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  • Where is My Train: ट्रेन की देरी से आया ऐप का विचार, Google ने 2018 में खरीदी कंपनी

    Where is My Train: ट्रेन की देरी से आया ऐप का विचार, Google ने 2018 में खरीदी कंपनी

    ट्रेन की देरी और उसकी सही लोकेशन नहीं मिल पाने की समस्या ने अहमद निजाम और उनकी टीम को Where is My Train ऐप बनाने का विचार दिया। वर्ष 2015 में लॉन्च हुआ यह ऐप यात्रियों को ट्रेन की लोकेशन और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। बाद में इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने Google का ध्यान खींचा और कंपनी ने वर्ष 2018 में ऐप बनाने वाली Sigmoid Labs का अधिग्रहण कर लिया।

    यात्रियों की समस्या से तैयार हुआ ऐप

    रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अक्सर यह पता नहीं चल पाता था कि उनकी ट्रेन कहां पहुंची है और उसे स्टेशन आने में कितना समय लगेगा। ट्रेन के देरी से चलने पर यह परेशानी और बढ़ जाती थी। अहमद निजाम और उनकी टीम ने इसी समस्या को देखते हुए ऐसा ऐप तैयार किया, जिससे ट्रेन की लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल सके।

    बिना इंटरनेट और GPS के ट्रेन ट्रैकिंग

    Where is My Train की प्रमुख विशेषता ऑफलाइन ट्रेन ट्रैकिंग थी। कई मामलों में उपयोगकर्ता इंटरनेट और GPS के बिना भी ट्रेन की लोकेशन पता कर सकते थे। इसके लिए ऐप मोबाइल टावर से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करता था। कमजोर इंटरनेट कनेक्शन वाले इलाकों में यह सुविधा यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हुई।

    ऐप में लाइव ट्रेन स्टेटस और टाइमटेबल के साथ PNR स्टेटस, प्लेटफॉर्म की जानकारी तथा कोच की स्थिति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इन सेवाओं के कारण यह ऐप धीरे-धीरे ट्रेन यात्रियों के बीच लोकप्रिय हो गया।

    Google ने 2018 में किया अधिग्रहण

    ऐप की बढ़ती लोकप्रियता के बाद Google ने वर्ष 2018 में इसे बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया। Google ने इस सौदे की आधिकारिक कीमत सार्वजनिक नहीं की थी। हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी कीमत करीब 280 करोड़ रुपये बताई गई। रोजमर्रा की एक सामान्य समस्या के समाधान के रूप में शुरू हुआ यह विचार इस अधिग्रहण तक पहुंचा।

  • सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट: गिरवी शेयर, पर्सनल गारंटी और NCLT विवाद की पूरी कहानी

    सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट: गिरवी शेयर, पर्सनल गारंटी और NCLT विवाद की पूरी कहानी

    ज़ी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा का कर्ज संकट गिरवी रखे शेयरों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हुए घाटे और व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी देनदारियों के कारण लगातार गहराता गया। लेनदारों के लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के बीच नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT ने 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान और 25 लाख रुपये की प्रक्रिया फीस पर उन्हें देनदारियों से मुक्त करने का आदेश दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद NCLT की नई पीठ ने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए संपत्तियों के हस्तांतरण पर भी पाबंदी लगा दी।

    ज़ी के शेयर गिरवी रखकर जुटाई गई पूंजी

    सुभाष चंद्रा ने 1990 के दशक में निजी सैटेलाइट चैनल ज़ी टीवी की शुरुआत की थी। बाद में समूह ने मीडिया से बाहर पूंजी की अधिक जरूरत वाले क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाया। इन परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से ज़ी एंटरटेनमेंट यानी ZEEL में प्रमोटर हिस्सेदारी और शेयरों को गिरवी रखा गया। शेयर बाजार में ज़ी का प्रदर्शन मजबूत रहने तक यह व्यवस्था चलती रही, लेकिन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी और घाटा बढ़ने से समूह का वित्तीय संतुलन बिगड़ गया।

    वर्ष 2019 की शुरुआत में सामने आया कि समूह पर करीब 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। जनवरी 2019 में एक संदिग्ध कंपनी से समूह के जुड़ाव की खबरों के बाद उसकी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। ZEEL का शेयर 26 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि डिश टीवी के शेयर में करीब 33 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे गिरवी रखे शेयरों का मूल्य भी तेजी से घट गया।

    शेयरों का मूल्य कम होने पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अतिरिक्त रकम या संपत्तियों की मांग की। गिरवी का जरूरी अनुपात कायम नहीं रहने पर लेनदारों ने शेयर बेचकर वसूली शुरू की। इस बिकवाली से शेयरों पर दबाव और बढ़ा तथा उनकी कीमतें नीचे जाती रहीं। नतीजतन, गिरवी शेयरों पर लिए गए कर्ज और बाजार में गिरती कीमतों का संकट एक-दूसरे को बढ़ाता चला गया।

    पर्सनल गारंटी ने बढ़ाया व्यक्तिगत जोखिम

    सुभाष चंद्रा के लिए सबसे बड़ा जोखिम उनकी ओर से दी गई पर्सनल गारंटी बनी। सामान्य स्थिति में किसी कंपनी का कर्ज उसकी संपत्तियों तक सीमित रहता है, लेकिन व्यक्तिगत गारंटी देने पर कंपनी के भुगतान में विफल रहने की स्थिति में गारंटर की निजी संपत्ति और आर्थिक हैसियत भी दायरे में आ जाती है। उनकी बुनियादी ढांचा कंपनियों को कर्ज दिलाने के लिए दी गई ऐसी गारंटियों के कारण कंपनियों की देनदारियां उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़ गईं।

    कंपनियों के डिफॉल्ट के बाद लेनदारों ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की। चंद्रा का कहना है कि उनका अपना कर्ज करीब चार हजार करोड़ रुपये था, जबकि बाकी मामले व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े थे। संकट कम करने के लिए सोलर पावर प्लांट, हाईवे परियोजनाएं और अन्य संपत्तियां बेची गईं। ज़ी एंटरटेनमेंट में बड़ी हिस्सेदारी बेचने के बाद कंपनी पर उनका नियंत्रण भी समाप्त हो गया।

    सुभाष चंद्रा का दावा है कि उन्होंने और उनके समूह ने संपत्तियां बेचकर मूल 45,000 करोड़ रुपये में से लगभग 43,000 करोड़ रुपये लेनदारों को लौटा दिए। इसके बावजूद पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियां बनी रहीं। वर्ष 2022 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर व्यक्तिगत दिवालियापन की अदालती प्रक्रिया शुरू की।

    NCLT के आदेश में मिली राहत

    NCLT के सामने लेनदारों ने करीब 22,006 करोड़ रुपये का दावा किया था, जिसमें सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियां शामिल थीं। ट्रिब्यूनल ने उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति के आधार पर 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान और 25 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रक्रिया फीस के साथ देनदारियों से मुक्ति देने का आदेश दिया। इस व्यवस्था को करीब 99.97 प्रतिशत कर्जमाफी के रूप में देखा गया और इसके बाद लेनदारों की वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठे।

    लेनदारों की वोटिंग पर क्यों उठा विवाद

    कॉर्पोरेट कर्ज प्रक्रिया में लेनदारों का मतदान अधिकार उनके दावे के आकार के आधार पर तय होता है। इस मामले में 23 लेनदारों की सूची में HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, IDBI बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस और यूनियन बैंक जैसी संस्थाएं शामिल थीं। इन बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन मतदान में उनकी संयुक्त हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत ही थी। LIC हाउसिंग फाइनेंस के पास इनमें सबसे अधिक छह प्रतिशत मतदान अधिकार था।

    दूसरी ओर, वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर के पास 28.49 प्रतिशत, लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स के पास 16.85 प्रतिशत, कैटेलिस्ट ट्रस्टीशिप के पास 11.85 प्रतिशत और कॉर्पकॉल एडवाइजर्स के पास 10.30 प्रतिशत मतदान अधिकार था। इन इकाइयों ने सुभाष चंद्रा की इनसॉल्वेंसी योजना के पक्ष में मतदान किया। अधिक मतदान हिस्सेदारी के कारण उनका समर्थन बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के विरोध पर भारी पड़ा, जिससे पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई।

    नई पीठ ने पुराने आदेश पर लगाई रोक

    बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने NCLT के आदेश को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT में चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू की। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी राहत मिलने से व्यक्तिगत गारंटी की प्रभावशीलता पर असर पड़ेगा। इस बीच विवाद को देखते हुए NCLT ने पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया। मंगलवार को नई पीठ ने पिछले आदेश पर रोक लगा दी और सुभाष चंद्रा को निर्देश दिया कि गारंटर के तौर पर वे अपनी संपत्तियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित न करें।

    इस तरह सुभाष चंद्रा को मिली राहत फिलहाल कानूनी विवाद में फंसी हुई है। ज़ी एंटरटेनमेंट पर उनका नियंत्रण पहले ही समाप्त हो चुका है, जबकि पर्सनल गारंटी से जुड़ी देनदारियों और लेनदारों की वोटिंग पर अंतिम स्थिति आगे की अदालती कार्यवाही से तय होगी।

  • SCO समिट की क्रॉप्ड तस्वीर पर चर्चा के बाद शहबाज शरीफ ने शेयर की पूरी ग्रुप फोटो

    SCO समिट की क्रॉप्ड तस्वीर पर चर्चा के बाद शहबाज शरीफ ने शेयर की पूरी ग्रुप फोटो

    किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की ग्रुप फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने पहले सम्मेलन की एक क्रॉप्ड तस्वीर साझा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेता दिखाई नहीं दे रहे थे। बाद में शहबाज शरीफ की ओर से पूरी ग्रुप फोटो साझा की गई, जिसमें सम्मेलन में शामिल सभी नेता नजर आए।

    एससीओ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक साथ हाथ मिलाया। इस दौरान तीनों नेता गर्मजोशी से मिलते दिखाई दिए। शहबाज शरीफ भी आसपास मौजूद थे और मंच की ओर किनारे से पहुंचते नजर आए।

    क्रॉप्ड तस्वीर में कौन-कौन दिखाई दिए

    फोटो सेशन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ की पूरी फैमिली फोटो साझा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल से भी एक तस्वीर साझा की गई, लेकिन वह क्रॉप की हुई थी। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट तोकायेव, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शहबाज शरीफ, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव दिखाई दे रहे थे। तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी और चार अन्य नेता नजर नहीं आ रहे थे।

    बाद में शहबाज शरीफ की ओर से साझा की गई पूरी ग्रुप फोटो में सभी नेता दिखाई दिए। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पहले साझा की गई तस्वीर में भी सभी नेता मौजूद थे। इनमें शहबाज शरीफ के साथ किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी शामिल थे।

    सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाएं

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई क्रॉप्ड तस्वीर पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रतिक्रियाएं दीं। एक उपयोगकर्ता ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई पूरी तस्वीर कमेंट में पोस्ट करते हुए उसे ‘फुल पिक्चर’ बताया, जबकि एक अन्य ने ‘टिपिकल पाकिस्तान माइंडसेट’ लिखा। एक उपयोगकर्ता ने शहबाज शरीफ की तस्वीर में बदलाव कर उसे साझा किया। इसके बाद एससीओ समिट की यह ग्रुप फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

  • ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्य कौन हैं?

    नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले शोभिनव सत्या चर्चा में हैं। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है। स्रोत में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दो करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

    नीम करोली बाबा की भूमिका में शोभिनव सत्या

    फिल्म में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव के लक्ष्मण नारायण शर्मा की कहानी दिखाई गई है, जो आगे चलकर नीम करोली बाबा के नाम से विख्यात हुए। शोभिनव सत्या ने पर्दे पर उनकी वेशभूषा, हाव-भाव, सौम्यता और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया है। उनके अभिनय और सादगी को दर्शकों से सराहना मिलने की बात कही गई है।

    लखनऊ से शुरू हुआ अभिनय का सफर

    शोभिनव सत्या लखनऊ में पले-बढ़े हैं। उन्होंने लखनऊ के ऑपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स से अभिनय और फिल्म निर्माण का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों को समझा। ‘हनुमान अंश’ बतौर अभिनेता उनकी पहली फिल्म है, लेकिन इससे पहले वह कैमरे के पीछे विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

    सहायक निर्देशन और स्क्रिप्ट विभाग में किया काम

    IMDb के रिकॉर्ड्स के अनुसार, शोभिनव ने 2019 में आई वेब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ में ट्रेनी असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में करियर शुरू किया था। वर्ष 2020 में आई ‘हैप्पिली एवर आफ्टर’ में उन्होंने स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम किया। वर्ष 2025 में टीवी शो ‘सीआईडी’ के कई एपिसोड में वह सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर भी रहे।

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने किया चयन

    फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी नीम करोली बाबा की भूमिका के लिए ऐसे नए चेहरे की तलाश में थे, जिसके व्यक्तित्व में मासूमियत और सादगी दिखाई दे। इसी दौरान उन्होंने शोभिनव सत्या को इस किरदार के लिए चुना। कैमरे के पीछे काम करने का उनका अनुभव इस भूमिका की तैयारी में उपयोगी साबित हुआ। फिल्म ‘आवारापन 2’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों के बीच सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और माउथ पब्लिसिटी के सहारे इसकी कमाई बढ़ने की बात कही गई है।

  • राम मंदिर के पहले सीईओ पर 2 सितंबर को हो सकता है फैसला, ट्रस्ट की बैठक में होगी चर्चा

    राम मंदिर के पहले सीईओ पर 2 सितंबर को हो सकता है फैसला, ट्रस्ट की बैठक में होगी चर्चा

    अयोध्या स्थित राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम पर बुधवार, 2 सितंबर को फैसला हो सकता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक मणिराम दास जी की छावनी में दोपहर 3 बजे से प्रस्तावित है। बैठक में सीईओ चयन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।

    राम मंदिर परिसर में मंगलवार को हुई बैठक में चयन समिति के पदाधिकारियों के साथ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन, अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी और निर्मोही अखाड़ा के महंत व ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास मौजूद रहे।

    तीन नाम किए गए शॉर्टलिस्ट

    सीईओ के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं। कमेटी में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे और पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली शामिल थे। कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

    ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि रिपोर्ट पर बुधवार को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा हो सकती है, हालांकि नाम घोषित करना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा।

    ट्रस्ट के खाली पदों पर भी हो सकता है निर्णय

    बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के तीन खाली पदों पर नियुक्ति को लेकर भी घोषणा हो सकती है। पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ये पद खाली हैं।

    सचिव पद पर जगदीश आफले के नाम की चर्चा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के सचिव पद के लिए जगदीश आफले की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है और उनके नाम की आधिकारिक घोषणा बुधवार को हो सकती है। साहित्यकार यतीन्द्र मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा और केंद्रीय परामर्श समिति के सदस्य दिनेश जी के भी ट्रस्ट में शामिल होने की संभावना बताई गई है।

  • सिंधु जल संधि पर हेग मध्यस्थता फैसले को भारत ने खारिज किया, गठन पर उठाए सवाल

    सिंधु जल संधि पर हेग मध्यस्थता फैसले को भारत ने खारिज किया, गठन पर उठाए सवाल

    हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में कहा है कि संधि पूरी तरह प्रभावी है और भारत को इसका पालन करना चाहिए। भारत ने इस फैसले को खारिज करते हुए मध्यस्थता न्यायाधिकरण के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं।

    भारत ने फैसले पर क्या कहा

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मध्यस्थता न्यायाधिकरण का गठन विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया था। मंत्रालय ने कहा, “आज गैर-कानूनी ढंग से गठित तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने सिंधु जल संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित एक फैसला जारी किया है।” भारत ने कहा कि वह इस फैसले को उसी तरह खारिज करता है, जैसे इस संस्था के पिछले फैसलों को करता आया है।

    भारत का कहना है कि इस न्यायाधिकरण को उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं है। नई दिल्ली के मुताबिक, जब न्यायाधिकरण का गठन ही संधि की शर्तों के अनुरूप नहीं हुआ तो उसके फैसले का कोई महत्व नहीं रह जाता।

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन क्या है

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी PCA नीदरलैंड्स के हेग में स्थित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 1899 और 1907 के हेग कन्वेंशन फॉर द पैसिफिक सेटलमेंट ऑफ इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स के तहत हुई थी। नाम में ‘कोर्ट’ होने के बावजूद इसमें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जैसी स्थायी पीठ नहीं होती। यह मध्यस्थता के लिए प्रशासनिक, कानूनी और रजिस्ट्री सहायता उपलब्ध कराता है।

    किसी विवाद को PCA के समक्ष लाने के लिए संबंधित पक्षों की सहमति जरूरी होती है। प्रत्येक मामले के लिए अलग अस्थायी न्यायाधिकरण गठित किया जाता है। PCA का इंटरनेशनल ब्यूरो रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं संभालता है। विवाद से जुड़े पक्ष सूचीबद्ध व्यक्तियों या बाहर से मध्यस्थ चुन सकते हैं। जरूरत पड़ने पर PCA के सेक्रेटरी-जनरल नियुक्ति प्राधिकारी की भूमिका निभाते हैं।

    फैसले लागू कराने की व्यवस्था

    PCA के फैसलों की बाध्यता संबंधित पक्षों की सहमति पर निर्भर करती है। संस्था के पास फैसले लागू कराने के लिए अपना कोई पुलिस, सैन्य या अन्य प्रत्यक्ष प्रवर्तन तंत्र नहीं है। कोई पक्ष फैसला स्वीकार नहीं करता है तो दूसरा पक्ष घरेलू अदालतों या द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से उसे लागू कराने का प्रयास कर सकता है।

    सिंधु जल संधि को लेकर विवाद

    सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने हेग स्थित मध्यस्थता व्यवस्था का रुख किया। न्यायाधिकरण ने भारत के खिलाफ फैसला सुनाया, जबकि नई दिल्ली ने उसके गठन को ही संधि की शर्तों के विपरीत बताते हुए निर्णय मानने से इनकार कर दिया। भारत ने इस मामले में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की बात कही है।

  • किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों से की मुलाकात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से हुई मुलाकातों को भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों के साथ अहम बातचीत की।

    रक्षा समझौते के बीच कूटनीतिक गतिविधियां

    ये मुलाकातें ऐसे समय हुई हैं, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस घटनाक्रम के बीच किर्गिस्तान में हुई भारत की कूटनीतिक बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, विमान में सवार थे 229 यात्री

    गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, विमान में सवार थे 229 यात्री

    गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 2102 को तकनीकी खराबी के बाद वापस गोवा के मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। विमान में 229 यात्री सवार थे। उड़ान भरने के कुछ देर बाद एक इंजन में खराबी की सूचना मिलने पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित की गई और विमान को वापस मोड़ दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट ने मंगलवार सुबह गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। इंजन में खराबी की सूचना मिलने के बाद पायलट विमान को मोपा स्थित एयरपोर्ट पर वापस ले आए, जहां उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

    विमान की मेंटेनेंस जांच जारी

    इंडिगो ने बताया कि 1 सितंबर 2026 को नॉर्थ गोवा से दिल्ली जा रही फ्लाइट 6E 2102 में उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी का पता चला था। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन करते हुए संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और पायलटों ने विमान को वापस मोड़कर मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा। विमान की मेंटेनेंस जांच चल रही है और सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही इसे दोबारा उड़ान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

    एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए बताया कि उन्हें रिफ्रेशमेंट और समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराई गई। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी किए गए हैं।

    बिलासपुर एयरपोर्ट पर विमान का टायर फटा

    इससे पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दिल्ली-बिलासपुर अलायंस एयर की एक फ्लाइट का टायर फट गया था। विमान में 37 यात्री और चालक दल के चार सदस्य सवार थे। घटना में किसी यात्री को नुकसान नहीं हुआ और सभी को सुरक्षित रूप से रनवे से टर्मिनल बिल्डिंग ले जाया गया।

  • SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, कहा- आतंकवाद का पूरा नेटवर्क खत्म करना जरूरी

    SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, कहा- आतंकवाद का पूरा नेटवर्क खत्म करना जरूरी

    किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए ‘रणनीतिक संपत्ति’ नहीं हो सकता। आतंकियों को पनाह और समर्थन देने वाले तथा आतंकवाद को नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों को स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद को पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई केवल आतंकियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। इसमें आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों का तंत्र शामिल है। उन्होंने सभी देशों से इस मुद्दे पर एक आवाज में बोलने और दोहरे मापदंड नहीं अपनाने का आह्वान किया।

    शांति, कनेक्टिविटी और अवसर पर जोर

    पीएम मोदी ने कहा कि SCO को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख आधार शांति और सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा अवसर हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया के साझा लक्ष्य को अफगानिस्तान की शांति एवं स्थिरता से भी जोड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में लगातार योगदान देता रहा है और आगे भी यह सहयोग जारी रखेगा।

    https://twitter.com/MEAIndia/status/2094663793855070243

    पश्चिम एशिया के संकट का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है तथा ग्लोबल साउथ के देशों को इसका सबसे अधिक बोझ उठाना पड़ता है। उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है।

    ड्रग्स तस्करी और संगठित अपराध पर सहयोग की अपील

    प्रधानमंत्री मोदी ने ड्रग्स की तस्करी को युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों पर काम करने वाले SCO तंत्रों के माध्यम से सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को केवल बैठकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक सहयोग और समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने कहा कि SCO के सहयोग का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने लोगों के बीच संबंधों को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों में इसे सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार SCO की सफलता का वास्तविक पैमाना युवाओं के लिए पैदा हुए अवसर, उद्यमियों के लिए खुले नए बाजार, किसानों को तकनीक से मिला लाभ और आम नागरिकों के जीवन में आया सुधार होना चाहिए।

    शिखर सम्मेलन में कई देशों के नेता शामिल

    किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं और फिलहाल संगठन के अध्यक्ष हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन मौजूद हैं। इसमें 10 सदस्य देश, 15 पार्टनर देश और दो ऑब्जर्वर देश शामिल हैं।

    यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। भारत 2017 में संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। इस बार विस्तारित ‘SCO Plus’ प्रारूप में भी बैठक हो रही है, जिसमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलौन सिसोलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंग्बे सहित कई नेता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं।

    दुनिया की GDP में SCO देशों की बड़ी हिस्सेदारी

    SCO के 10 सदस्य देश दुनिया की GDP में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। संगठन का उद्देश्य आपसी विश्वास, मित्रता और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। इसके प्रमुख लक्ष्यों में नई चुनौतियों और खतरों का मिलकर सामना करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाना भी शामिल है।

  • किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से की मुलाकात

    किर्गिस्तान यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से की मुलाकात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से मुलाकात हुई। इन बैठकों को भारत की बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच नया रक्षा समझौता हुआ है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और आर्मीनिया के प्रतिनिधियों के साथ अहम बातचीत की।