Author: evenpixels

  • सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा की अपील की

    सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा की अपील की

    कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विज्ञान जैसे मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की है। शिकागो में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि देश जरूरी विषयों को छोड़कर आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझा हुआ है।

    मंदिरों के बजाय स्कूलों पर जोर

    पित्रोदा ने मंदिरों की जगह स्कूल बनाने संबंधी अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि बहस का केंद्र शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली गालियों को नजरअंदाज करने योग्य बताया और सीएए का विरोध करने वाले युवाओं की तारीफ की।

    संस्थाओं की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

    कांग्रेस नेता ने न्यायपालिका, चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उनका दावा था कि ये संस्थाएं अब स्वतंत्र नहीं रह गई हैं।

  • SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानदंड की जगह नहीं’

    SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश, ‘आतंकवाद पर दोहरे मानदंड की जगह नहीं’

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मानदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और सदस्य देशों के लोगों के लिए नए अवसरों को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा।

    आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने का आह्वान

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पूरे तंत्र को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों सहित इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने और आतंकियों को पनाह या समर्थन देने वालों को स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि इसे रणनीतिक हथियार नहीं बनाया जा सकता।

    प्रधानमंत्री ने ड्रग तस्करी को भी युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को सकारात्मक कदम बताया। साथ ही कहा कि इन केंद्रों को व्यावहारिक समन्वय और समय पर कार्रवाई के प्रभावी साधन के रूप में विकसित करना होगा।

    संप्रभुता के सम्मान के साथ कनेक्टिविटी पर जोर

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत बाजारों को जोड़ने, व्यापार आसान बनाने और विकास के नए रास्ते खोलने वाले प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, ऐसे प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने सड़कों, रेलवे और हवाई गलियारों के साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल दस्तावेजों को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

    सुरक्षा के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट ने दिखाया है कि किसी क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखला पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकटों की सबसे भारी कीमत ग्लोबल साउथ के देशों को चुकानी पड़ती है। भारत का मानना है कि तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

    लोगों तक पहुंचे एससीओ सहयोग का लाभ

    प्रधानमंत्री ने अवसर को एससीओ सहयोग का तीसरा स्तंभ बताते हुए कहा कि संगठन के सहयोग का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंधों को सहयोग के केंद्र में रखने की बात कही। उनके अनुसार सफलता का आकलन युवाओं के लिए बने अवसरों, उद्यमियों को मिले नए बाजारों, किसानों को तकनीक से हुए लाभ और नागरिकों के जीवन में आए सुधार से होना चाहिए।

    बिश्केक में आयोजित सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन की थीम ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ है। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से हाथ मिलाया और दोनों नेता एक साथ बैठक कक्ष में पहुंचे।

    पुतिन सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें

    सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों की समीक्षा के साथ वैश्विक संघर्षों और शांति की आवश्यकता पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने जारी युद्धों को समाप्त कर स्थायी शांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर जोर देते हुए कहा कि कूटनीति ही मानवता की सच्ची पुकार है।

    किर्गिस्तान के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने रूस, ईरान, किर्गिज गणराज्य और आर्मेनिया के नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने बिश्केक में छठे विश्व नोमैड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया, जहां एससीओ के सदस्य देशों के अन्य नेता मौजूद थे।

    https://twitter.com/aajtak/status/2094656545623830855
    https://twitter.com/aajtak/status/2094649072439460161
    https://twitter.com/ANI/status/2094646035276861793
    https://twitter.com/narendramodi/status/2094654097425338405
  • सिंधु जल संधि पर भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    सिंधु जल संधि पर भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित बताते हुए कहा कि उसके फैसले का भारत के संप्रभु कार्यों या देश की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय के अनुसार, संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला लागू रहेगा।

    विदेश मंत्रालय ने मध्यस्थता संस्था के उस फैसले को मानने से इनकार किया है, जिसमें सिंधु जल संधि को अब भी लागू बताया गया और भारत से जम्मू-कश्मीर की एक पनबिजली परियोजना पर काम सीमित करने के लिए कहा गया था। भारत ने कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    मध्यस्थता अदालत ने फैसले में क्या कहा

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने अपने फैसले में कहा कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और भारत को इसके तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। अदालत के अनुसार, इन जिम्मेदारियों में पश्चिमी नदियों पर पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन और संचालन से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

    अदालत ने कहा कि विश्व बैंक की ओर से नियुक्त एक निष्पक्ष विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक यह तय करेगा कि हिमालयी क्षेत्र में पनबिजली संयंत्र का निर्माण संधि के अनुरूप है या नहीं। अदालत ने पाकिस्तान की मांग स्वीकार करते हुए कहा कि निष्पक्ष विशेषज्ञ के फैसले के 90 दिन बाद तक भारत को रातले पनबिजली संयंत्र में निर्धारित स्तर से ऊपर बांध की दीवार और पावर इनटेक स्ट्रक्चर बनाने की अनुमति नहीं होगी।

    अदालत के गठन पर भारत ने उठाए सवाल

    भारत ने कहा कि इस मध्यस्थता अदालत का गठन विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस संस्था को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी, न ही वह इसके समक्ष पेश हुआ है। भारत ने इसके पहले के फैसलों को भी स्वीकार नहीं किया था।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित फैसला जारी किया है, जिसे भारत पूरी तरह खारिज करता है। सरकार का कहना है कि इस संस्था के मौजूदा या भविष्य के किसी भी फैसले से भारत की परियोजनाओं से संबंधित कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

    1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता

    भारत ने पहलगाम हमले के बाद पिछले साल अप्रैल में सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। यह जल-बंटवारा समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। संधि पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। स्रोत सामग्री के अनुसार, यह संधि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत खेतों तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

  • बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कर शांति की ओर बढ़ने पर जोर

    बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कर शांति की ओर बढ़ने पर जोर

    किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। बातचीत के दौरान मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता और इसका हर दिन पूरी इंसानियत पर भारी पड़ रहा है।

    मोदी ने पुतिन से युद्ध खत्म करने के उपाय तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति चाहता है, क्योंकि शांति ही विकास का मार्ग है और युद्ध से केवल बर्बादी होती है। दोनों नेताओं की बैठक में भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी, रक्षा और व्यापार से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।

    भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ विस्तार से बातचीत हुई और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई। उन्होंने हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर प्रसन्नता जताई।

    बैठक में ऊर्जा, नवाचार, अंतरिक्ष, उर्वरक और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क को भारत-रूस मित्रता के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। मोदी ने कहा कि आर्थिक विकास के लिए दुनिया में शांति जरूरी है।

    https://twitter.com/narendramodi/status/2094433881714032725

    ईरान के राष्ट्रपति से भी मिले मोदी

    पुतिन के साथ बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान पेजेशकियान ने कहा कि भारत मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में भूमिका निभा सकता है, क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय देश भी भारत की बात सुनते हैं। उन्होंने मोदी से डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करने और ईरान पर हमले बंद करने के लिए कहने का आग्रह किया।

  • इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में जाने पर अर्चना पूरन सिंह से नाराज हुए सुनील पाल

    इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में जाने पर अर्चना पूरन सिंह से नाराज हुए सुनील पाल

    कॉमेडियन सुनील पाल ने समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट 2 में अर्चना पूरन सिंह की मौजूदगी पर नाराजगी जताई है। शो के एक एपिसोड में अर्चना पूरन सिंह और ओरी सहित कई चर्चित चेहरे शामिल हुए थे। सुनील पाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा कि उन्हें अर्चना और उनके परिवार को लेकर शो में की गई टिप्पणियां पसंद नहीं आईं।

    अर्चना पूरन सिंह से पूछा शो में जाने का कारण

    सुनील पाल ने अर्चना पूरन सिंह को अपना गुरु बताते हुए सवाल किया कि उन्हें इस शो में जाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि वह अर्चना के प्रशंसक हैं और कथित तौर पर उनके परिवार का मजाक उड़ाया जाना उन्हें बुरा लगा। उनके मुताबिक, अर्चना एक बड़ी और सम्मानित कलाकार हैं, जिनके पास काम की कमी नहीं है। ऐसे में उन्हें उन कार्यक्रमों का चयन करना चाहिए, जहां उनका और उनके परिवार का सम्मान बना रहे।

    कॉमेडियन ने दावा किया कि शो में अर्चना के बच्चों, पति और परिवार को लेकर अपमानजनक बातें कही गईं। उन्होंने कहा कि इससे अर्चना के प्रशंसकों को भी दुख पहुंचा होगा। सुनील पाल ने इसे अर्चना और उनके परिवार के सम्मान से जोड़ते हुए शो में उनकी भागीदारी की आलोचना की।

    पैसे या प्रलोभन के लिए ऐसे मंचों से दूर रहने की सलाह

    सुनील पाल ने कहा कि अर्चना पूरन सिंह को नाम और पैसा दोनों मिले हैं, इसलिए वह यह चुन सकती हैं कि उन्हें कहां जाना चाहिए और कहां नहीं। उन्होंने सलाह दी कि पैसे या किसी अन्य प्रलोभन के कारण ऐसी जगहों पर जाना बंद करना चाहिए, जहां परिवार का सम्मान न हो। वीडियो में उन्होंने दोहराया कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुरा लगा।

  • इंग्लैंड दौरे से रिजवान और इमाम को वापस भेज सकता है पाकिस्तान, PCB की घोषणा का इंतजार

    इंग्लैंड दौरे से रिजवान और इमाम को वापस भेज सकता है पाकिस्तान, PCB की घोषणा का इंतजार

    इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो बड़ी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान और ओपनर इमाम-उल-हक को इंग्लैंड दौरे से वापस पाकिस्तान भेजा जा सकता है। हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी PCB ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप पॉइंट्स टेबल में सबसे निचले स्थान पर मौजूद पाकिस्तान को लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पारी और 103 रन से हराया था। इसके बाद लॉर्ड्स में हुए दूसरे टेस्ट में भी पाकिस्तान को 194 रन से हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों नतीजों के साथ पाकिस्तान सीरीज गंवा चुका है।

    PCB अधिकारियों की बैठक में प्रदर्शन पर चर्चा

    जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे टेस्ट में हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने एक अहम बैठक की। इसमें PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी, COO सुमैर अहमद, PSL CEO सलमान नसीर, पूर्व खिलाड़ी एवं वरिष्ठ सिलेक्टर आकिब जावेद और सीमित ओवर क्रिकेट के हेड कोच माइक हेसन शामिल हुए। बताया गया है कि बैठक में इंग्लैंड दौरे पर टीम के प्रदर्शन और इंटरनेशनल मीडिया में पाकिस्तान टीम को लेकर हो रही चर्चा पर चिंता जताई गई। रिपोर्ट में टीम के मौजूदा हालात को लेकर शीर्ष स्तर पर नाराजगी का दावा भी किया गया है।

    इमाम की चोट पर सवाल, अब्दुल्ला फजल को मिल सकता है मौका

    दूसरे टेस्ट के पहले दिन फील्डिंग के दौरान चोट लगने के बाद इमाम-उल-हक बल्लेबाजी के लिए मैदान पर नहीं उतरे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी चोट को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। इस बीच 23 वर्षीय अब्दुल्ला फजल को इंग्लैंड भेजे जाने की संभावना है। वह अब तक पाकिस्तान के लिए दो टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

    https://twitter.com/ICC/status/2094105435863408991

    टेस्ट टीम की कोचिंग व्यवस्था में भी बदलाव संभव

    बैठक में पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कोचिंग व्यवस्था पर भी चर्चा होने की खबर है। सीमित ओवर क्रिकेट टीम के हेड कोच माइक हेसन को टेस्ट टीम की जिम्मेदारी देने की संभावना पर विचार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हेसन इंग्लैंड दौरे के बाकी हिस्से में टीम के साथ बने रह सकते हैं। ऐसा होने पर दौरे के बीच पाकिस्तान टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और टेस्ट टीम के हेड कोच सरफराज अहमद के भविष्य को लेकर सवाल बढ़ सकते हैं। फिलहाल PCB की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

  • पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में ABVP के अंकित बिढान अध्यक्ष निर्वाचित

    पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में ABVP के अंकित बिढान अध्यक्ष निर्वाचित

    पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार अंकित बिढान अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,879 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में ABVP समर्थकों ने जश्न मनाया और नारेबाजी की।

    संगठन ने अध्यक्ष पद पर मिली जीत को छात्रों के बीच अपने समर्थन की जीत बताया है। नतीजों के बाद यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

    रवनीत बिट्टू ने दी बधाई

    पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद रवनीत बिट्टू ने अंकित बिढान और ABVP को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संगठन की लगातार दूसरी जीत है और अंतिम 48 घंटों में SOI की ओर से ABVP उम्मीदवार को मिले समर्थन ने इसे खास बनाया। बिट्टू के अनुसार, भारी बहुमत छात्रों के बीच ABVP के नेतृत्व और दृष्टिकोण पर भरोसे को दर्शाता है।

    पीएचडी शोधार्थी हैं अंकित बिढान

    अंकित बिढान मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले हैं। जींद से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के विधि विभाग से कानून की पढ़ाई की। वर्तमान में वह पंजाब यूनिवर्सिटी के सामाजिक समावेशन अध्ययन केंद्र में पीएचडी शोधार्थी हैं।

    https://twitter.com/RavneetBittu/status/2094412875767144771
  • सिंधु जल संधि पर भारत ने हेग मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    सिंधु जल संधि पर भारत ने हेग मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    भारत ने सिंधु जल संधि पर हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित बताते हुए कहा कि उसके फैसले का भारत के संप्रभु कार्यों या चल रही परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय के अनुसार, सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला लागू रहेगा।

    मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सिंधु जल संधि अब भी पूरी तरह लागू है और भारत को जम्मू-कश्मीर में एक पनबिजली परियोजना पर काम सीमित करना चाहिए। इस पर भारत ने कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    मध्यस्थता अदालत ने फैसले में क्या कहा

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने कहा कि भारत के पास संधि को खत्म करने या रोकने का उचित कारण नहीं था। अदालत के अनुसार, भारत को संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। इनमें पश्चिमी नदियों पर बनाई जा रही पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन और संचालन से संबंधित दायित्व भी शामिल हैं।

    अदालत ने कहा कि विश्व बैंक की ओर से नियुक्त एक निष्पक्ष विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक तय करेगा कि हिमालयी क्षेत्र में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट का निर्माण संधि के अनुरूप है या नहीं। पाकिस्तान की मांग स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि निष्पक्ष विशेषज्ञ के फैसले के 90 दिन बाद तक भारत को रातले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट में तय स्तर से ऊपर बांध की दीवार और पावर इनटेक स्ट्रक्चर बनाने की अनुमति नहीं होगी।

    भारत ने अदालत के गठन पर उठाए सवाल

    भारत ने कहा कि इस मध्यस्थता अदालत का गठन विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए किया था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने इस संस्था को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी और न ही वह इसके सामने पेश हुआ। भारत ने इसके पहले के फैसलों को भी स्वीकार नहीं किया है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से गठित इस तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित फैसला जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस संस्था के मौजूदा या भविष्य के किसी भी फैसले का भारत की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता

    भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला अब भी लागू है। स्रोत के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद पिछले साल अप्रैल में भारत ने संधि रोक दी थी। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ जल-बंटवारा समझौता है। इस पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत खेतों के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

  • लियोनेल मेसी ने 39 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का ऐलान किया

    लियोनेल मेसी ने 39 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का ऐलान किया

    अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने 39 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान किया है। अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के लिए दो दशक से अधिक समय तक खेलने वाले मेसी ने कहा कि यह फैसला उनके लिए बेहद मुश्किल था। हालांकि, वह क्लब स्तर पर खेलना जारी रखेंगे।

    विदाई संदेश में कही दिल की बात

    मेसी ने इंस्टाग्राम पर जारी संदेश में कहा कि फाइनल के बाद काफी सोच-विचार करने पर उन्होंने राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का निर्णय किया। उन्होंने बताया कि इस फैसले से उन्हें गहरा दुख हुआ, लेकिन अब उन्हें यही सही समय लगा। मेसी के मुताबिक, उन्होंने अर्जेंटीना की जर्सी के लिए हमेशा कड़ी मेहनत की और मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया।

    2022 में अर्जेंटीना को बनाया विश्व विजेता

    मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे यादगार पल 2022 में आया, जब उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने कतर में फीफा विश्व कप जीता। यह 1986 के बाद अर्जेंटीना का पहला विश्व कप खिताब था। मेसी ने उस टूर्नामेंट में सात गोल किए और टीम की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई। उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने 2021 और 2024 में लगातार दो बार कोपा अमेरिका का खिताब भी अपने नाम किया।

    अर्जेंटीना ने 2026 विश्व कप में भी मेसी की कप्तानी में फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में स्पेन से हार गया। यह मेसी का छठा विश्व कप था। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में तीन विश्व कप फाइनल खेले। वर्ष 2014 में अर्जेंटीना को जर्मनी से हार मिली थी, जबकि 2022 में टीम चैंपियन बनी और 2026 में उपविजेता रही। अपने आखिरी विश्व कप में मेसी ने आठ गोल किए और चार गोल में सहायता की।

    क्लब स्तर पर खेलते रहेंगे मेसी

    इस महीने की शुरुआत में पिता जॉर्ज मेसी के निधन के बाद मेसी ने लंबे समय तक खेल जारी रखने को लेकर संदेह जताया था। उनके पिता का 8 अगस्त को 68 साल की उम्र में निधन हुआ था। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहने के बाद भी मेसी क्लब फुटबॉल खेलते रहेंगे। वह अमेरिका के मेजर लीग सॉकर क्लब इंटर मियामी से जुड़े हैं और उनका मौजूदा करार 2028 एमएलएस सत्र तक है।

  • सिंधु जल संधि पर भारत ने हेग मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    सिंधु जल संधि पर भारत ने हेग मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज किया

    भारत ने सिंधु जल संधि पर हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित बताते हुए कहा कि उसके फैसले का भारत के संप्रभु कार्यों या देश की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला लागू रहेगा।

    मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सिंधु जल संधि अभी भी लागू है। इसके साथ ही भारत को जम्मू-कश्मीर की एक पनबिजली परियोजना पर काम सीमित करने के लिए कहा गया था। भारत ने इस सुनवाई को खारिज करते हुए कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास उसके संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    मध्यस्थता अदालत ने फैसले में क्या कहा

    परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अनुसार सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है, क्योंकि भारत के पास समझौते को समाप्त या स्थगित करने का कोई उचित कारण नहीं था। अदालत ने कहा कि भारत को संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। इनमें पश्चिमी नदियों पर पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन और संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।

    अदालत ने कहा कि विश्व बैंक की ओर से नियुक्त एक निष्पक्ष विशेषज्ञ जुलाई 2027 तक तय करेगा कि हिमालयी क्षेत्र में पनबिजली संयंत्र का निर्माण संधि के अनुरूप है या नहीं। पाकिस्तान की मांग स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि निष्पक्ष विशेषज्ञ का फैसला आने के 90 दिन बाद तक भारत को रातले पनबिजली परियोजना में निर्धारित स्तर से ऊपर बांध की दीवार और पावर इनटेक स्ट्रक्चर बनाने की अनुमति नहीं होगी।

    भारत ने अदालत के गठन पर उठाए सवाल

    भारत ने कहा कि यह अदालत विश्व बैंक द्वारा सिंधु जल संधि की शर्तों के स्पष्ट उल्लंघन में बनाई गई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार गैर-कानूनी ढंग से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने संधि के तहत अंतरिम उपायों और स्थिति से संबंधित फैसला जारी किया है, जिसे भारत पूरी तरह खारिज करता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत इस संस्था के पहले के फैसलों को भी स्वीकार नहीं करता है।

    भारत सरकार के अनुसार उसने इस मध्यस्थता अदालत को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी। भारत का रुख रहा है कि संस्था का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। इसी कारण भारत न तो इसके सामने पेश हुआ और न ही उसने इसके पिछले फैसलों पर ध्यान दिया। सरकार ने कहा कि अदालत के मौजूदा या भविष्य के फैसलों का भारत की परियोजनाओं से जुड़े कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता

    भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला अभी भी लागू है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पिछले साल अप्रैल में यह संधि रोक दी थी। यह संधि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत खेतों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

    सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे से जुड़ा समझौता है। इस पर 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।