महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित किए, जानें कार्रवाई की वजह

पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस पर पहुंचा तुर्की का C-130 परिवहन विमान

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई के नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोप में मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इनमें कोलाबा का मैकडॉनल्ड्स, बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब, मलाड का नोवारा, नरीमन पॉइंट का स्टेटस रेस्टोरेंट और खार जिमखाना शामिल हैं। प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुंबई में तीन प्रतिष्ठानों को सील करने के साथ छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

FDA ने 19 और 20 अगस्त को पूरे महाराष्ट्र में दूध एवं डेयरी उत्पादों, प्रतिबंधित गुटखा-पान मसाला और अन्य खाद्य उत्पादों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया था। इस व्यापक कार्रवाई के केंद्र में महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंडे हैं, जिन्होंने नियमों के उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की बात कही है।

जांच में सामने आईं गंभीर खामियां

जांच के दौरान तापमान नियंत्रण में गंभीर लापरवाही मिलने का आरोप है। रेफ्रिजरेशन उपकरणों का कैलिब्रेशन नहीं किया गया था और उपकरणों तथा पाइरोमीटर के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से 5 डिग्री सेल्सियस तक अंतर पाया गया। इससे जल्दी खराब होने वाले और अधिक जोखिम वाले खाद्य पदार्थों के बैक्टीरिया के लिए खतरनाक तापमान क्षेत्र में पहुंचने की आशंका थी।

परिसर में जीवित कॉकरोच, पर्याप्त पेस्ट ट्रैप का अभाव और रसोई के फर्श पर सड़ा हुआ खाद्य कचरा मिलने की बात भी सामने आई। यह कचरा खाद्य पदार्थों के भंडारण और उन्हें तैयार करने वाले क्षेत्रों के पास पड़ा था। खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों पर गंदे सफाई के कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि खुले पैकेजिंग मटेरियल को उचित विभाजन के बिना रैक पर रखा गया था।

खुले खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगह के ऊपर लगे लाइट फिक्स्चर पर सुरक्षा कवर नहीं था और उन पर काफी धूल जमा थी। कर्मचारियों को गंदे जूते और इस्तेमाल किए गए सफाई के कपड़े छूने के बाद हाथ धोए बिना खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थ संभालते हुए पाए जाने का भी आरोप है। इन स्थितियों से केमिकल और माइक्रोबियल क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बताया गया है।

फर्जी दस्तावेज जमा करने का आरोप

कुछ प्रतिष्ठानों पर राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी के सामने फर्जी अनुपालन दस्तावेज जमा करने का आरोप भी है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 61 के तहत इसे गंभीर अपराध बताया गया है। सक्रिय कीट प्रकोप, जैविक संदूषण, बिना कैलिब्रेशन वाले कोल्ड स्टोरेज और खाद्य सामग्री के इस्तेमाल से संबंधित भ्रामक जानकारी सामने आने के बाद FDA ने माना कि प्रतिष्ठानों को अतिरिक्त समय देना जनस्वास्थ्य के लिए अस्वीकार्य जोखिम पैदा कर सकता है।

लाइसेंस निलंबित रहने के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान किसी खाद्य पदार्थ का उत्पादन, बिक्री या वितरण नहीं कर सकेंगे। इस अवधि में नियमों का उल्लंघन होने पर वैध लाइसेंस के बिना कारोबार करने के आरोप में तत्काल अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।

रेस्टोरेंट से क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस तक जांच

महाराष्ट्र में रेस्टोरेंट पर छापे मारने और लाइसेंस निलंबित करने के साथ क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस की भी जांच की जा रही है। ऐप के माध्यम से किराने का सामान खरीदने वाले ग्राहकों को भंडारण स्थल की स्वच्छता और रखरखाव की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं मिल पाती। इसी संदर्भ में तुकाराम मुंडे ने कहा, “अगर वे नियमों का पालन कर रहे हैं, तो उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। और जो ऐसा नहीं करते, उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं है।”

स्कूल कैंटीन के लिए भी सख्त निर्देश

महाराष्ट्र FDA ने राज्य के स्कूलों को परिसर से चॉकलेट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी अस्वास्थ्यकर वस्तुएं हटाने का निर्देश दिया है। यह आदेश फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट और FSSAI के ‘स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020’ के तहत जारी किया गया है। स्कूलों और उनके परिसर के 50 मीटर के दायरे में अधिक फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

इन निर्देशों के बाद कुछ स्कूलों ने कैंटीन के मेन्यू से वड़ा पाव और समोसा हटाकर इडली, डोसा, पोहा, शीरा और उपमा शामिल किए हैं। गैस वाली कोल्ड ड्रिंक्स के स्थान पर छाछ को जगह दी गई है। मुंडे के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ खान-पान की संस्कृति विकसित करना और स्वस्थ नागरिक तैयार करना है।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंडे की पहचान एक सख्त और समझौता नहीं करने वाले अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की थी। दो दशक से अधिक के प्रशासनिक करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है और सख्त कार्यशैली के कारण उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘सिंघम’ भी कहा जाता है।

उनके प्रशासनिक कार्यों में सोलापुर का जल संरक्षण अभियान प्रमुख रहा है, जहां उनके कार्यकाल में किए गए प्रयासों से सैकड़ों गांव टैंकर-मुक्त हुए। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें 2016 में ‘बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। अब FDA कमिश्नर के रूप में वह खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन पर जोर दे रहे हैं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *