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  • जालौन में मंगलसूत्र छीनने का आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

    जालौन में मंगलसूत्र छीनने का आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

    उत्तर प्रदेश के जालौन में रक्षाबंधन के दौरान बीच बाजार एक महिला का मंगलसूत्र छीनकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने एक सितंबर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल उरई भेजा गया है।

    सूचना के आधार पर की गई घेराबंदी

    पुलिस के मुताबिक, मंगलसूत्र छीनने की घटना के बाद कोतवाली उरई में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई थी। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर फैक्ट्री चौकी क्षेत्र के पास घेराबंदी की गई। पुलिस को देखकर आरोपी ने कथित तौर पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से दो राउंड फायरिंग होने की जानकारी दी गई है।

    तमंचा और मोटरसाइकिल बरामद

    पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से एक तमंचा और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस आरोपी के आपराधिक इतिहास और बरामद सामान के संबंध में आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक का आरोप, चीनी सुपरवाइजर ने बाहर निकलने से रोका

    त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक का आरोप, चीनी सुपरवाइजर ने बाहर निकलने से रोका

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से सुरक्षित निकले श्रमिक राज क्षेत्री ने वहां के हालात के बारे में बताया है। उनका दावा है कि बाढ़ के समय सुरंग नंबर-3 में करीब 265 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि खतरे की आशंका जताने के बावजूद वहां मौजूद चीनी सुपरवाइजर ने श्रमिकों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग कार्य का ठेका चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन को मिला हुआ है। क्षेत्री के मुताबिक, परियोजना में उसके सुपरवाइजरों की निगरानी में काम किया जाता है।

    तेज आवाज के बाद मांगी थी बाहर निकलने की अनुमति

    राज क्षेत्री ने बताया कि सैलाब आने के समय वे सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज आवाज सुनाई दी और आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया। उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से कुछ गड़बड़ होने की आशंका जताते हुए बाहर निकलने की अनुमति मांगी। क्षेत्री का आरोप है कि सुपरवाइजर ने उनसे काम जारी रखने को कहा और खुद बाहर जाकर स्थिति देखने की बात कही। इसके बाद वह सुरंग से निकल गया और वापस नहीं आया।

    मलबे के साथ सैलाब आने पर मुहाने की ओर भागे

    क्षेत्री के अनुसार, कुछ देर बाद सुरंग के ऊपर से मलबे के साथ बड़ा सैलाब आने लगा। खतरा देखकर वह अपने साथियों के साथ सुरंग के मुहाने की ओर भागे और बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि उनके साथ चार लोग मुहाने तक पहुंचे थे, जिनमें से दो अब भी लापता हैं। उनका कहना है कि खतरे की सूचना मिलते ही सभी श्रमिकों को बाहर निकलने के लिए कहा जाता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

    क्षेत्री ने दावा किया कि सुरंग के अंदर कई शव पड़े थे और कुछ लोगों के जीवित होने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। उन्होंने कहा कि उस समय उनके सामने अपनी जान बचाने और दूसरों की मदद करने की कोशिश के बीच कठिन स्थिति थी।

    पहाड़ी के जंगल में बिताई रात

    बाढ़ से बचने के लिए क्षेत्री पहाड़ी पर स्थित जंगल की ओर चले गए। उन्होंने शुरुआती दिन जंगल में बिताए और पेड़ के नीचे रात गुजारी। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का साधन भी उपलब्ध नहीं था। सैलाब के बाद मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया था।

    पूर्व चेतावनी नहीं मिलने का भी आरोप

    राज क्षेत्री ने आरोप लगाया कि चीन की ओर से समय रहते चेतावनी दी जाती तो इतनी जानें नहीं जातीं। उन्होंने दावा किया कि चीन को बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की पहले से जानकारी थी। उनके मुताबिक, नेपाल को समय पर सूचना मिलने से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता था और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था।

    हालांकि, क्षेत्री के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। त्रिशूली-3A की सुरंग में वास्तव में कितने लोग फंसे, कितने लोगों की मौत हुई और कितने सुरक्षित बाहर निकले, इसका आधिकारिक और पूर्ण आंकड़ा सामने नहीं आया है। नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब में मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि करीब चार हजार लोग लापता हैं। मलबे के बीच बचाव अभियान जारी है।

  • रूस पर ईरान के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में मदद का आरोप, रिपोर्ट में C430L का दावा

    रूस पर ईरान के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में मदद का आरोप, रिपोर्ट में C430L का दावा

    रूस पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के लिए संवेदनशील सैन्य तकनीक उपलब्ध कराने का आरोप लगा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, C430L कोडनेम वाला यह गुप्त कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ था और इसमें रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल हैं। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका के हालिया हमलों के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    रैमजेट इंजन तकनीक विकसित करना मकसद

    रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य ईरान को रैमजेट इंजन तकनीक विकसित करने में सहायता देना है। इस तकनीक की मदद से क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से कई गुना तेज उड़ सकती हैं। फाइनेंशियल टाइम्स ने लीक हुई रूसी बातचीत, यात्रा रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान भी कार्यक्रम जारी रहा।

    ईरानी मिसाइलों के विशेषज्ञ और Conflict Armament Research के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज ने इसे रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य तकनीक का हस्तांतरण बताया। उनके अनुसार, ईरान दशकों से ऐसी तकनीक हासिल करना चाहता था और इस स्तर के कार्यक्रम के लिए रूस में उच्च राजनीतिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

    जहाज रोधी मिसाइलों में हो सकता है इस्तेमाल

    रिपोर्ट के अनुसार, रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल जहाज रोधी और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तेज गति के साथ कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं, जिससे वायु रक्षा प्रणालियों को उनकी पहचान करने और रोकने के लिए कम समय मिलता है।

    फाइनेंशियल टाइम्स का दावा है कि ईरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बना चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि रूस की सहायता से विकसित किसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने तैनात किया हो। लीक हुई बातचीत से संकेत मिला है कि कार्यक्रम पर चर्चा इस गर्मी तक जारी थी।

    पूर्व CIA सैन्य विश्लेषक और James Martin Center for Nonproliferation Studies से जुड़े जिम लैम्सन के मुताबिक, यह ईरान के लिए नई क्षमता वाला रणनीतिक हथियार तंत्र हो सकता है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

    रूस और ईरान के सैन्य संबंध

    रूस और ईरान के सैन्य एवं रणनीतिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं। ईरान ने रूस को शाहेद हमलावर ड्रोन दिए हैं, जिनका रूसी सेना ने यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। ईरान ने रूस में इन ड्रोन के उत्पादन की व्यवस्था स्थापित करने में भी सहायता की है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने रूस पर अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान को युद्धक्षेत्र से जुड़ी सहायता देने का आरोप भी लगाया है। इनमें सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन संबंधी मदद और हथियारों के कलपुर्जे शामिल होने का दावा किया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में बढ़ सकती है सुरक्षा चुनौती

    यदि ईरान रूस की सहायता से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की विश्वसनीय क्षमता हासिल करता है, तो खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के लिए सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है। तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलें मौजूदा वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया के लिए कम समय दे सकती हैं। विशेष रूप से जहाज रोधी क्षमता विकसित होने पर अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर खतरा बढ़ने की आशंका है। हालांकि, रूस की सहायता से बनी ऐसी किसी मिसाइल की ईरान में तैनाती का अभी कोई प्रमाण नहीं मिला है।

  • चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर, पुजारी ने मंदिर छोड़ने से किया इनकार

    चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर, पुजारी ने मंदिर छोड़ने से किया इनकार

    चित्रकूट के पहाड़ी इलाकों में 36 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर पहुंच गया। बाढ़ का पानी रामघाट स्थित बड़ा मठ मंदिर में घुसने लगा, जिससे वहां मौजूद पुजारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।

    डीएम और एसपी ने पुजारी से बाहर आने की अपील की

    जान के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुजारी से मंदिर से बाहर आने की गुहार लगाई। दोनों अधिकारी हाथ जोड़कर उनसे सुरक्षित स्थान पर जाने का अनुरोध करते रहे, लेकिन पुजारी ने मंदिर छोड़ने से इनकार कर दिया।

    पुजारी ने कहा, ‘भगवान को अकेला कैसे छोड़ दूं?’ इसके बाद भी वह बाढ़ के पानी से घिरे मंदिर में ही मौजूद रहे।

  • 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सीआरपीएफ में बहाल हुए गिरवर सिंह तोमर

    26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सीआरपीएफ में बहाल हुए गिरवर सिंह तोमर

    मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी गिरवर सिंह तोमर 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में दोबारा बहाल हो गए हैं। वर्ष 1999 में सेवा से बर्खास्त होने के बाद उन्होंने मंदिर में रहकर संत का जीवन अपना लिया था, लेकिन नौकरी वापस पाने के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी। अगस्त 2026 में सीआरपीएफ में वापसी के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनाती मिली है।

    1991 में हवलदार के रूप में शुरू की थी सेवा

    मुरैना के छिछावली गांव के रहने वाले गिरवर सिंह तोमर ने 1991 में सीआरपीएफ में हवलदार के रूप में सेवा शुरू की थी। करीब आठ साल की नौकरी के बाद उनका एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद हुआ। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच हुई और 1999 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

    नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह मुरैना लौट आए और मंदिर में रहकर पूजा-पाठ व साधना करने लगे। बाद में वह गुफा मंदिर पहुंचे, जहां उन्हें गिरवर दास महाराज के नाम से संत के रूप में पहचाना जाने लगा। वह करीब दो दशक तक मंदिर सेवा से जुड़े रहे।

    हाईकोर्ट में जारी रखी बहाली की लड़ाई

    गिरवर सिंह ने 1999 में अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब आठ साल बाद 2007 में फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन सीआरपीएफ ने इस फैसले पर स्टे ले लिया। इसके बाद मामला फिर लंबी कानूनी प्रक्रिया में चला गया और गिरवर सिंह ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की।

    वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। आदेश के बाद भी तत्काल सेवा में नहीं लिए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा और नियुक्ति की मांग जारी रखी।

    बीजापुर में मिली तैनाती

    अगस्त 2026 में गिरवर सिंह की सीआरपीएफ में वापसी हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनात किया गया। आदेश मिलने के बाद उन्होंने वहां पहुंचकर ड्यूटी ज्वाइन की और 26 साल बाद एक बार फिर सीआरपीएफ की वर्दी पहनी।

  • IND vs AFG T20 सीरीज के लिए टीम इंडिया घोषित, श्रेयस अय्यर कप्तान

    IND vs AFG T20 सीरीज के लिए टीम इंडिया घोषित, श्रेयस अय्यर कप्तान

    भारत और अफगानिस्तान के बीच सितंबर में होने वाली तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए बीसीसीआई ने भारतीय टीम घोषित कर दी है। श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि तिलक वर्मा उपकप्तान होंगे। वैभव सूर्यवंशी को भी स्क्वाड में जगह मिली है और संजू सैमसन की टीम में वापसी हुई है।

    चार खिलाड़ियों की उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर

    चयनित टीम में नितीश कुमार रेड्डी, जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर और हर्षित राणा की उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर रहेगी। ये खिलाड़ी पिछले कुछ समय से चोटिल थे और उनकी फिटनेस पर अंतिम अपडेट आना बाकी है।

    दिल्ली में खेले जाएंगे तीनों मुकाबले

    सीरीज के सभी मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे और इसकी मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड करेगा। पहला मुकाबला 13 सितंबर, दूसरा 15 सितंबर और तीसरा मैच 17 सितंबर को होगा। अफगानिस्तान की टीम का स्क्वाड पहले ही घोषित किया जा चुका है।

    टीम में तीन सलामी बल्लेबाजों के विकल्प

    संजू सैमसन इससे पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज से बाहर रहे थे, लेकिन अब उनकी वापसी हो गई है। भारतीय स्क्वाड में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन के रूप में तीन सलामी बल्लेबाजों के विकल्प मौजूद हैं।

    भारत का पूरा स्क्वाड

    श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा।

    https://twitter.com/BCCI/status/2094755984770224596
  • इमाद वसीम की पूर्व पत्नी सानिया अशफाक ने लगाए गंभीर आरोप, बिना सहमति अबॉर्शन कराने का दावा

    इमाद वसीम की पूर्व पत्नी सानिया अशफाक ने लगाए गंभीर आरोप, बिना सहमति अबॉर्शन कराने का दावा

    पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमाद वसीम की पूर्व पत्नी सानिया अशफाक ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सानिया ने दावा किया कि उनकी मर्जी के बिना उनका अबॉर्शन कराया गया था।

    भारत के खिलाफ हार का भी किया जिक्र

    सानिया अशफाक ने अपने आरोपों में 2024 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “अल्लाह ने सजा दी है।”

    https://twitter.com/Qamar5618/status/2094325287710323184
  • पाकिस्तान टीम में बीच सीरीज बड़े बदलाव, रमीज राजा ने बताया ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’

    पाकिस्तान टीम में बीच सीरीज बड़े बदलाव, रमीज राजा ने बताया ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’

    इंग्लैंड दौरे पर शुरुआती दोनों टेस्ट हारने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बीच सीरीज में टीम में बड़े बदलाव किए हैं। सात खिलाड़ियों और दो कोच को बाहर करने के फैसले पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान एवं पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष रमीज राजा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

    रमीज राजा ने फैसले पर उठाए सवाल

    बीबीसी के एक पॉडकास्ट में रमीज राजा ने कहा कि पाकिस्तान ने इस फैसले के साथ एक तरह से विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। उनके मुताबिक क्रिकेट में आम तौर पर ऐसा नहीं होता और यह फुटबॉल जैसा फैसला है, जहां बीच सत्र में मैनेजर को हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सीरीज अभी जारी है और बोर्ड बदलाव करने से पहले 10 दिन और इंतजार कर सकता था।

    रमीज राजा ने तीसरे टेस्ट से ठीक पहले टीम में बड़े स्तर पर बदलाव किए जाने पर भी आपत्ति जताई। सात नए खिलाड़ियों को बुलाया गया है, जिनमें से पांच ने अभी तक टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम से बाहर किए गए खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होगा, जबकि टीम में आने वाले नए खिलाड़ी भी दबाव में रहेंगे। इससे खिलाड़ी टीम के बजाय अपनी जगह बचाने पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।

    सरफराज अहमद और उमर गुल को लेकर चिंता

    रमीज राजा ने सरफराज अहमद और उमर गुल जैसे अनुभवी नामों को बाहर किए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने लंबे समय तक पाकिस्तान क्रिकेट के लिए योगदान दिया है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उनके मुताबिक यदि अनुभवी लोगों का सम्मान नहीं किया जाएगा तो भविष्य में दूसरे लोग भी पाकिस्तान क्रिकेट के साथ काम करने से हिचक सकते हैं।

    https://twitter.com/englandcricket/status/2094328101631127850

    पाकिस्तान क्रिकेट की व्यवस्था में सुधार से जुड़े सवाल पर रमीज राजा ने कहा कि फिलहाल उन्हें इसका कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आता। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले एक-दो वर्षों में भी पाकिस्तान क्रिकेट में इसी तरह की उथल-पुथल जारी रह सकती है।

    शुरुआती दोनों टेस्ट में पाकिस्तान की हार

    पाकिस्तान को इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में एक पारी और 103 रन से हार मिली थी। लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में मेजबान टीम ने उसे 194 रन से हराया। सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट 9 सितंबर से बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेला जाना है।

    https://twitter.com/englandcricket/status/2094107921206452576
    https://twitter.com/englandcricket/status/2094304180748140580
  • ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ से अभिनेता शोभिनव सत्या ने बड़े पर्दे पर शुरुआत की है। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म में उनके अभिनय और सादगी को दर्शकों की सराहना मिल रही है। दो करोड़ रुपये की लागत में बनी फिल्म के 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने की बात कही गई है।

    नीम करोली बाबा की भूमिका में शोभिनव सत्या

    फिल्म में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव के लक्ष्मण नारायण शर्मा की कहानी दिखाई गई है, जो आगे चलकर संत नीम करोली बाबा के रूप में विख्यात हुए। शोभिनव सत्या ने किरदार की वेशभूषा के साथ उसके हाव-भाव, सौम्यता और आध्यात्मिक पक्ष को पर्दे पर प्रस्तुत किया है। बतौर अभिनेता यह उनकी पहली फिल्म है।

    लखनऊ से फिल्म निर्माण तक का सफर

    लखनऊ में पले-बढ़े शोभिनव ने ऑपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स से अभिनय और फिल्म निर्माण की शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियां समझीं। अभिनय में आने से पहले वह विभिन्न प्रस्तुतियों में कैमरे के पीछे काम कर चुके हैं।

    IMDb के रिकॉर्ड्स के अनुसार, शोभिनव ने 2019 की वेब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ में ट्रेनी असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में करियर शुरू किया। वर्ष 2020 में आई ‘हैप्पिली एवर आफ्टर’ में उन्होंने स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम किया। इसके अलावा 2025 में प्रसारित ‘सीआईडी’ के कई एपिसोड में वह सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर रहे।

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने दिया मुख्य किरदार

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी नीम करोली बाबा की भूमिका के लिए ऐसा चेहरा चाहते थे, जिसमें मासूमियत और सादगी दिखाई दे। इस तलाश के दौरान शोभिनव सत्या को फिल्म के मुख्य किरदार के लिए चुना गया। कैमरे के पीछे काम करने के उनके अनुभव ने भी भूमिका की तैयारी में मदद की।

    ‘आवारापन 2’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों के बीच रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ को माउथ पब्लिसिटी का लाभ मिलने की बात कही गई है। पहली ही फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या इसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के बाद चर्चा में हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ में असिस्टेंट डायरेक्टर से लीड एक्टर बने शोभिनव सत्य, निभाया नीम करौली बाबा का किरदार

    ‘हनुमान अंश’ में असिस्टेंट डायरेक्टर से लीड एक्टर बने शोभिनव सत्य, निभाया नीम करौली बाबा का किरदार

    फिल्म ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की मुख्य भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्य ने अपनी कास्टिंग से जुड़ी कहानी साझा की है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया कि फिल्म के मुख्य अभिनेता के अचानक बीमार पड़ने के बाद उन्हें इस किरदार के लिए चुना गया। इससे पहले वह फिल्म के सेट पर सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में प्रॉप्स और शूटिंग से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।

    यह फिल्म 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। स्रोत में दी गई जानकारी के अनुसार, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 45 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।

    मुख्य अभिनेता की बीमारी के बाद मिला अवसर

    शोभिनव सत्य के मुताबिक, नीम करौली बाबा की भूमिका के लिए पहले चुना गया अभिनेता अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया था। उस समय सेट और क्रू शूटिंग के लिए तैयार थे। काम रोकने के बजाय निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने शोभिनव को इस भूमिका के लिए आजमाने का फैसला किया।

    निर्देशक ने शोभिनव का करीब पांच घंटे तक ऑडिशन और टेस्ट लिया। शोभिनव ने बताया कि वह इस दौरान असहज और चिंतित थे। उन्हें आशंका थी कि दर्शक उन्हें इस किरदार में स्वीकार करेंगे या नहीं। विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें परिणाम की चिंता छोड़कर अभिनय पर ध्यान देने की सलाह दी।

    कास्टिंग को बताया आध्यात्मिक अनुभव

    शोभिनव सत्य ने अचानक मिली इस भूमिका को आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखा। उन्होंने कहा, ‘बाबा जी, यह सब आपने ही किया है और जो भी होगा वह सही होगा।’ उनका मानना है कि इस किरदार के लिए उनकी तैयारी वर्षों पहले शुरू हो चुकी थी, हालांकि उस समय उन्हें इसका एहसास नहीं था।

    शोभिनव ने बताया कि वह 2009 से नीम करौली बाबा के भक्त हैं। उन्होंने 2018 में भगवान हनुमान के लिए मंगलवार का व्रत रखना शुरू किया और पूरी तरह शाकाहारी जीवनशैली अपना ली। भूमिका की तैयारी के दौरान उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के वर्षों के शोध की मदद ली। निर्देशक ने उन्हें अपनी स्वाभाविक चाल-ढाल तथा बोलने और हंसने का अंदाज बनाए रखने को कहा।

    चेहरे की समानता भी बनी चयन की वजह

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, टेस्ट के दौरान ली गई तस्वीरों में शोभिनव सत्य और नीम करौली बाबा के चेहरे के बीच समानता दिखाई दी। यह समानता शोभिनव को मुख्य भूमिका में लेने के प्रमुख कारणों में शामिल थी। फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों ने उनके अभिनय और चेहरे के भावों की सराहना की।