बड़वास में एक टैंकर पलटने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-707 पर करीब आठ घंटे तक यातायात बाधित रहने की घटना ने सड़क की आपातकालीन व्यवस्था, निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 1352 करोड़ रुपये की लागत वाले इस कॉरिडोर पर हादसे के बाद यातायात बहाल करने में लगे समय को देखते हुए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या संसाधन और कार्ययोजना उपलब्ध हैं।
आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल
राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर दुर्घटना होने की स्थिति में क्रेन और भारी वाहन हटाने वाले अन्य संसाधनों की तत्काल उपलब्धता आवश्यक है। यदि ये संसाधन मौजूद थे तो उन्हें घटनास्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा और यदि उपलब्ध नहीं थे तो इस मार्ग की आपदा प्रबंधन योजना क्या है, इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
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सुरक्षा और तकनीकी ऑडिट की स्थिति
सड़क निर्माण पर बड़ी राशि खर्च होने के बाद इसकी तकनीकी गुणवत्ता और यातायात सुरक्षा के स्वतंत्र ऑडिट की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। मार्ग की ढाल, मोड़, चढ़ाई, चौड़ाई, जल निकासी, सुरक्षा अवरोध और भारी वाहनों की आवाजाही जैसे पहलुओं की जांच किस एजेंसी ने की, इसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है। यदि विस्तृत सुरक्षा ऑडिट हुआ है तो उसकी रिपोर्ट सामने आनी चाहिए और यदि नहीं हुआ तो यह बताया जाना चाहिए कि मार्ग को व्यापक स्वतंत्र परीक्षण के बिना यातायात के लिए कैसे इस्तेमाल किया गया।
निर्माण एजेंसियों और गुणवत्ता जांच की जवाबदेही
निर्माण कंपनियों को किए गए भुगतान, इस्तेमाल की गई सामग्री और सड़क की गुणवत्ता जांच से संबंधित प्रक्रिया भी जवाबदेही के दायरे में आती है। गुणवत्ता परीक्षण के लिए लिए गए नमूनों की रिपोर्ट और स्थानीय शिकायतों वाले हिस्सों पर विभाग की कार्रवाई का विवरण सामने रखा जाना चाहिए। जांच में डिजाइन या निर्माण संबंधी कमी मिलने पर निर्माण एजेंसी, सलाहकार, गुणवत्ता जांच एजेंसी और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए।
हस्तांतरण और रखरखाव की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय राजमार्ग का संबंधित हिस्सा हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल को सौंपे जाने के बाद मौजूदा स्थिति की जिम्मेदारी का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि विभाग ने सड़क का हस्तांतरण किस स्थिति में स्वीकार किया और उससे पहले विस्तृत तकनीकी निरीक्षण कराया गया या नहीं। यदि निर्माण संबंधी कमियां सूचीबद्ध की गई थीं तो उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी किसे दी गई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
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आठ घंटे का जाम और वैकल्पिक मार्ग
बड़वास में करीब आठ घंटे तक सैकड़ों वाहन फंसे रहे। इनमें बसों, ट्रकों, निजी वाहनों और मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस के शामिल होने की बात भी सामने आई है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन की वैकल्पिक यातायात और आपातकालीन डायवर्जन योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान और दुर्घटना के समय वाहनों को तत्काल दूसरे मार्ग पर भेजने की व्यवस्था के बारे में भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
सार्वजनिक जवाब और स्वतंत्र जांच की जरूरत
बड़वास की घटना के बाद मामला केवल सड़क खोलने तक सीमित नहीं है। सरकार और संबंधित विभागों को बताना चाहिए कि NH-707 की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है। सड़क में तकनीकी खामी मिलने पर उसकी मरम्मत कौन करेगा और निर्माण सही होने की स्थिति में हादसे के बाद यातायात व्यवस्था इतने लंबे समय तक क्यों प्रभावित रही, इन प्रश्नों के तथ्यात्मक उत्तर अपेक्षित हैं।
आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता, क्रेन के पहुंचने में लगा समय, संवेदनशील हिस्सों को लेकर उठती शिकायतें और स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट की स्थिति सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े विषय हैं। जनता के पैसे से बने 1352 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माण से लेकर रखरखाव और दुर्घटना प्रबंधन तक प्रत्येक स्तर की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

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