तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने का आदेश वापस लिया

तमिलनाडु में छात्र प्रदर्शनों से संबंधित आदेश वापस

तमिलनाडु सरकार ने सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के छात्रों और युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों एवं आंदोलनों से दूर रखने से संबंधित अपना निर्देश वापस ले लिया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने इस आदेश को गैर-संवैधानिक बताते हुए इसका विरोध किया था और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की थी।

कॉलेजिएट शिक्षा विभाग ने सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी अपना पिछला निर्देश वापस लिया है। कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने आदेश में कहा कि विभाग की ओर से 17 अगस्त 2026 को जारी पिछला आदेश वापस लिया जा रहा है।

पहले आदेश में क्या निर्देश दिए गए थे

17 अगस्त को कॉलेज शिक्षा आयुक्त ने कॉलेज प्रिंसिपलों से स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों, पुलिस तथा जिला प्रशासन के साथ समन्वय करने को कहा था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्र और युवा विरोध प्रदर्शनों में शामिल न हों। इस निर्देश में 14 अगस्त के एक सरकारी पत्र का उल्लेख भी किया गया था, जिसमें संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्रवाई करने के लिए कहा गया था।

“बेहद जरूरी” चिह्नित संदेश में कॉलेजों को की गई कार्रवाई की जानकारी तुरंत डायरेक्टरेट ऑफ कॉलेजिएट एजुकेशन को देने का निर्देश था। यह आदेश दो राजनीतिक समूहों के प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं की भागीदारी को लेकर सरकार की चिंता के बीच जारी किया गया था।

भाजपा नेता ने किया था आदेश का समर्थन

भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने वामपंथी संगठनों और CJP को “अराजकता फैलाने वाले” बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठनों के नेता छात्रों को गुमराह करते हैं और परिणामों का सामना करने के लिए उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। उन्होंने सरकार के शुरुआती कदम का स्वागत करते हुए कहा था कि इससे छात्रों को अपने करियर पर ध्यान देने में मदद मिलेगी। साथ ही उन्होंने सरकार से CPI(M) के दबाव में अधिसूचना वापस नहीं लेने का आग्रह किया था।

NEET प्रदर्शनों के बीच बढ़ा विवाद

यह विवाद ऐसे समय सामने आया, जब तमिलनाडु में NEET को लेकर प्रदर्शन चल रहे हैं और CJP तथा वाम दलों से जुड़े छात्र संगठन इनमें शामिल हैं। छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने का आदेश राजनीतिक बहस का विषय बन गया था। कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध और आदेश वापस लेने की मांग के बाद विजय सरकार ने अपना पिछला निर्देश वापस ले लिया।

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