शरद पवार ने देवेंद्र फडणवीस को लिखा पत्र, सूखा प्रभावित किसानों के लिए रखीं 17 मांगें

सूखा प्रभावित किसानों के लिए 17 मांगें रखने वाले शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सूखा प्रभावित किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों को तत्काल राहत देने की मांग की है। उन्होंने सरकार के सामने कुल 17 मांगें रखी हैं और इन्हें बिना देरी लागू करने की अपील की है।

प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये सहायता की मांग

शरद पवार की प्रमुख मांगों में किसानों का कृषि कर्ज माफ करना, जमीन का राजस्व और कृषि बिजली बिल माफ करना, प्रत्येक परिवार को 25 किलो मुफ्त अनाज देना और किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल है। उन्होंने खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की सहायता देने की भी मांग की है।

पत्र में पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी की तत्काल व्यवस्था, रोजगार गारंटी के काम शुरू करने तथा जल संरक्षण के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास और मेस फीस माफ करने तथा फलबागों और फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग रखी गई है।

तीन दिन का विशेष अधिवेशन बुलाने की अपील

शरद पवार ने सूखे की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए विधानमंडल का तीन दिन का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है। उन्होंने दशहरा-दिवाली से पहले किसानों और खेत मजदूरों तक राहत पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार सूखे से जूझ रहे लोगों की मुश्किलों पर गंभीरता से विचार करे।

विधायक और सांसद देंगे एक महीने का वेतन

शरद पवार के आवास पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई, जिसमें सूखे की स्थिति पर चर्चा की गई। पार्टी ने अपने सभी विधायकों और सांसदों का एक महीने का वेतन सूखा प्रभावित किसानों के लिए देने का फैसला किया है।

28 सितंबर से सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा

शरद पवार 28 सितंबर से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वह किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान और सूखे की स्थिति का जायजा लेंगे। रोहित पवार भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं और इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था और राज्य का 75 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में बताया था।

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