर्सनल गारंटी ने बढ़ाया व्यक्तिगत जोखिम

    सुभाष चंद्रा के लिए सबसे बड़ा जोखिम उनकी ओर से दी गई पर्सनल गारंटी बनी। सामान्य स्थिति में किसी कंपनी का कर्ज उसकी संपत्तियों तक सीमित रहता है, लेकिन व्यक्तिगत गारंटी देने पर कंपनी के भुगतान में विफल रहने की स्थिति में गारंटर की निजी संपत्ति और आर्थिक हैसियत भी दायरे में आ जाती है। उनकी बुनियादी ढांचा कंपनियों को कर्ज दिलाने के लिए दी गई ऐसी गारंटियों के कारण कंपनियों की देनदारियां उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़ गईं।

    कंपनियों के डिफॉल्ट के बाद लेनदारों ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की। चंद्रा का कहना है कि उनका अपना कर्ज करीब चार हजार करोड़ रुपये था, जबकि बाकी मामले व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े थे। संकट कम करने के लिए सोलर पावर प्लांट, हाईवे परियोजनाएं और अन्य संपत्तियां बेची गईं। ज़ी एंटरटेनमेंट में बड़ी हिस्सेदारी बेचने के बाद कंपनी पर उनका नियंत्रण भी समाप्त हो गया।

    सुभाष चंद्रा का दावा है कि उन्होंने और उनके समूह ने संपत्तियां बेचकर मूल 45,000 करोड़ रुपये में से लगभग 43,000 करोड़ रुपये लेनदारों को लौटा दिए। इसके बावजूद पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियां बनी रहीं। वर्ष 2022 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर व्यक्तिगत दिवालियापन की अदालती प्रक्रिया शुरू की।

    NCLT के आदेश में मिली राहत

    NCLT के सामने लेनदारों ने करीब 22,006 करोड़ रुपये का दावा किया था, जिसमें सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियां शामिल थीं। ट्रिब्यूनल ने उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति के आधार पर 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान और 25 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रक्रिया फीस के साथ देनदारियों से मुक्ति देने का आदेश दिया। इस व्यवस्था को करीब 99.97 प्रतिशत कर्जमाफी के रूप में देखा गया और इसके बाद लेनदारों की वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठे।

    लेनदारों की वोटिंग पर क्यों उठा विवाद

    कॉर्पोरेट कर्ज प्रक्रिया में लेनदारों का मतदान अधिकार उनके दावे के आकार के आधार पर तय होता है। इस मामले में 23 लेनदारों की सूची में HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, IDBI बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस और यूनियन बैंक जैसी संस्थाएं शामिल थीं। इन बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन मतदान में उनकी संयुक्त हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत ही थी। LIC हाउसिंग फाइनेंस के पास इनमें सबसे अधिक छह प्रतिशत मतदान अधिकार था।

    दूसरी ओर, वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर के पास 28.49 प्रतिशत, लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स के पास 16.85 प्रतिशत, कैटेलिस्ट ट्रस्टीशिप के पास 11.85 प्रतिशत और कॉर्पकॉल एडवाइजर्स के पास 10.30 प्रतिशत मतदान अधिकार था। इन इकाइयों ने सुभाष चंद्रा की इनसॉल्वेंसी योजना के पक्ष में मतदान किया। अधिक मतदान हिस्सेदारी के कारण उनका समर्थन बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के विरोध पर भारी पड़ा, जिससे पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई।

    नई पीठ ने पुराने आदेश पर लगाई रोक

    बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने NCLT के आदेश को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT में चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू की। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी राहत मिलने से व्यक्तिगत गारंटी की प्रभावशीलता पर असर पड़ेगा। इस बीच विवाद को देखते हुए NCLT ने पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया। मंगलवार को नई पीठ ने पिछले आदेश पर रोक लगा दी और सुभाष चंद्रा को निर्देश दिया कि गारंटर के तौर पर वे अपनी संपत्तियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित न करें।

    इस तरह सुभाष चंद्रा को मिली राहत फिलहाल कानूनी विवाद में फंसी हुई है। ज़ी एंटरटेनमेंट पर उनका नियंत्रण पहले ही समाप्त हो चुका है, जबकि पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियों और लेनदारों की वोटिंग पर अंतिम स्थिति आगे की अदालती कार्यवाही से तय होगी।

  • SCO समिट की क्रॉप्ड तस्वीर पर चर्चा के बाद शहबाज शरीफ ने शेयर की पूरी ग्रुप फोटो

    SCO समिट की क्रॉप्ड तस्वीर पर चर्चा के बाद शहबाज शरीफ ने शेयर की पूरी ग्रुप फोटो

    किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की ग्रुप फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने पहले सम्मेलन की एक क्रॉप्ड तस्वीर साझा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेता दिखाई नहीं दे रहे थे। बाद में शहबाज शरीफ की ओर से पूरी ग्रुप फोटो साझा की गई, जिसमें सम्मेलन में शामिल सभी नेता नजर आए।

    एससीओ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक साथ हाथ मिलाया। इस दौरान तीनों नेता गर्मजोशी से मिलते दिखाई दिए। शहबाज शरीफ भी आसपास मौजूद थे और मंच की ओर किनारे से पहुंचते नजर आए।

    क्रॉप्ड तस्वीर में कौन-कौन दिखाई दिए

    फोटो सेशन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ की पूरी फैमिली फोटो साझा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल से भी एक तस्वीर साझा की गई, लेकिन वह क्रॉप की हुई थी। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट तोकायेव, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शहबाज शरीफ, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव दिखाई दे रहे थे। तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी और चार अन्य नेता नजर नहीं आ रहे थे।

    बाद में शहबाज शरीफ की ओर से साझा की गई पूरी ग्रुप फोटो में सभी नेता दिखाई दिए। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पहले साझा की गई तस्वीर में भी सभी नेता मौजूद थे। इनमें शहबाज शरीफ के साथ किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी शामिल थे।

    सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाएं

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई क्रॉप्ड तस्वीर पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रतिक्रियाएं दीं। एक उपयोगकर्ता ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई पूरी तस्वीर कमेंट में पोस्ट करते हुए उसे ‘फुल पिक्चर’ बताया, जबकि एक अन्य ने ‘टिपिकल पाकिस्तान माइंडसेट’ लिखा। एक उपयोगकर्ता ने शहबाज शरीफ की तस्वीर में बदलाव कर उसे साझा किया। इसके बाद एससीओ समिट की यह ग्रुप फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

  • ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्या चर्चा में हैं। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है। स्रोत में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दो करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

    नीम करोली बाबा की भूमिका में शोभिनव सत्या

    फिल्म में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव के लक्ष्मण नारायण शर्मा की कहानी दिखाई गई है, जो आगे चलकर नीम करोली बाबा के नाम से विख्यात हुए। शोभिनव सत्या ने पर्दे पर उनकी वेशभूषा, हाव-भाव, सौम्यता और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया है। उनके अभिनय और सादगी को दर्शकों से सराहना मिलने की बात कही गई है।

    लखनऊ से शुरू हुआ अभिनय का सफर

    शोभिनव सत्या लखनऊ में पले-बढ़े हैं। उन्होंने लखनऊ के ऑपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स से अभिनय और फिल्म निर्माण का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों को समझा। ‘हनुमान अंश’ बतौर अभिनेता उनकी पहली फिल्म है, लेकिन इससे पहले वह कैमरे के पीछे विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

    सहायक निर्देशन और स्क्रिप्ट विभाग में किया काम

    IMDb के रिकॉर्ड्स के अनुसार, शोभिनव ने 2019 में आई वेब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ में ट्रेनी असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में करियर शुरू किया था। वर्ष 2020 में आई ‘हैप्पिली एवर आफ्टर’ में उन्होंने स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम किया। वर्ष 2025 में टीवी शो ‘सीआईडी’ के कई एपिसोड में वह सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर भी रहे।

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने किया चयन

    फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी नीम करोली बाबा की भूमिका के लिए ऐसे नए चेहरे की तलाश में थे, जिसके व्यक्तित्व में मासूमियत और सादगी दिखाई दे। इसी दौरान उन्होंने शोभिनव सत्या को इस किरदार के लिए चुना। कैमरे के पीछे काम करने का उनका अनुभव इस भूमिका की तैयारी में उपयोगी साबित हुआ। फिल्म ‘आवारापन 2’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों के बीच सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और माउथ पब्लिसिटी के सहारे इसकी कमाई बढ़ने की बात कही गई है।

  • राम मंदिर के पहले सीईओ पर 2 सितंबर को हो सकता है फैसला, ट्रस्ट की बैठक में होगी चर्चा

    राम मंदिर के पहले सीईओ पर 2 सितंबर को हो सकता है फैसला, ट्रस्ट की बैठक में होगी चर्चा

    अयोध्या स्थित राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम पर बुधवार, 2 सितंबर को फैसला हो सकता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक मणिराम दास जी की छावनी में दोपहर 3 बजे से प्रस्तावित है। बैठक में सीईओ चयन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।

    राम मंदिर परिसर में मंगलवार को हुई बैठक में चयन समिति के पदाधिकारियों के साथ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन, अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी और निर्मोही अखाड़ा के महंत व ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास मौजूद रहे।

    तीन नाम किए गए शॉर्टलिस्ट

    सीईओ के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं। कमेटी में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे और पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली शामिल थे। कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

    ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि रिपोर्ट पर बुधवार को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा हो सकती है, हालांकि नाम घोषित करना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा।

    ट्रस्ट के खाली पदों पर भी हो सकता है निर्णय

    बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के तीन खाली पदों पर नियुक्ति को लेकर भी घोषणा हो सकती है। पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ये पद खाली हैं।

    सचिव पद पर जगदीश आफले के नाम की चर्चा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के सचिव पद के लिए जगदीश आफले की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है और उनके नाम की आधिकारिक घोषणा बुधवार को हो सकती है। साहित्यकार यतीन्द्र मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा और केंद्रीय परामर्श समिति के सदस्य दिनेश जी के भी ट्रस्ट में शामिल होने की संभावना बताई गई है।