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  • Email Test/ स्मार्ट बिजली मीटर और चार गुना मुआवजे की मांग पर जन अभियान चलाएगी हिमाचल किसान सभा

    Email Test/ स्मार्ट बिजली मीटर और चार गुना मुआवजे की मांग पर जन अभियान चलाएगी हिमाचल किसान सभा

    हिमाचल किसान सभा की सुन्दर नगर इकाई ने आम जनता की सहमति के बिना स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का विरोध करने और प्रस्तावित रेल लाइन व फोरलेन परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के लिए चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर जन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह फैसला 23 अगस्त 2026 को युवक मंडल भवन, सलाह, सुन्दर नगर में आयोजित इकाई के सम्मेलन में लिया गया। सम्मेलन में उपमंडल की विभिन्न पंचायतों से करीब 60 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    सम्मेलन की अध्यक्षता सोहन सिंह चौहान, गुरिया राम और जगमेल ठाकुर के तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की। किसान सभा के जिला अध्यक्ष कुशाल भरद्वाज ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के इतिहास और किसान आंदोलनों में उसकी भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 के किसान आंदोलन और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    सभा के सचिव रामजी दास ने पिछले तीन वर्षों की संगठनात्मक और गतिविधि रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि किसान सभा ने किसानों, बागवानों, दुग्ध उत्पादकों, भूमिहीनों, विस्थापन से प्रभावित परिवारों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर जनसंगठनों, किसान समितियों तथा स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाए हैं। पूर्व अध्यक्ष परस राम ने भूमि, आजीविका और अधिकारों की रक्षा के साथ उचित मुआवजा, पुनर्वास, कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य तथा सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता के लिए संगठित प्रयास पर जोर दिया।

    स्मार्ट मीटर और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर अभियान

    नवनिर्वाचित अध्यक्ष जगमेल ठाकुर ने कहा कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने का किसान सभा विरोध करेगी। प्रस्तावित रेल लाइन और फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को उचित एवं चार गुना मुआवजा, ब्याज, पुनर्वास और अन्य अधिकार दिलाने की मांग को लेकर भी अभियान चलाया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्विस रोड और नालियों का निर्माण, स्थानीय लोगों को रोजगार, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, आवारा पशुओं की समस्या का समाधान तथा सिंचाई और सड़क सुविधाओं में सुधार जैसे विषय भी अभियान में शामिल होंगे। किसान सभा टमाटर सहित प्रमुख फसलों के उचित समर्थन मूल्य और वर्ष 2023 व 2025 में बारिश से हुए नुकसान के उचित मुआवजे की मांग भी उठाएगी।

    नई कमेटी का गठन

    सम्मेलन में 15 सदस्यीय नई कमेटी के गठन की घोषणा की गई। जगमेल ठाकुर को अध्यक्ष, गंगा राम, सुरेंदर सेन और जोगिन्दर ठाकुर को उपाध्यक्ष, रामजी दास को सचिव तथा कपूर सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। गुलाम रसूल, चमन चौधरी और प्रकाश ठाकुर को सह-सचिव बनाया गया। लाल सिंह ठाकुर, कश्मीर सिंह, श्याम लाल, हेमराज वालिया, रोशन लाल, लेख राज, खूब राम और लिलाधर राणा को कमेटी सदस्य चुना गया।

    जिला किसान सभा, मंडी की ओर से जोगिन्दर वालिया ने नवनिर्वाचित कमेटी को बधाई दी। उन्होंने सुन्दर नगर क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और किसानों व आम जनता की समस्याओं को लेकर व्यापक जन अभियान चलाने में हर संभव सहयोग देने की बात कही।

  • राजस्थान के सरकारी स्कूलों के कायाकल्प पर तीन साल में खर्च होंगे 12,500 करोड़ रुपए

    राजस्थान के सरकारी स्कूलों के कायाकल्प पर तीन साल में खर्च होंगे 12,500 करोड़ रुपए

    राजस्थान सरकार ने जर्जर और कमजोर आधारभूत ढांचे वाले सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए तीन वर्षों का रोडमैप तैयार किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक स्कूलों को सुरक्षित, सुविधायुक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने पर करीब 12,500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत 3,587 नए विद्यालय भवनों के निर्माण पर करीब 2,487.75 करोड़ रुपए और 83,783 नए कक्षा-कक्षों पर 8,378.30 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। इसके अलावा 22,589 स्कूलों की बड़ी मरम्मत के लिए 1,129.45 करोड़ रुपए और 13,616 नए शौचालय परिसरों के लिए करीब 340.40 करोड़ रुपए रखे गए हैं।

    सभी 41 जिलों में कराया गया तकनीकी सर्वे

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रदेश के सभी 41 जिलों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से सरकारी स्कूल भवनों का तकनीकी सर्वे कराया गया। सर्वे में सामने आई जरूरतों के आधार पर तीन वित्तीय वर्षों की चरणबद्ध योजना बनाई गई है। सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में स्कूलों के आधारभूत ढांचे पर करीब 2,200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

    तत्काल जरूरतों से जुड़े 3,006.34 करोड़ रुपए के विकास कार्य अभी स्वीकृति या निविदा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 518 नए विद्यालय भवनों के लिए 620 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं या टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि 181 भवनों का निर्माण शुरू हो चुका है।

    विधायक निधि का 20 प्रतिशत शिक्षा पर होगा खर्च

    राज्य सरकार ने विधायक निधि को भी स्कूलों के आधारभूत ढांचे से जोड़ने का फैसला किया है। प्रत्येक विधायक को मिलने वाली पांच करोड़ रुपए की वार्षिक निधि में से 20 प्रतिशत राशि स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं पर खर्च की जाएगी। इसके तहत 894 नए विद्यालय भवनों के लिए करीब 600 करोड़ रुपए के प्रस्ताव नाबार्ड या वित्त विभाग से ऋण स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं।

    इसके साथ ही 2,906 नए कक्षा-कक्षों के लिए करीब 300 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हैं और उन पर काम चल रहा है। बड़ी मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्यों के लिए 550 करोड़ रुपए तथा शैक्षणिक, आवासीय एवं विशेष सुविधाओं के लिए 936.34 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

    रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल का निर्माण एक सितंबर से

    जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल के नए भवन का निर्माण एक सितंबर से शुरू होगा। इस स्कूल को 2025 में जर्जर घोषित किया गया था। नए भवन के लिए डीएमएफटी से 12 लाख रुपए और विधायक कोष से छह लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

    सरकार स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। दिसंबर 2026 तक इस मद में करीब 1,087 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत करीब पांच हजार स्मार्ट क्लास रूम, 80 हजार टैबलेट और सात हजार आईसीटी लैब स्थापित की जाएंगी।

    विज्ञान और विशेष शिक्षा पर भी ध्यान

    रोडमैप के तहत 614 नए विद्यालय भवनों का निर्माण और 2,750 स्कूलों में बड़ी मरम्मत के कार्य किए जाएंगे। कुल 2,256 विज्ञान प्रयोगशाला कक्षों के लिए 507.60 करोड़ रुपए और विशेष आवश्यकता वाले 1,239 विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

    योजना में पांच छात्रावासों, 13 डायट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 79 छात्रावास भवनों पर भी काम किया जाएगा। इन कार्यों के लिए 936.34 करोड़ रुपए का प्रावधान है। प्रदेश की पांच हजार ग्राम पंचायतों में करीब 750 करोड़ रुपए की लागत से अटल केंद्र भी बनाए जाएंगे।

  • गोल्डी बराड़ ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कराने का दावा किया

    गोल्डी बराड़ ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कराने का दावा किया

    गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने एक लीक ऑडियो में दावा किया है कि उसके गैंग ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की थी। ऑडियो में बराड़ ने आरोप लगाया कि निज्जर उन लोगों का समर्थन करता था, जो 16-17 साल के युवाओं से ड्रग्स बिकवाते थे और उन्हें मुखबिरी के लिए ब्लैकमेल करते थे।

    बराड़ के मुताबिक, निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन और ताकत देता था ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके। उसने दावा किया कि इसी वजह से उसने और उसकी टीम ने निज्जर की हत्या कराई। ऑडियो में बराड़ ने यह भी कहा कि हर किसी को अपने किए का नतीजा भुगतना पड़ता है।

    18 जून 2023 को हुई थी निज्जर की हत्या

    हरदीप सिंह निज्जर की हत्या 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर हुई थी। इस मामले को लेकर कनाडा की ओर से हत्या को भारतीय सरकारी एजेंटों से जोड़ने के आरोप लगाए गए थे, जिन्हें भारत खारिज करता रहा है। भारतीय पक्ष ने कहा था कि इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए।

    गैंगवार की आशंका जताते रहे हैं भारतीय सूत्र

    इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, भारतीय एजेंसियां और अधिकारी लंबे समय से निज्जर की हत्या के पीछे गैंगवार और संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियों की आशंका जताते रहे हैं। भारतीय सूत्रों का कहना है कि लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ नेटवर्क की भूमिका को लेकर अमेरिका में हुई कार्रवाई से इस आकलन को मजबूती मिली है।

  • Viakas Uniyal: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया अमेरिका का ‘नया इलाका’, साझा किया मैप

    Viakas Uniyal: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया अमेरिका का ‘नया इलाका’, साझा किया मैप

    TEST POST अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता टूटने के बाद जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी दावे से जुड़ा एक मैप साझा किया है। उन्होंने इसे अमेरिका का ‘नया इलाका’ बताया। ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर मैप साझा करते हुए लिखा, “न्यूज़ U.S. टेरिटरी। होर्मुज स्ट्रेट।” उनके इस दावे से मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।

    पहले भी कर चुके हैं घोषणा

    इससे पहले ट्रंप ने 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द अमेरिका का इलाका घोषित किया जाएगा। इसके बाद 18 अगस्त को उन्होंने यही तस्वीर साझा करते हुए अपना दावा दोहराया था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विवाद रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि तेहरान को इसे दोबारा खोलना होगा, जबकि ईरान ने कहा था कि होर्मुज उसके नियंत्रण में रहेगा। ईरान ने ट्रंप के दावों की आलोचना करते हुए गंभीर परिणामों की चेतावनी भी दी है।

    ईरान ने रखीं अपनी शर्तें

    ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि तेहरान तब तक होर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका अपने कमिटमेंट्स पूरे नहीं करता और अपना व्यवहार नहीं बदलता। ईरान इंटरनेशनल के अनुसार रेज़ाई ने कहा, “स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बंद है और फिर से नहीं खुलेगा। अगर अमेरिका अपना बर्ताव बदलता है और अपने कमिटमेंट्स पूरे करता है, तो फिर समीकरण बदलेंगे, लेकिन इस बार अमेरिका को एक्शन लेना होगा। इसे बातों और बातचीत से हल नहीं किया जा सकता।”

    ईरान युद्ध से पहले दुनिया में कारोबार किए जाने वाले तेल का पांचवां हिस्सा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरता था। युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य अन्य यातायात के लिए काफी हद तक बंद है। ईरान चाहता है कि अमेरिका नाकेबंदी हटाए, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दे, आर्थिक प्रतिबंध खत्म करे और जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करे। ट्रंप की नई घोषणा के बाद क्षेत्र में टकराव बढ़ने के आसार जताए गए हैं।

  • बातचीत नाकाम, कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका

    बातचीत नाकाम, कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है। अंतिम दौर की बातचीत में समझौता नहीं होने के बाद अमेरिका करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा इस सप्ताह की शुरुआत में तय शर्तों के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

    अमेरिका का दावा है कि उसने कनाडा को प्रमुख निर्यातकों में सबसे बेहतर व्यापारिक शर्तें देने की पेशकश की थी। दूसरी ओर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव में अंतिम समय पर किए गए बदलावों को अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

    20 अरब डॉलर के उत्पाद होंगे प्रभावित

    प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ से कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर चिकित्सा उपयोग में आने वाले टंग डिप्रेसर तक कई तरह का सामान शामिल है। यह टैरिफ कनाडा से अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात के लगभग पांच प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करेगा।

    दोनों देशों के बीच 880 अरब डॉलर का कारोबार

    अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले साल करीब 880 अरब डॉलर के सामान और सेवाओं का व्यापार हुआ था। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ का असर संबंधित कंपनियों के साथ दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

    बातचीत के लिए तीन दिन बढ़ाई गई थी समयसीमा

    अमेरिका ने पहले इन टैरिफ को बुधवार रात 12:01 बजे से लागू करने की योजना बनाई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से समयसीमा तीन दिन बढ़ा दी थी। इसके बावजूद अंतिम दौर की वार्ता में कोई समझौता नहीं हो सका और कनाडाई निर्यातकों पर 50 प्रतिशत टैरिफ का खतरा बना हुआ है।

  • वार्ता विफल होने के बाद कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ की तैयारी में अमेरिका

    वार्ता विफल होने के बाद कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ की तैयारी में अमेरिका

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते को लेकर आखिरी दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद तनाव बढ़ गया है। अमेरिका अब कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा इस सप्ताह की शुरुआत में तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार नहीं हुआ। अमेरिका का दावा है कि उसने कनाडा को प्रमुख निर्यातकों में सबसे बेहतर व्यापारिक शर्तों की पेशकश की थी।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव में आखिरी समय पर किए गए बदलावों को अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताया। उनके अनुसार, इन बदलावों से किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

    20 अरब डॉलर के उत्पादों पर असर

    प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ से कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले टंग डिप्रेसर तक कई सामान शामिल हैं। यह टैरिफ कनाडा से अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात के लगभग पांच प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करेगा।

    दोनों देशों के बीच 880 अरब डॉलर का कारोबार

    अमेरिका और कनाडा के बीच बड़े स्तर पर व्यापार होता है। पिछले साल दोनों देशों ने करीब 880 अरब डॉलर के सामान और सेवाओं का आपस में कारोबार किया था। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ से प्रभावित कंपनियों के साथ दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

    बातचीत के लिए तीन दिन बढ़ी थी समयसीमा

    अमेरिका ने पहले इन टैरिफ को बुधवार रात 12:01 बजे से लागू करने की योजना बनाई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से समयसीमा तीन दिन बढ़ा दी थी। इसके बावजूद अंतिम दौर की वार्ता में कोई समझौता नहीं हो सका और कनाडाई निर्यातकों के सामने 50 प्रतिशत टैरिफ का खतरा बना हुआ है।

  • जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर मायावती ने अखिलेश यादव से माफी की मांग की

    जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर मायावती ने अखिलेश यादव से माफी की मांग की

    लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राजनीति के बीच बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के बारे में कहा था, “हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है।” मायावती ने इस बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया।

    जाट समाज से माफी मांगने की मांग

    मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अखिलेश यादव को अपनी टिप्पणी के लिए संबंधित पार्टी और उसके नेता के साथ ही चौधरी चरण सिंह के परिवार तथा जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राजनीतिक इतिहास और गठबंधन की राजनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी का रवैया विरोधियों के साथ ही सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्ण और अविश्वसनीय रहा है।

    बसपा प्रमुख के अनुसार, समाजवादी पार्टी के इसी रवैये के कारण उसके गठबंधन लंबे समय तक नहीं टिक पाए। उन्होंने दावा किया कि इससे कई मौकों पर राजनीतिक और चुनावी लाभ भाजपा को मिला तथा सेक्युलर ताकतें कमजोर हुईं।

    पुराने सपा-बसपा गठबंधनों का किया उल्लेख

    मायावती ने 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ बने सपा-बसपा गठबंधन और उसके टूटने का उल्लेख किया। उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया और इसे अपनी हत्या की साजिश से जोड़ा। इसके बाद उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुए लोकसभा चुनावी गठबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम अनुकूल नहीं आने के बाद बसपा के प्रति सपा के रवैये के कारण वह गठबंधन भी टूट गया था।

    मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जुड़े अपने सिद्धांतों तथा “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की नीतियों से अलग नहीं हो सकती।

    सपा की गठबंधन राजनीति पर लगाए आरोप

    बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी गठबंधन के जरिए अपना काम निकालने के बाद अपना रुख बदल लेती है और सहयोगी पार्टी के लिए अनुचित भाषा का इस्तेमाल करती है। उन्होंने इसे सपा का पुराना रवैया बताते हुए लोगों से उसकी संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहने को कहा।

    मायावती ने अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख राजनीतिक हित के अनुसार पीडीए में ‘पी’ का अर्थ कभी पिछड़ा वर्ग और कभी पंडित बताते हैं। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि अखिलेश यादव अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के हितैषी नहीं रहे हैं।

  • महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित किए, जानें कार्रवाई की वजह

    महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित किए, जानें कार्रवाई की वजह

    महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई के नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोप में मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इनमें कोलाबा का मैकडॉनल्ड्स, बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब, मलाड का नोवारा, नरीमन पॉइंट का स्टेटस रेस्टोरेंट और खार जिमखाना शामिल हैं। प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुंबई में तीन प्रतिष्ठानों को सील करने के साथ छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

    FDA ने 19 और 20 अगस्त को पूरे महाराष्ट्र में दूध एवं डेयरी उत्पादों, प्रतिबंधित गुटखा-पान मसाला और अन्य खाद्य उत्पादों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया था। इस व्यापक कार्रवाई के केंद्र में महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंडे हैं, जिन्होंने नियमों के उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की बात कही है।

    जांच में सामने आईं गंभीर खामियां

    जांच के दौरान तापमान नियंत्रण में गंभीर लापरवाही मिलने का आरोप है। रेफ्रिजरेशन उपकरणों का कैलिब्रेशन नहीं किया गया था और उपकरणों तथा पाइरोमीटर के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से 5 डिग्री सेल्सियस तक अंतर पाया गया। इससे जल्दी खराब होने वाले और अधिक जोखिम वाले खाद्य पदार्थों के बैक्टीरिया के लिए खतरनाक तापमान क्षेत्र में पहुंचने की आशंका थी।

    परिसर में जीवित कॉकरोच, पर्याप्त पेस्ट ट्रैप का अभाव और रसोई के फर्श पर सड़ा हुआ खाद्य कचरा मिलने की बात भी सामने आई। यह कचरा खाद्य पदार्थों के भंडारण और उन्हें तैयार करने वाले क्षेत्रों के पास पड़ा था। खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों पर गंदे सफाई के कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि खुले पैकेजिंग मटेरियल को उचित विभाजन के बिना रैक पर रखा गया था।

    खुले खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगह के ऊपर लगे लाइट फिक्स्चर पर सुरक्षा कवर नहीं था और उन पर काफी धूल जमा थी। कर्मचारियों को गंदे जूते और इस्तेमाल किए गए सफाई के कपड़े छूने के बाद हाथ धोए बिना खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थ संभालते हुए पाए जाने का भी आरोप है। इन स्थितियों से केमिकल और माइक्रोबियल क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बताया गया है।

    फर्जी दस्तावेज जमा करने का आरोप

    कुछ प्रतिष्ठानों पर राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी के सामने फर्जी अनुपालन दस्तावेज जमा करने का आरोप भी है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 61 के तहत इसे गंभीर अपराध बताया गया है। सक्रिय कीट प्रकोप, जैविक संदूषण, बिना कैलिब्रेशन वाले कोल्ड स्टोरेज और खाद्य सामग्री के इस्तेमाल से संबंधित भ्रामक जानकारी सामने आने के बाद FDA ने माना कि प्रतिष्ठानों को अतिरिक्त समय देना जनस्वास्थ्य के लिए अस्वीकार्य जोखिम पैदा कर सकता है।

    लाइसेंस निलंबित रहने के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान किसी खाद्य पदार्थ का उत्पादन, बिक्री या वितरण नहीं कर सकेंगे। इस अवधि में नियमों का उल्लंघन होने पर वैध लाइसेंस के बिना कारोबार करने के आरोप में तत्काल अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।

    रेस्टोरेंट से क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस तक जांच

    महाराष्ट्र में रेस्टोरेंट पर छापे मारने और लाइसेंस निलंबित करने के साथ क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस की भी जांच की जा रही है। ऐप के माध्यम से किराने का सामान खरीदने वाले ग्राहकों को भंडारण स्थल की स्वच्छता और रखरखाव की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं मिल पाती। इसी संदर्भ में तुकाराम मुंडे ने कहा, “अगर वे नियमों का पालन कर रहे हैं, तो उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। और जो ऐसा नहीं करते, उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं है।”

    स्कूल कैंटीन के लिए भी सख्त निर्देश

    महाराष्ट्र FDA ने राज्य के स्कूलों को परिसर से चॉकलेट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी अस्वास्थ्यकर वस्तुएं हटाने का निर्देश दिया है। यह आदेश फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट और FSSAI के ‘स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020’ के तहत जारी किया गया है। स्कूलों और उनके परिसर के 50 मीटर के दायरे में अधिक फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

    इन निर्देशों के बाद कुछ स्कूलों ने कैंटीन के मेन्यू से वड़ा पाव और समोसा हटाकर इडली, डोसा, पोहा, शीरा और उपमा शामिल किए हैं। गैस वाली कोल्ड ड्रिंक्स के स्थान पर छाछ को जगह दी गई है। मुंडे के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ खान-पान की संस्कृति विकसित करना और स्वस्थ नागरिक तैयार करना है।

    कौन हैं तुकाराम मुंडे?

    तुकाराम मुंडे की पहचान एक सख्त और समझौता नहीं करने वाले अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की थी। दो दशक से अधिक के प्रशासनिक करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है और सख्त कार्यशैली के कारण उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘सिंघम’ भी कहा जाता है।

    उनके प्रशासनिक कार्यों में सोलापुर का जल संरक्षण अभियान प्रमुख रहा है, जहां उनके कार्यकाल में किए गए प्रयासों से सैकड़ों गांव टैंकर-मुक्त हुए। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें 2016 में ‘बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। अब FDA कमिश्नर के रूप में वह खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन पर जोर दे रहे हैं।

  • लखनऊ में बैंक के बाहर दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या, CCTV में कैद हुई वारदात

    लखनऊ में बैंक के बाहर दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या, CCTV में कैद हुई वारदात

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में ICICI बैंक की एक शाखा के बाहर 37 वर्षीय दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, वारदात गुरुवार दोपहर करीब 12:15 बजे हुई। दिव्या बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। आरोप है कि उनके पति मानस बाजपेयी ने उन्हें कार से बाहर बुलाया और गोली मारने के बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था।

    CCTV में कैद हुई वारदात

    घटना के सामने आए CCTV फुटेज में मानस और दिव्या के बीच विवाद होता दिखाई दे रहा है। विवाद की जानकारी मिलने पर बैंक कर्मचारी बाहर पहुंचे, लेकिन गोली चलने के बाद वे वापस अंदर भागते नजर आए। आरोपी के मौके से जाने के बाद बैंककर्मी दिव्या की मदद के लिए आगे बढ़े। गंभीर रूप से घायल दिव्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बिना नंबर प्लेट वाले ऑटो से पहुंचने का दावा

    एक चश्मदीद के अनुसार, दिव्या अपने सहकर्मियों के साथ एक क्लाइंट से मिलकर बैंक लौटी थीं। इसी दौरान मानस बिना नंबर प्लेट वाले ऑटो से वहां पहुंचा। चश्मदीद ने दावा किया कि मानस के दोनों हाथों में पिस्टल थीं और उसने दिव्या से बात करते हुए गोली चला दी। गोली की आवाज सुनकर बाहर आए कर्मचारियों की ओर भी उसने पिस्टल तान दी, जिसके बाद वे बैंक के भीतर चले गए। इसके बाद आरोपी उसी ऑटो में बैठकर फरार हो गया।

    सूत्रों के मुताबिक, दिव्या ने अपने सहकर्मियों को बताया था कि कुछ दिन पहले मानस ने पीछा कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की थी। उन्हें आशंका थी कि मानस उनकी जान ले सकता है, हालांकि इस संबंध में पुलिस के पास कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

    हत्या के बाद व्हाट्सएप स्टेटस लगाया

    दिव्या की हत्या के बाद मानस हुसड़िया चौराहा स्थित अपने घर पहुंचा। बताया गया है कि उसने व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से पत्नी की हत्या करने की जानकारी दी और इसके बाद अपनी बहन की हत्या तथा आत्महत्या करने की बात लिखी। आरोप है कि इसके बाद उसने अपनी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी और खुद को भी गोली मार ली।

    दरवाजा तोड़कर घर में पहुंचे लोग

    मानस के पड़ोसी अंकुर ने बताया कि उसकी शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और पति-पत्नी लगभग डेढ़ साल से अलग रह रहे थे। मानस एक सरकारी बैंक में काम करता था। व्हाट्सएप स्टेटस देखने के बाद घर का दरवाजा तोड़ा गया तो भाई-बहन दोनों बेड पर पड़े मिले। मानस के सीने पर पिस्टल पड़ी थी और कमरे में टीवी तेज आवाज में चल रहा था।

  • Test#321: ईरान की मदद करने वाले देशों को भारी आर्थिक सजा की ट्रंप की चेतावनी

    Test#321: ईरान की मदद करने वाले देशों को भारी आर्थिक सजा की ट्रंप की चेतावनी

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने के लिए नया अभियान शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की मदद या उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

    ईरान के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई का एलान

    ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कहा कि ईरान को समझौते के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन उसने इसका लाभ नहीं उठाया। उन्होंने इसे अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और ईरान को अलग-थलग करने की कार्रवाई बताया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना, सैन्य कारखानों और मुद्रा को भारी नुकसान पहुंचा है तथा देश की अर्थव्यवस्था संकट में है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जो देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबारों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से ईरान को सहायता देने की अनुमति देगा, उसे भी कड़े आर्थिक नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने तेल तस्करी, स्वैप लाइन, नकद हस्तांतरण, एक्सचेंज हाउस, जहाजों के पंजीकरण और मुखौटा कंपनियों से जुड़ी गतिविधियां रोकने की मांग की।

    सहयोगी देशों से समर्थन मांगा

    ट्रंप ने इस अभियान को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताते हुए सहयोगी देशों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य ईरान को अलग-थलग करना और दुनिया भर में आतंक फैलाने की उसकी कथित क्षमता को कमजोर करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।

    अमेरिका में ट्रंप की आलोचना

    ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब युद्ध को छह महीने पूरे होने वाले हैं और कोई कूटनीतिक या सैन्य समाधान दिखाई नहीं दे रहा। नवंबर में होने वाले चुनावों के नजदीक आने के साथ ट्रंप को अमेरिका के भीतर इस युद्ध को लेकर राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनकी टिप्पणी से करीब एक सप्ताह पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका ईरान को अभूतपूर्व तरीके से आर्थिक रूप से अलग-थलग कर देगा।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर गतिरोध

    मिसाइल हमलों में हालिया कमी के बावजूद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग पर प्रभावी रोक लगा रखी है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी शुरुआती सहमति टूटने के बाद यह स्थिति पैदा हुई। दोनों पक्षों ने हाल के दिनों में संदेशों के आदान-प्रदान की बात कही थी, लेकिन ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि बातचीत बंद हो गई है।

    ईरान का कहना है कि वह ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही के प्रबंधन की योजना पर काम कर रहा है। इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलना अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए तय 60 दिन की बातचीत अवधि समाप्त होने के करीब थी, लेकिन इसे बढ़ाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई थी।