दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच हुए CJP प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने यशोवर्धन आजाद और अन्य की याचिका में यह अर्जी दाखिल की है। साथ ही पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की भूमिका की सीमित जांच के लिए अलग एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है।
दिल्ली पुलिस ने अर्जी में कहा है कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के बाद वह इन 13 एफआईआर में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती। इसलिए पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन मामलों को समाप्त करने की मांग की है।
एफआईआर में दंगा और तोड़फोड़ समेत कई आरोप
अर्जी के साथ दिए गए चार्ट के अनुसार, ये एफआईआर 21, 22, 25 और 26 जुलाई को अलग-अलग थानों में दर्ज की गई थीं। इनमें दंगा, हत्या की कोशिश और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे। एक एफआईआर में लूट का आरोप भी दर्ज है।
2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए अलग मांग
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर आपराधिक मामलों में पहले शामिल रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। पुलिस के मुताबिक, इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा में है। प्रस्तावित एफआईआर की जांच केवल यह पता लगाने तक सीमित रहेगी कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की हिंसा या सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में कोई भूमिका थी या नहीं।
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि अर्जी में शामिल घटनाओं को लेकर इसके बाद कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। यदि इन्हीं घटनाओं से जुड़ी कोई अन्य एफआईआर सामने आती है तो प्रभावित पक्ष की ओर से इसी तरह की राहत मांगे जाने पर पुलिस उसका विरोध नहीं करेगी।
अनुच्छेद 142 के तहत राहत की अपील
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल कर 13 एफआईआर रद्द करने और 2,873 लोगों से जुड़ी सीमित जांच के लिए नई एफआईआर की अनुमति देने का अनुरोध किया है। पुलिस ने यह भी कहा है कि आदेश मौजूदा मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया जाए और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। यह अर्जी 31 अगस्त 2026 को दाखिल की गई और इसके साथ दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर अजय कृष्ण शर्मा का हलफनामा लगाया गया है।

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