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  • हिमाचल की 9 से 12 ग्लेशियल झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में: IIT मंडी अध्ययन

    हिमाचल की 9 से 12 ग्लेशियल झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में: IIT मंडी अध्ययन

    आईआईटी मंडी के एक अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 9 से 12 ग्लेशियल झीलों को गंभीर खतरे वाली श्रेणी में रखे जाने की बात सामने आई है। अध्ययन के अनुसार ग्लेशियर पिघलने से इन झीलों का दायरा बढ़ रहा है और इनके टूटने पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटना बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती है।

    एक दशक में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा आकार

    आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर और संस्थापक चेयरपर्सन डेरिक्स पी. शुक्ला के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियरों से बनी कई झीलों का आकार पिछले 10 वर्षों के दौरान 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने प्रदेश की 2,000 से अधिक झीलों और कई ग्लेशियरों पर शोध किया है। दो तरह के सर्वे के आधार पर 9 से 12 झीलों को गंभीर स्थिति में माना जा सकता है।

    शुक्ला के अनुसार आम लोगों के लिए घेपन झील, योचे और काली कुंड से सबसे अधिक खतरा है, क्योंकि इनमें लगातार बदलाव हो रहा है और इनका आकार हर साल बढ़ रहा है। वासुकी झील के आकार में भी बदलाव दर्ज किया गया है, लेकिन उसके नीचे कई किलोमीटर तक मानव बस्तियां नहीं होने के कारण उससे जुड़ा खतरा अपेक्षाकृत कम बताया गया है।

    NDMA ने चार झीलों पर तत्काल ध्यान देने को कहा

    नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने हिमाचल प्रदेश की चार ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जो भविष्य में खतरा बन सकती हैं। इनमें घेपन झील, वासुकी झील, काशांग झील और बास्पा के पास स्थित एक झील शामिल है। अध्ययन में इन झीलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।

    पर्यटन और प्रदूषण से पिघलने की प्रक्रिया तेज

    शुक्ला के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन, वाहनों की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों से निकलने वाला कार्बन तथा धूल ग्लेशियरों पर जमा हो रहे हैं। इससे बर्फ की सतह पर काली परत बनती है, जो सूर्य की ऊर्जा अधिक अवशोषित करती है और ग्लेशियर पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में संपर्क सुविधाओं का विकास नियंत्रित तरीके से किया जाना चाहिए। सुरंगों के निर्माण से पर्वतीय क्षेत्रों में पूरे साल पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे प्रदूषण और धूल का असर ग्लेशियरों तक पहुंच रहा है।

    पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से बढ़ता है भूस्खलन का खतरा

    हिमालयी क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट भी मौजूद है। यह धरती के नीचे चट्टान, मिट्टी और रेत की लगातार जमी रहने वाली परत होती है। तापमान बढ़ने पर इसके पिघलने से ऊपरी सतह अस्थिर हो जाती है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    नेपाल की बाढ़ के बाद बढ़ी अध्ययन की अहमियत

    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आईआईटी मंडी के इस अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों की एक थ्योरी के अनुसार ग्लेशियर का एक हिस्सा ल्हेंदे खोला नदी में गिरने से कृत्रिम झील बनी और उसके टूटने पर पानी का प्रवाह भोटेकोशी नदी में पहुंचा। बाढ़ के बाद हाइड्रो पावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। कई सुरंगों में भारी मात्रा में मिट्टी भर जाने से राहत कार्य में मुश्किलें आईं।

  • IND vs AFG T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित, तीन ओपनरों में चयन की चुनौती

    IND vs AFG T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित, तीन ओपनरों में चयन की चुनौती

    भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए बीसीसीआई ने भारतीय टीम घोषित कर दी है। श्रेयस अय्यर को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। संजू सैमसन की वापसी के बाद टीम में तीन ओपनर हो गए हैं, जिससे अंतिम एकादश में सलामी बल्लेबाजों का चयन कप्तान के लिए अहम फैसला होगा।

    दिल्ली में खेले जाएंगे तीनों मुकाबले

    अफगानिस्तान की टीम भारत दौरे पर 13 से 17 सितंबर तक तीन टी20 मैचों की सीरीज खेलेगी। सभी मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे, जबकि सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड करेगा। पिछली भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज से इस टीम में कई बदलाव किए गए हैं। उस सीरीज में संजू सैमसन की जगह प्रभसिमरन सिंह को टीम में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला था।

    तीन ओपनरों में से चुनने होंगे दो खिलाड़ी

    भारतीय टीम में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी पहले से मौजूद हैं, जबकि अब संजू सैमसन की भी वापसी हुई है। तीनों खिलाड़ी पारी की शुरुआत करते हैं, इसलिए अंतिम एकादश में किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है। अभिषेक शर्मा आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी हैं। संजू सैमसन ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में प्रभावी बल्लेबाजी की थी, जबकि युवा वैभव सूर्यवंशी को बीसीसीआई की ओर से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में 13 सितंबर को होने वाले पहले मुकाबले में सलामी जोड़ी का चयन महत्वपूर्ण रहेगा।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम

    श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा। नीतीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा का चयन फिटनेस क्लियरेंस के अधीन है।

    https://twitter.com/BCCI/status/2094755984770224596
  • हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत के नियम

    हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत के नियम

    हरतालिका तीज, जिसे बड़ी तीज भी कहा जाता है, 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखे जाने वाले इस व्रत में महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास करती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती हैं।

    आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हरतालिका तीज को गौरी हब्बा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में मनाया जाता है। आमतौर पर यह गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले पड़ता है, लेकिन 2026 में तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन होने के कारण दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे।

    हरतालिका तीज 2026 की तिथि और पूजा मुहूर्त

    हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। प्रातःकाल पूजा करना उत्तम माना जाता है। सुबह पूजा संभव न हो तो प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है।

    हरतालिका तीज की पूजा विधि

    पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद बालू से निर्मित भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां पीले वस्त्र पर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनने की भी परंपरा है। व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और रात में जागरण करती हैं।

    अगले दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर व्रत खोला जाता है।

    हरतालिका तीज व्रत के नियम

    इस व्रत में अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि बीमार या गर्भवती महिलाएं फलाहार ले सकती हैं। व्रत की रात जागरण का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान मंदिर में अखंड दीपक जलाने और महिलाओं के 16 शृंगार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद बीच में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

  • नेपाल बाढ़: त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक ने चीनी सुपरवाइजर पर लगाए गंभीर आरोप

    नेपाल बाढ़: त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक ने चीनी सुपरवाइजर पर लगाए गंभीर आरोप

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से सुरक्षित निकले श्रमिक राज क्षेत्री ने वहां के हालात को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्षेत्री के मुताबिक, बाढ़ के समय टनल नंबर-3 में करीब 265 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि खतरे की आशंका जताने के बावजूद वहां मौजूद चीनी सुपरवाइजर ने श्रमिकों को काम जारी रखने के लिए कहा और खुद बाहर चला गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग कार्यों का ठेका चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन को मिला हुआ है। क्षेत्री का कहना है कि प्रोजेक्ट में कंपनी के सुपरवाइजरों की निगरानी में काम किया जाता है।

    सुरंग में तेज आवाज के बाद बिगड़े हालात

    राज क्षेत्री ने बताया कि सैलाब आने के समय वे सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज सुनाई दी और आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया। उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से कुछ गड़बड़ होने की आशंका जताते हुए बाहर जाने की अनुमति मांगी। क्षेत्री का आरोप है कि सुपरवाइजर ने उनसे काम जारी रखने को कहा और बाहर की स्थिति देखने की बात कहकर सुरंग से निकल गया, लेकिन वापस नहीं आया।

    मलबे के साथ आया सैलाब

    क्षेत्री के अनुसार, कुछ देर बाद सुरंग के ऊपर से मलबे के साथ तेज सैलाब आने लगा। खतरे को देखते हुए वह अपने साथियों के साथ सुरंग के मुहाने की ओर भागे और बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि उनके साथ चार लोग मुहाने तक पहुंचे थे, जिनमें से दो अब भी लापता हैं। उनका दावा है कि खतरे की चेतावनी मिलते ही सभी श्रमिकों को बाहर निकलने के लिए कहा जाता तो कई लोगों की जान बच सकती थी।

    सुरंग से आवाजें सुनाई देने का दावा

    राज क्षेत्री ने दावा किया कि सुरंग के भीतर कई शव पड़े थे और कुछ लोगों के जीवित होने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। उन्होंने कहा कि मदद मांग रहे लोगों को नहीं बचा पाने का उन्हें दुख है, लेकिन उस समय उनके सामने अपनी जान बचाने या दूसरों की सहायता करने की कोशिश के बीच कठिन स्थिति थी।

    जंगल में पेड़ के नीचे बिताई रात

    क्षेत्री ने बताया कि बाढ़ से बचने के लिए वह पहाड़ी पर स्थित जंगल में चले गए। उन्होंने शुरुआती दिन जंगल में बिताए और पेड़ के नीचे रात गुजारी। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का साधन भी उपलब्ध नहीं था। सैलाब के बाद मोबाइल नेटवर्क बंद हो गया था।

    पूर्व चेतावनी नहीं मिलने का आरोप

    राज क्षेत्री ने आरोप लगाया कि चीन की ओर से समय पर चेतावनी मिलती तो जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था। उनका दावा है कि चीन को बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की पहले से जानकारी थी। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। त्रिशूली-3A की सुरंग में फंसे लोगों, मृतकों और सुरक्षित निकले श्रमिकों का आधिकारिक एवं पूर्ण आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    स्रोत सामग्री के अनुसार, नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब में मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि करीब चार हजार लोग लापता हैं। मलबे के बीच बचाव अभियान जारी है।

  • ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कलेक्शन में ‘टॉक्सिक’ को पीछे छोड़ा

    ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कलेक्शन में ‘टॉक्सिक’ को पीछे छोड़ा

    आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने रिलीज के चौथे सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर रफ्तार पकड़ी है। फिल्म ने 26वें दिन 8.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि इसी दिन यश की एक्शन-थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ ने 8.20 करोड़ रुपये कमाए।

    26वें दिन कमाई में 54.55 फीसदी की बढ़त

    ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ ने 25वें दिन 5.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। अगले दिन इसका नेट कलेक्शन बढ़कर 8.50 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह एक दिन में फिल्म की कमाई में करीब 54.55 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

    भारत में कुल कलेक्शन 54.13 करोड़ रुपये

    ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 26 दिनों के दौरान 54.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है, जबकि इसका इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 63.82 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म ने पहले सप्ताह में 1.08 करोड़ और दूसरे सप्ताह में 40 लाख रुपये कमाए थे। तीसरे सप्ताह में इसके कारोबार में उछाल आया और फिल्म ने 10.40 करोड़ रुपये जुटाए। चौथे सप्ताह में इसकी दैनिक कमाई और तेज हुई है।

    ‘टॉक्सिक’ का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन

    यश की ‘टॉक्सिक’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और इसने 101 करोड़ रुपये से अधिक की ओपनिंग की। फिल्म ने दूसरे दिन 37.65 करोड़, तीसरे दिन 27.20 करोड़, चौथे दिन 25.15 करोड़, पांचवें दिन 23 करोड़ और छठे दिन 7.65 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। सातवें दिन इसकी कमाई 8.20 करोड़ रुपये रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, ‘टॉक्सिक’ अब तक भारत में 229.95 करोड़ रुपये का नेट और 272.80 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। विदेशों में फिल्म ने 40 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं, जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 313.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    यश के समर्थन में आए फिल्मी कलाकार

    ‘टॉक्सिक’ को लेकर यश को दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग से लेकर बॉलीवुड तक समर्थन मिला है। ‘धुरंधर’ के निर्देशक आदित्य धर ने एक पोस्ट साझा कर फिल्म और यश के प्रति समर्थन जताया। इससे पहले कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप ने भी चुनौतीपूर्ण फिल्म बनाने का जोखिम उठाने के लिए यश की प्रशंसा की थी।

  • जालौन में मंगलसूत्र छीनने का आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

    जालौन में मंगलसूत्र छीनने का आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

    उत्तर प्रदेश के जालौन में रक्षाबंधन के दौरान बीच बाजार एक महिला का मंगलसूत्र छीनकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने एक सितंबर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल उरई भेजा गया है।

    सूचना के आधार पर की गई घेराबंदी

    पुलिस के मुताबिक, मंगलसूत्र छीनने की घटना के बाद कोतवाली उरई में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई थी। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर फैक्ट्री चौकी क्षेत्र के पास घेराबंदी की गई। पुलिस को देखकर आरोपी ने कथित तौर पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से दो राउंड फायरिंग होने की जानकारी दी गई है।

    तमंचा और मोटरसाइकिल बरामद

    पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से एक तमंचा और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस आरोपी के आपराधिक इतिहास और बरामद सामान के संबंध में आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक का आरोप, चीनी सुपरवाइजर ने बाहर निकलने से रोका

    त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक का आरोप, चीनी सुपरवाइजर ने बाहर निकलने से रोका

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से सुरक्षित निकले श्रमिक राज क्षेत्री ने वहां के हालात के बारे में बताया है। उनका दावा है कि बाढ़ के समय सुरंग नंबर-3 में करीब 265 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि खतरे की आशंका जताने के बावजूद वहां मौजूद चीनी सुपरवाइजर ने श्रमिकों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग कार्य का ठेका चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन को मिला हुआ है। क्षेत्री के मुताबिक, परियोजना में उसके सुपरवाइजरों की निगरानी में काम किया जाता है।

    तेज आवाज के बाद मांगी थी बाहर निकलने की अनुमति

    राज क्षेत्री ने बताया कि सैलाब आने के समय वे सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज आवाज सुनाई दी और आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया। उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से कुछ गड़बड़ होने की आशंका जताते हुए बाहर निकलने की अनुमति मांगी। क्षेत्री का आरोप है कि सुपरवाइजर ने उनसे काम जारी रखने को कहा और खुद बाहर जाकर स्थिति देखने की बात कही। इसके बाद वह सुरंग से निकल गया और वापस नहीं आया।

    मलबे के साथ सैलाब आने पर मुहाने की ओर भागे

    क्षेत्री के अनुसार, कुछ देर बाद सुरंग के ऊपर से मलबे के साथ बड़ा सैलाब आने लगा। खतरा देखकर वह अपने साथियों के साथ सुरंग के मुहाने की ओर भागे और बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि उनके साथ चार लोग मुहाने तक पहुंचे थे, जिनमें से दो अब भी लापता हैं। उनका कहना है कि खतरे की सूचना मिलते ही सभी श्रमिकों को बाहर निकलने के लिए कहा जाता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

    क्षेत्री ने दावा किया कि सुरंग के अंदर कई शव पड़े थे और कुछ लोगों के जीवित होने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। उन्होंने कहा कि उस समय उनके सामने अपनी जान बचाने और दूसरों की मदद करने की कोशिश के बीच कठिन स्थिति थी।

    पहाड़ी के जंगल में बिताई रात

    बाढ़ से बचने के लिए क्षेत्री पहाड़ी पर स्थित जंगल की ओर चले गए। उन्होंने शुरुआती दिन जंगल में बिताए और पेड़ के नीचे रात गुजारी। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का साधन भी उपलब्ध नहीं था। सैलाब के बाद मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया था।

    पूर्व चेतावनी नहीं मिलने का भी आरोप

    राज क्षेत्री ने आरोप लगाया कि चीन की ओर से समय रहते चेतावनी दी जाती तो इतनी जानें नहीं जातीं। उन्होंने दावा किया कि चीन को बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की पहले से जानकारी थी। उनके मुताबिक, नेपाल को समय पर सूचना मिलने से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता था और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था।

    हालांकि, क्षेत्री के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। त्रिशूली-3A की सुरंग में वास्तव में कितने लोग फंसे, कितने लोगों की मौत हुई और कितने सुरक्षित बाहर निकले, इसका आधिकारिक और पूर्ण आंकड़ा सामने नहीं आया है। नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब में मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि करीब चार हजार लोग लापता हैं। मलबे के बीच बचाव अभियान जारी है।

  • रूस पर ईरान के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में मदद का आरोप, रिपोर्ट में C430L का दावा

    रूस पर ईरान के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में मदद का आरोप, रिपोर्ट में C430L का दावा

    रूस पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के लिए संवेदनशील सैन्य तकनीक उपलब्ध कराने का आरोप लगा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, C430L कोडनेम वाला यह गुप्त कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ था और इसमें रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल हैं। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका के हालिया हमलों के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    रैमजेट इंजन तकनीक विकसित करना मकसद

    रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य ईरान को रैमजेट इंजन तकनीक विकसित करने में सहायता देना है। इस तकनीक की मदद से क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से कई गुना तेज उड़ सकती हैं। फाइनेंशियल टाइम्स ने लीक हुई रूसी बातचीत, यात्रा रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान भी कार्यक्रम जारी रहा।

    ईरानी मिसाइलों के विशेषज्ञ और Conflict Armament Research के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज ने इसे रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य तकनीक का हस्तांतरण बताया। उनके अनुसार, ईरान दशकों से ऐसी तकनीक हासिल करना चाहता था और इस स्तर के कार्यक्रम के लिए रूस में उच्च राजनीतिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

    जहाज रोधी मिसाइलों में हो सकता है इस्तेमाल

    रिपोर्ट के अनुसार, रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल जहाज रोधी और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तेज गति के साथ कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं, जिससे वायु रक्षा प्रणालियों को उनकी पहचान करने और रोकने के लिए कम समय मिलता है।

    फाइनेंशियल टाइम्स का दावा है कि ईरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बना चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि रूस की सहायता से विकसित किसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने तैनात किया हो। लीक हुई बातचीत से संकेत मिला है कि कार्यक्रम पर चर्चा इस गर्मी तक जारी थी।

    पूर्व CIA सैन्य विश्लेषक और James Martin Center for Nonproliferation Studies से जुड़े जिम लैम्सन के मुताबिक, यह ईरान के लिए नई क्षमता वाला रणनीतिक हथियार तंत्र हो सकता है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

    रूस और ईरान के सैन्य संबंध

    रूस और ईरान के सैन्य एवं रणनीतिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं। ईरान ने रूस को शाहेद हमलावर ड्रोन दिए हैं, जिनका रूसी सेना ने यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। ईरान ने रूस में इन ड्रोन के उत्पादन की व्यवस्था स्थापित करने में भी सहायता की है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने रूस पर अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान को युद्धक्षेत्र से जुड़ी सहायता देने का आरोप भी लगाया है। इनमें सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन संबंधी मदद और हथियारों के कलपुर्जे शामिल होने का दावा किया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में बढ़ सकती है सुरक्षा चुनौती

    यदि ईरान रूस की सहायता से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की विश्वसनीय क्षमता हासिल करता है, तो खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के लिए सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है। तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलें मौजूदा वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया के लिए कम समय दे सकती हैं। विशेष रूप से जहाज रोधी क्षमता विकसित होने पर अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर खतरा बढ़ने की आशंका है। हालांकि, रूस की सहायता से बनी ऐसी किसी मिसाइल की ईरान में तैनाती का अभी कोई प्रमाण नहीं मिला है।

  • चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर, पुजारी ने मंदिर छोड़ने से किया इनकार

    चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर, पुजारी ने मंदिर छोड़ने से किया इनकार

    चित्रकूट के पहाड़ी इलाकों में 36 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर पहुंच गया। बाढ़ का पानी रामघाट स्थित बड़ा मठ मंदिर में घुसने लगा, जिससे वहां मौजूद पुजारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।

    डीएम और एसपी ने पुजारी से बाहर आने की अपील की

    जान के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुजारी से मंदिर से बाहर आने की गुहार लगाई। दोनों अधिकारी हाथ जोड़कर उनसे सुरक्षित स्थान पर जाने का अनुरोध करते रहे, लेकिन पुजारी ने मंदिर छोड़ने से इनकार कर दिया।

    पुजारी ने कहा, ‘भगवान को अकेला कैसे छोड़ दूं?’ इसके बाद भी वह बाढ़ के पानी से घिरे मंदिर में ही मौजूद रहे।

  • 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सीआरपीएफ में बहाल हुए गिरवर सिंह तोमर

    26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सीआरपीएफ में बहाल हुए गिरवर सिंह तोमर

    मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी गिरवर सिंह तोमर 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में दोबारा बहाल हो गए हैं। वर्ष 1999 में सेवा से बर्खास्त होने के बाद उन्होंने मंदिर में रहकर संत का जीवन अपना लिया था, लेकिन नौकरी वापस पाने के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी। अगस्त 2026 में सीआरपीएफ में वापसी के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनाती मिली है।

    1991 में हवलदार के रूप में शुरू की थी सेवा

    मुरैना के छिछावली गांव के रहने वाले गिरवर सिंह तोमर ने 1991 में सीआरपीएफ में हवलदार के रूप में सेवा शुरू की थी। करीब आठ साल की नौकरी के बाद उनका एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद हुआ। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच हुई और 1999 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

    नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह मुरैना लौट आए और मंदिर में रहकर पूजा-पाठ व साधना करने लगे। बाद में वह गुफा मंदिर पहुंचे, जहां उन्हें गिरवर दास महाराज के नाम से संत के रूप में पहचाना जाने लगा। वह करीब दो दशक तक मंदिर सेवा से जुड़े रहे।

    हाईकोर्ट में जारी रखी बहाली की लड़ाई

    गिरवर सिंह ने 1999 में अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब आठ साल बाद 2007 में फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन सीआरपीएफ ने इस फैसले पर स्टे ले लिया। इसके बाद मामला फिर लंबी कानूनी प्रक्रिया में चला गया और गिरवर सिंह ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की।

    वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। आदेश के बाद भी तत्काल सेवा में नहीं लिए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा और नियुक्ति की मांग जारी रखी।

    बीजापुर में मिली तैनाती

    अगस्त 2026 में गिरवर सिंह की सीआरपीएफ में वापसी हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनात किया गया। आदेश मिलने के बाद उन्होंने वहां पहुंचकर ड्यूटी ज्वाइन की और 26 साल बाद एक बार फिर सीआरपीएफ की वर्दी पहनी।