घर खरीदने से पहले सिर्फ लोकेशन नहीं, इन 5 जरूरी बातों की भी करें जांच

घर खरीदने से पहले जरूरी बातों की जांच

घर खरीदते समय मेट्रो, स्कूल-कॉलेज और बाजार से दूरी जैसी लोकेशन से जुड़ी बातों पर सबसे पहले ध्यान जाता है। हालांकि, अच्छी लोकेशन अकेले किसी प्रॉपर्टी को सुरक्षित घर या बेहतर निवेश नहीं बनाती। प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति, RERA रिकॉर्ड, बिल्डर का पिछला प्रदर्शन, वास्तविक खरीद लागत और अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों की जांच भी जरूरी है।

प्रोजेक्ट का RERA रिकॉर्ड जांचें

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट खरीदने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन जांचना चाहिए। Real Estate Act, 2016 के तहत संबंधित प्रोजेक्ट का RERA में रजिस्ट्रेशन जरूरी है, हालांकि कानून में कुछ छूट भी दी गई हैं। केवल दिए गए RERA नंबर पर भरोसा करने के बजाय संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट की स्थिति, प्रमोटर की जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों को क्रॉस-चेक करना चाहिए।

टाइटल और दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं

प्रॉपर्टी खरीदने में कीमत के साथ टाइटल और दस्तावेजों से जुड़ा जोखिम भी होता है। जमीन का मालिक कौन है, संपत्ति पर कोई कर्ज या कानूनी दावा तो नहीं है और जरूरी मंजूरियां उपलब्ध हैं या नहीं, इन सभी बातों की जांच जरूरी है। केवल बिल्डर या प्रॉपर्टी ब्रोकर के दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय संपत्ति के वकील से टाइटल और अन्य जरूरी कागजात की स्वतंत्र कानूनी जांच कराई जा सकती है।

बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड देखें

बड़े ब्रांड के नाम या मार्केटिंग कैंपेन को भविष्य में समय पर डिलीवरी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बिल्डर के पुराने प्रोजेक्टों में पजेशन समय पर मिला या नहीं, निर्माण की गुणवत्ता कैसी रही और खरीदारों की शिकायतें हैं या नहीं, इसकी जानकारी लेना जरूरी है। इसके लिए बिल्डर के दो से तीन पुराने प्रोजेक्ट देखकर वहां रहने वाले लोगों से बात करना उपयोगी हो सकता है।

बेस कीमत के बजाय पूरी खरीद लागत निकालें

रुपये 80 लाख के फ्लैट की वास्तविक लागत इससे अधिक हो सकती है। बेस कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, जहां लागू हो वहां जीएसटी, पार्किंग, क्लब या अन्य सुविधाओं के शुल्क, मेंटेनेंस जमा, ब्रोकरेज और इंटीरियर का खर्च भी जुड़ सकता है। होम लोन लेने पर प्रोसेसिंग, दस्तावेजीकरण और अन्य संबंधित शुल्क भी देने पड़ सकते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक की उपभोक्ता गाइडलाइन के मुताबिक, खरीदारों को केवल ईएमआई या ब्याज दर पर ध्यान देने के बजाय लोन की पूरी लागत, शुल्क, डाउन पेमेंट और अन्य खर्चों की तुलना करनी चाहिए। सभी अतिरिक्त खर्च जोड़ने के बाद सामने आने वाली राशि ही प्रॉपर्टी की वास्तविक खरीद लागत होगी।

अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों पर ध्यान दें

लोकेशन महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल मौजूदा समय में मेट्रो या बाजार की दूरी देखना पर्याप्त नहीं है। घर खरीदने से पहले यह भी देखना चाहिए कि वह स्थान अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों के लिहाज से कितना उपयुक्त रहेगा।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *