जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वेतन-भत्ते बढ़ाने वाले विधेयक वापस, उमर अब्दुल्ला ने बताई वजह

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वेतन और भत्ते से जुड़े विधेयक वापस

श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने BJP विधायकों के एतराज के बाद सदस्यों के वेतन और भत्ते बढ़ाने से जुड़े विधेयक वापस ले लिए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बढ़ोतरी की सिफारिश करने वाली हाउस कमेटी में कोई असहमति नोट नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सदस्य वेतन और भत्ते चाहते थे, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं का हवाला देकर इस मुद्दे का राजनीतिकरण भी कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने सदन में कहा, “मैं कभी इसके पक्ष में नहीं था। अगर एक भी सदस्य विरोध करता है, तो यह कभी पास नहीं होगा। मैं बिल वापस लेता हूं।” इसके बाद सदन ने बहुमत से विधेयक वापस लेने के पक्ष में मतदान किया।

वेतन, भत्ते और पेंशन बढ़ाने का था प्रस्ताव

इससे पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में पांच विधेयक पेश किए थे। इनमें विधायकों और मंत्रियों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी के साथ पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था। स्रोत में प्रस्तावित बढ़ोतरी की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।

उमर अब्दुल्ला कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री भी हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1956 में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किया था।

पंचायत चुनावों की समयसीमा पर भी जवाब

विधानसभा में पंचायत चुनावों की समयसीमा से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए BJP की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे “सही समय” के कथन पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “आप राज्य के लिए सही समय कहते हैं, हम पंचायत चुनावों के लिए भी यही कहेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि BJP पंचायत चुनावों की समयसीमा पूछती रहेगी, तो सरकार भी जवाब दे सकती है कि चुनाव सही समय पर होंगे। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि “सही समय” का अर्थ क्या है और यह कब आएगा या इसे कैसे तय किया जाएगा।

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