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  • सिंधु जल संधि पर हेग मध्यस्थता फैसले को भारत ने खारिज किया, गठन पर उठाए सवाल

    सिंधु जल संधि पर हेग मध्यस्थता फैसले को भारत ने खारिज किया, गठन पर उठाए सवाल

    हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में कहा है कि संधि पूरी तरह प्रभावी है और भारत को इसका पालन करना चाहिए। भारत ने इस फैसले को खारिज करते हुए मध्यस्थता न्यायाधिकरण के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं।

    भारत ने फैसले पर क्या कहा

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मध्यस्थता न्यायाधिकरण का गठन विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया था। मंत्रालय ने कहा, “आज गैर-कानूनी ढंग से गठित तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने सिंधु जल संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित एक फैसला जारी किया है।” भारत ने कहा कि वह इस फैसले को उसी तरह खारिज करता है, जैसे इस संस्था के पिछले फैसलों को करता आया है।

    भारत का कहना है कि इस न्यायाधिकरण को उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं है। नई दिल्ली के मुताबिक, जब न्यायाधिकरण का गठन ही संधि की शर्तों के अनुरूप नहीं हुआ तो उसके फैसले का कोई महत्व नहीं रह जाता।

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन क्या है

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी PCA नीदरलैंड्स के हेग में स्थित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 1899 और 1907 के हेग कन्वेंशन फॉर द पैसिफिक सेटलमेंट ऑफ इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स के तहत हुई थी। नाम में ‘कोर्ट’ होने के बावजूद इसमें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जैसी स्थायी पीठ नहीं होती। यह मध्यस्थता के लिए प्रशासनिक, कानूनी और रजिस्ट्री सहायता उपलब्ध कराता है।

    किसी विवाद को PCA के समक्ष लाने के लिए संबंधित पक्षों की सहमति जरूरी होती है। प्रत्येक मामले के लिए अलग अस्थायी न्यायाधिकरण गठित किया जाता है। PCA का इंटरनेशनल ब्यूरो रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं संभालता है। विवाद से जुड़े पक्ष सूचीबद्ध व्यक्तियों या बाहर से मध्यस्थ चुन सकते हैं। जरूरत पड़ने पर PCA के सेक्रेटरी-जनरल नियुक्ति प्राधिकारी की भूमिका निभाते हैं।

    फैसले लागू कराने की व्यवस्था

    PCA के फैसलों की बाध्यता संबंधित पक्षों की सहमति पर निर्भर करती है। संस्था के पास फैसले लागू कराने के लिए अपना कोई पुलिस, सैन्य या अन्य प्रत्यक्ष प्रवर्तन तंत्र नहीं है। कोई पक्ष फैसला स्वीकार नहीं करता है तो दूसरा पक्ष घरेलू अदालतों या द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से उसे लागू कराने का प्रयास कर सकता है।

    सिंधु जल संधि को लेकर विवाद

    सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने हेग स्थित मध्यस्थता व्यवस्था का रुख किया। न्यायाधिकरण ने भारत के खिलाफ फैसला सुनाया, जबकि नई दिल्ली ने उसके गठन को ही संधि की शर्तों के विपरीत बताते हुए निर्णय मानने से इनकार कर दिया। भारत ने इस मामले में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की बात कही है।

  • किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से हुई मुलाकातों को भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों के साथ अहम बातचीत की।

    रक्षा समझौते के बीच कूटनीतिक गतिविधियां

    ये मुलाकातें ऐसे समय हुई हैं, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस घटनाक्रम के बीच किर्गिस्तान में हुई भारत की कूटनीतिक बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, विमान में सवार थे 229 यात्री

    गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, विमान में सवार थे 229 यात्री

    गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 2102 को तकनीकी खराबी के बाद वापस गोवा के मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। विमान में 229 यात्री सवार थे। उड़ान भरने के कुछ देर बाद एक इंजन में खराबी की सूचना मिलने पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित की गई और विमान को वापस मोड़ दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट ने मंगलवार सुबह गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। इंजन में खराबी की सूचना मिलने के बाद पायलट विमान को मोपा स्थित एयरपोर्ट पर वापस ले आए, जहां उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

    विमान की मेंटेनेंस जांच जारी

    इंडिगो ने बताया कि 1 सितंबर 2026 को नॉर्थ गोवा से दिल्ली जा रही फ्लाइट 6E 2102 में उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी का पता चला था। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन करते हुए संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और पायलटों ने विमान को वापस मोड़कर मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा। विमान की मेंटेनेंस जांच चल रही है और सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही इसे दोबारा उड़ान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

    एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए बताया कि उन्हें रिफ्रेशमेंट और समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराई गई। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी किए गए हैं।

    बिलासपुर एयरपोर्ट पर विमान का टायर फटा

    इससे पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दिल्ली-बिलासपुर अलायंस एयर की एक फ्लाइट का टायर फट गया था। विमान में 37 यात्री और चालक दल के चार सदस्य सवार थे। घटना में किसी यात्री को नुकसान नहीं हुआ और सभी को सुरक्षित रूप से रनवे से टर्मिनल बिल्डिंग ले जाया गया।

  • SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, कहा- आतंकवाद का पूरा नेटवर्क खत्म करना जरूरी

    SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, कहा- आतंकवाद का पूरा नेटवर्क खत्म करना जरूरी

    किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए ‘रणनीतिक संपत्ति’ नहीं हो सकता। आतंकियों को पनाह और समर्थन देने वाले तथा आतंकवाद को नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों को स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद को पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई केवल आतंकियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। इसमें आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों का तंत्र शामिल है। उन्होंने सभी देशों से इस मुद्दे पर एक आवाज में बोलने और दोहरे मापदंड नहीं अपनाने का आह्वान किया।

    शांति, कनेक्टिविटी और अवसर पर जोर

    पीएम मोदी ने कहा कि SCO को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख आधार शांति और सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा अवसर हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया के साझा लक्ष्य को अफगानिस्तान की शांति एवं स्थिरता से भी जोड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में लगातार योगदान देता रहा है और आगे भी यह सहयोग जारी रखेगा।

    https://twitter.com/MEAIndia/status/2094663793855070243

    पश्चिम एशिया के संकट का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है तथा ग्लोबल साउथ के देशों को इसका सबसे अधिक बोझ उठाना पड़ता है। उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है।

    ड्रग्स तस्करी और संगठित अपराध पर सहयोग की अपील

    प्रधानमंत्री मोदी ने ड्रग्स की तस्करी को युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों पर काम करने वाले SCO तंत्रों के माध्यम से सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को केवल बैठकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक सहयोग और समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने कहा कि SCO के सहयोग का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने लोगों के बीच संबंधों को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों में इसे सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार SCO की सफलता का वास्तविक पैमाना युवाओं के लिए पैदा हुए अवसर, उद्यमियों के लिए खुले नए बाजार, किसानों को तकनीक से मिला लाभ और आम नागरिकों के जीवन में आया सुधार होना चाहिए।

    शिखर सम्मेलन में कई देशों के नेता शामिल

    किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं और फिलहाल संगठन के अध्यक्ष हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन मौजूद हैं। इसमें 10 सदस्य देश, 15 पार्टनर देश और दो ऑब्जर्वर देश शामिल हैं।

    यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। भारत 2017 में संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। इस बार विस्तारित ‘SCO Plus’ प्रारूप में भी बैठक हो रही है, जिसमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलौन सिसोलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंग्बे सहित कई नेता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं।

    दुनिया की GDP में SCO देशों की बड़ी हिस्सेदारी

    SCO के 10 सदस्य देश दुनिया की GDP में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। संगठन का उद्देश्य आपसी विश्वास, मित्रता और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। इसके प्रमुख लक्ष्यों में नई चुनौतियों और खतरों का मिलकर सामना करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाना भी शामिल है।

  • किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से की मुलाकात

    किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से की मुलाकात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से मुलाकात हुई। इन बैठकों को भारत की बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच नया रक्षा समझौता हुआ है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों के साथ अहम बातचीत की।

  • सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा की अपील की

    सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा की अपील की

    कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की है। शिकागो में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि देश जरूरी विषयों को छोड़कर आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझा हुआ है।

    मंदिरों के बजाय स्कूलों पर जोर

    पित्रोदा ने मंदिरों की जगह स्कूल बनाने संबंधी अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि बहस का केंद्र शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली गालियों को नजरअंदाज करने योग्य बताया और सीएए का विरोध करने वाले युवाओं की तारीफ की।

    संस्थाओं की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

    कांग्रेस नेता ने न्यायपालिका, चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उनका दावा था कि ये संस्थाएं अब स्वतंत्र नहीं रह गई हैं।

  • SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानदंड की जगह नहीं’

    SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानदंड की जगह नहीं’

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मानदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और सदस्य देशों के लोगों के लिए नए अवसरों को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा।

    आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने का आह्वान

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पूरे तंत्र को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों सहित इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने और आतंकियों को पनाह या समर्थन देने वालों को स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि इसे रणनीतिक हथियार नहीं बनाया जा सकता।

    प्रधानमंत्री ने ड्रग तस्करी को भी युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को सकारात्मक कदम बताया। साथ ही कहा कि इन केंद्रों को व्यावहारिक समन्वय और समय पर कार्रवाई के प्रभावी साधन के रूप में विकसित करना होगा।

    संप्रभुता के सम्मान के साथ कनेक्टिविटी पर जोर

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत बाजारों को जोड़ने, व्यापार आसान बनाने और विकास के नए रास्ते खोलने वाले प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, ऐसे प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने सड़कों, रेलवे और हवाई गलियारों के साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल दस्तावेजों को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

    सुरक्षा के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट ने दिखाया है कि किसी क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखला पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकटों की सबसे भारी कीमत ग्लोबल साउथ के देशों को चुकानी पड़ती है। भारत का मानना है कि तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

    लोगों तक पहुंचे एससीओ सहयोग का लाभ

    प्रधानमंत्री ने अवसर को एससीओ सहयोग का तीसरा स्तंभ बताते हुए कहा कि संगठन के सहयोग का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंधों को सहयोग के केंद्र में रखने की बात कही। उनके अनुसार सफलता का आकलन युवाओं के लिए बने अवसरों, उद्यमियों को मिले नए बाजारों, किसानों को तकनीक से हुए लाभ और नागरिकों के जीवन में आए सुधार से होना चाहिए।

    बिश्केक में आयोजित सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन की थीम ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ है। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से हाथ मिलाया और दोनों नेता एक साथ बैठक कक्ष में पहुंचे।

    पुतिन सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें

    सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों की समीक्षा के साथ वैश्विक संघर्षों और शांति की आवश्यकता पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने जारी युद्धों को समाप्त कर स्थायी शांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर जोर देते हुए कहा कि कूटनीति ही मानवता की सच्ची पुकार है।

    किर्गिस्तान के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने रूस, ईरान, किर्गिज गणराज्य और आर्मेनिया के नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने बिश्केक में छठे विश्व नोमैड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया, जहां एससीओ के सदस्य देशों के अन्य नेता मौजूद थे।

    https://twitter.com/aajtak/status/2094656545623830855
    https://twitter.com/aajtak/status/2094649072439460161
    https://twitter.com/ANI/status/2094646035276861793
    https://twitter.com/narendramodi/status/2094654097425338405
  • सिंधु जल संधि पर भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    सिंधु जल संधि पर भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित बताते हुए कहा कि उसके फैसले का भारत के संप्रभु कार्यों या देश की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय के अनुसार, संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला लागू रहेगा।

    विदेश मंत्रालय ने मध्यस्थता संस्था के उस फैसले को मानने से इनकार किया है, जिसमें सिंधु जल संधि को अब भी लागू बताया गया और भारत से जम्मू-कश्मीर की एक पनबिजली परियोजना पर काम सीमित करने के लिए कहा गया था। भारत ने कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    मध्यस्थता अदालत ने फैसले में क्या कहा

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने अपने फैसले में कहा कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और भारत को इसके तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। अदालत के अनुसार, इन जिम्मेदारियों में पश्चिमी नदियों पर पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन और संचालन से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

    अदालत ने कहा कि विश्व बैंक की ओर से नियुक्त एक निष्पक्ष विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक यह तय करेगा कि हिमालयी क्षेत्र में पनबिजली संयंत्र का निर्माण संधि के अनुरूप है या नहीं। अदालत ने पाकिस्तान की मांग स्वीकार करते हुए कहा कि निष्पक्ष विशेषज्ञ के फैसले के 90 दिन बाद तक भारत को रातले पनबिजली संयंत्र में निर्धारित स्तर से ऊपर बांध की दीवार और पावर इनटेक स्ट्रक्चर बनाने की अनुमति नहीं होगी।

    अदालत के गठन पर भारत ने उठाए सवाल

    भारत ने कहा कि इस मध्यस्थता अदालत का गठन विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस संस्था को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी, न ही वह इसके समक्ष पेश हुआ है। भारत ने इसके पहले के फैसलों को भी स्वीकार नहीं किया था।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित फैसला जारी किया है, जिसे भारत पूरी तरह खारिज करता है। सरकार का कहना है कि इस संस्था के मौजूदा या भविष्य के किसी भी फैसले से भारत की परियोजनाओं से संबंधित कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

    1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता

    भारत ने पहलगाम हमले के बाद पिछले साल अप्रैल में सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। यह जल-बंटवारा समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। संधि पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। स्रोत सामग्री के अनुसार, यह संधि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत खेतों तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

  • बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कर शांति की ओर बढ़ने पर जोर

    बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कर शांति की ओर बढ़ने पर जोर

    किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। बातचीत के दौरान मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता और इसका हर दिन पूरी इंसानियत पर भारी पड़ रहा है।

    मोदी ने पुतिन से युद्ध खत्म करने के उपाय तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति चाहता है, क्योंकि शांति ही विकास का मार्ग है और युद्ध से केवल बर्बादी होती है। दोनों नेताओं की बैठक में भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी, रक्षा और व्यापार से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।

    भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ विस्तार से बातचीत हुई और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई। उन्होंने हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर प्रसन्नता जताई।

    बैठक में ऊर्जा, नवाचार, अंतरिक्ष, उर्वरक और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क को भारत-रूस मित्रता के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। मोदी ने कहा कि आर्थिक विकास के लिए दुनिया में शांति जरूरी है।

    https://twitter.com/narendramodi/status/2094433881714032725

    ईरान के राष्ट्रपति से भी मिले मोदी

    पुतिन के साथ बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान पेजेशकियान ने कहा कि भारत मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में भूमिका निभा सकता है, क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय देश भी भारत की बात सुनते हैं। उन्होंने मोदी से डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करने और ईरान पर हमले बंद करने के लिए कहने का आग्रह किया।

  • इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में जाने पर अर्चना पूरन सिंह से नाराज हुए सुनील पाल

    इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में जाने पर अर्चना पूरन सिंह से नाराज हुए सुनील पाल

    कॉमेडियन सुनील पाल ने समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में अर्चना पूरन सिंह की मौजूदगी पर नाराजगी जताई है। शो के एक एपिसोड में अर्चना पूरन सिंह और ओरी सहित कई चर्चित चेहरे शामिल हुए थे। सुनील पाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा कि उन्हें अर्चना और उनके परिवार को लेकर शो में की गई टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।

    अर्चना पूरन सिंह से पूछा शो में जाने का कारण

    सुनील पाल ने अर्चना पूरन सिंह को अपना गुरु बताते हुए सवाल किया कि उन्हें इस शो में जाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि वह अर्चना के प्रशंसक हैं और कथित तौर पर उनके परिवार का मजाक उड़ाया जाना उन्हें बुरा लगा। उनके मुताबिक, अर्चना एक बड़ी और सम्मानित कलाकार हैं, जिनके पास काम की कमी नहीं है। ऐसे में उन्हें उन कार्यक्रमों का चयन करना चाहिए, जहां उनका और उनके परिवार का सम्मान बना रहे।

    कॉमेडियन ने दावा किया कि शो में अर्चना के बच्चों, पति और परिवार को लेकर अपमानजनक बातें कही गईं। उन्होंने कहा कि इससे अर्चना के प्रशंसकों को भी दुख पहुंचा होगा। सुनील पाल ने इसे अर्चना और उनके परिवार के सम्मान से जोड़ते हुए शो में उनकी भागीदारी की आलोचना की।

    पैसे या प्रलोभन के लिए ऐसे मंचों से दूर रहने की सलाह

    सुनील पाल ने कहा कि अर्चना पूरन सिंह को नाम और पैसा दोनों मिले हैं, इसलिए वह यह चुन सकती हैं कि उन्हें कहां जाना चाहिए और कहां नहीं। उन्होंने सलाह दी कि पैसे या किसी अन्य प्रलोभन के कारण ऐसी जगहों पर जाना बंद करना चाहिए, जहां परिवार का सम्मान न हो। वीडियो में उन्होंने दोहराया कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुरा लगा।