Blog

  • चंबा में बाढ़ प्रभावित परिवारों की वित्तीय संवेदनशीलता कम करने पर कार्यशाला

    चंबा में बाढ़ प्रभावित परिवारों की वित्तीय संवेदनशीलता कम करने पर कार्यशाला

    चंबा में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों की वित्तीय संवेदनशीलता कम करने के विषय पर विशेष परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में हुई कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने की।

    कार्यशाला में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ऑस्ट्रेलिया और क्रेया यूनिवर्सिटी चेन्नई के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान बाढ़ प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति, आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव, आपदा के बाद दीर्घकालिक पुनर्बहाली और भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

    पूर्व तैयारी और जोखिम की पहचान पर जोर

    उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने विशेषज्ञों को जिले की भौगोलिक परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान कम करने के लिए पूर्व तैयारी और जोखिम की पहचान आवश्यक है। वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय जानकारी के समुचित उपयोग से प्रभावित परिवारों की वित्तीय एवं सामाजिक संवेदनशीलता कम करने और उनकी पुनर्बहाली क्षमता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

    परियोजना का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को केवल राहत और पुनर्बहाली तक सीमित न रखते हुए पूर्व तैयारी, वित्तीय सुरक्षा, आजीविका की निरंतरता और दीर्घकालिक आपदा-लचीलापन मजबूत करना है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विभागीय कदमों की जानकारी

    अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने विशेषज्ञों के साथ जिले में बाढ़ से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सहायक अभियंता जल शक्ति गौरव कुमार ने चंबा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उठाए जा रहे विभागीय कदमों की जानकारी दी।

    कार्यशाला में डॉ. सागर, डॉ. सवीना, प्रो. दीपा सरकार, येसमीन, वरिष्ठ शोधकर्ता देवोपरना पोंडर और ऋतुराज महंता सहित विभिन्न विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

  • कांगड़ा में छह मॉडल डे बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण जारी, पांच के उन्नयन को मंजूरी

    कांगड़ा में छह मॉडल डे बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण जारी, पांच के उन्नयन को मंजूरी

    धर्मशाला में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने राजीव गांधी मॉडल डे बोर्डिंग स्कूलों के निर्माण एवं उन्नयन कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने तथा निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    बैठक में बताया गया कि जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में नए मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा पांच मौजूदा स्कूलों को मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल के रूप में उन्नत करने की स्वीकृति दी गई है।

    मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

    उपायुक्त ने कहा कि स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ पेयजल, बिजली, शौचालय और अग्निशमन सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

    उन्होंने जवाली विधानसभा क्षेत्र के थांगर, ज्वालामुखी के लाहड़ू, पालमपुर के कमलेहड़, नगरोटा बगवां के रन्हूं, फतेहपुर के मंझार और जयसिंहपुर के सोलवनेहर में निर्माणाधीन छह नए राजीव गांधी मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल भवनों की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    पांच मौजूदा स्कूलों के उन्नयन पर चर्चा

    बैठक में जसवां-प्रागपुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोटला बेहड़, शाहपुर के रैत, इंदौरा, देहरा और धर्मशाला के स्कूलों को मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल के रूप में उन्नत करने के कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

    हेमराज बैरवा ने कहा कि मॉडल डे बोर्डिंग स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करवाना है। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखते हुए निर्माण एवं उन्नयन कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।

    बैठक में उपनिदेशक उच्च शिक्षा अजय संबयाल ने जिले में निर्माणाधीन और उन्नयन किए जा रहे स्कूलों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता केसी राणा, विनय मेहरा, बीएस ठाकुर, विवेक शर्मा, राजीव कुमार, मनोहर लाल शर्मा, विजय कुमार वर्मा, विनीत कुमार, विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्य राम किशन, राजीव सेठी, पवन राणा, श्याम, शमशेर सिंह, नरेश कुमार, गिरीश शांडिल्य और नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा सुधीर भाटिया उपस्थित रहे।

  • IND vs AFG T20 सीरीज: श्रेयस अय्यर के सामने तीन ओपनरों में से दो चुनने की चुनौती

    IND vs AFG T20 सीरीज: श्रेयस अय्यर के सामने तीन ओपनरों में से दो चुनने की चुनौती

    भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए बीसीसीआई ने भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। श्रेयस अय्यर को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। स्क्वाड में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन के रूप में तीन सलामी बल्लेबाज शामिल हैं, जिससे कप्तान के सामने प्लेइंग इलेवन में दो ओपनरों को चुनने की चुनौती होगी।

    अफगानिस्तान की टीम भारत दौरे पर 13 से 17 सितंबर तक तीन टी20 मैच खेलेगी। मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे, जबकि सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड करेगा। टीम में संजू सैमसन की वापसी हुई है। भारत और जिम्बाब्वे के बीच पिछली टी20 सीरीज में सैमसन टीम से बाहर थे और उनकी जगह प्रभसिमरन सिंह को शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में अवसर नहीं मिला था।

    ओपनिंग संयोजन पर करना होगा फैसला

    अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी पहले से टीम में हैं, जबकि संजू सैमसन की वापसी के बाद सलामी बल्लेबाजी के तीन विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। अभिषेक शर्मा आईसीसी टी20 रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं। संजू सैमसन ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में प्रभावशाली बल्लेबाजी की थी, जबकि युवा वैभव सूर्यवंशी को बीसीसीआई आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में 13 सितंबर को होने वाले पहले मुकाबले में तीन में से किन दो खिलाड़ियों को ओपनिंग का मौका मिलता है, इस पर नजर रहेगी।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम

    श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा। नीतीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा का चयन फिटनेस मंजूरी के अधीन है।

    https://twitter.com/BCCI/status/2094755984770224596
  • IIT मंडी की स्टडी में 9 से 12 ग्लेशियर झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में

    IIT मंडी की स्टडी में 9 से 12 ग्लेशियर झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में

    आईआईटी मंडी की एक स्टडी में हिमाचल प्रदेश की 9 से 12 ग्लेशियर झीलों को गंभीर खतरे वाली श्रेणी में रखे जाने की बात सामने आई है। अध्ययन के अनुसार ग्लेशियर पिघलने से इन झीलों का दायरा बढ़ रहा है और इनके टूटने पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है।

    एक दशक में 30 से 60 फीसदी बढ़ा आकार

    आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर और संस्थापक चेयरपर्सन डेरिक्स पी. शुक्ला के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियरों से बनी कई झीलों का आकार पिछले 10 वर्षों में 30 से 60 फीसदी तक बढ़ा है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने राज्य की 2,000 से अधिक झीलों पर शोध करने के साथ कई ग्लेशियरों का अध्ययन किया है। दो तरह के सर्वे के आधार पर 9 से 12 झीलों को गंभीर स्थिति में माना जा सकता है।

    NDMA ने चार झीलों पर तत्काल ध्यान देने को कहा

    शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने हिमाचल प्रदेश की चार ग्लेशियर झीलों की पहचान की है, जो भविष्य में खतरा बन सकती हैं। इनमें घेपन झील, वासुकी झील, काशांग झील और बास्पा के पास स्थित एक झील शामिल है। उनके अनुसार इन झीलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

    अध्ययन में आम लोगों के लिए घेपन झील, योचे और काली कुंड से अधिक खतरा बताया गया है, क्योंकि इनमें लगातार बदलाव हो रहे हैं और इनका आकार हर साल बढ़ रहा है। वासुकी झील के आकार में भी बदलाव दर्ज किया गया है, लेकिन इसके नीचे कई किलोमीटर तक मानव बस्तियां नहीं होने के कारण इससे जुड़ा खतरा अपेक्षाकृत कम बताया गया है।

    पर्यटन, प्रदूषण और धूल से बढ़ रही चिंता

    शुक्ला के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन और प्रदूषण के कारण भी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वाहनों की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों से निकलने वाला कार्बन तथा धूल ग्लेशियरों पर जमा होकर बर्फ की सतह पर काली परत बना देते हैं। यह परत सूर्य की ऊर्जा अधिक अवशोषित करती है, जिससे बर्फ पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में कनेक्टिविटी के प्रयास नियंत्रित तरीके से किए जाने चाहिए। सुरंगों के निर्माण के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में पूरे वर्ष पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे ग्लेशियरों पर प्रदूषण और धूल जमा हो रही है।

    पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से अस्थिर हो सकती है जमीन

    हिमालयी क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट भी मौजूद है। यह धरती के नीचे चट्टान, मिट्टी और रेत की लगातार जमी रहने वाली परत होती है। तापमान बढ़ने पर इसके पिघलने से ऊपरी परत अस्थिर हो सकती है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

    नेपाल की बाढ़ के बाद बढ़ी अध्ययन की अहमियत

    यह अध्ययन नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ की पृष्ठभूमि में सामने आया है। वैज्ञानिकों की एक थ्योरी के अनुसार ग्लेशियर का एक हिस्सा ल्हेंदे खोला नदी में गिरने से कृत्रिम झील बनी और उसके टूटने से पानी का प्रवाह भोटेकोशी नदी तक पहुंचा। इस घटना के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के प्रयास जारी बताए गए हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कमाई में ‘टॉक्सिक’ को पछाड़ा

    ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कमाई में ‘टॉक्सिक’ को पछाड़ा

    आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने रिलीज के चौथे सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर रफ्तार पकड़ी है। ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने 26वें दिन भारत में 8.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसी दिन यश की एक्शन-थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ ने 8.20 करोड़ रुपये कमाए।

    26वें दिन कमाई में 54.55 फीसदी बढ़ोतरी

    ‘हनुमान अंश’ ने 25वें दिन 5.50 करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि अगले दिन इसका नेट कलेक्शन बढ़कर 8.50 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह फिल्म की दैनिक कमाई में करीब 54.55 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुरुआती दिनों में लाखों रुपये का कारोबार करने वाली यह फिल्म अब प्रतिदिन करोड़ों रुपये जुटा रही है।

    भारत में कुल नेट कलेक्शन 54.13 करोड़ रुपये

    सैकनिल्क के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने 26 दिनों में भारत में कुल 54.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। इसका इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 63.82 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म ने पहले सप्ताह में 1.08 करोड़ और दूसरे सप्ताह में 40 लाख रुपये कमाए थे। तीसरे सप्ताह में इसका कलेक्शन बढ़कर 10.40 करोड़ रुपये हो गया, जबकि चौथे सप्ताह में इसकी कमाई ने और तेजी पकड़ी।

    ‘टॉक्सिक’ का सात दिनों का कारोबार

    यश अभिनीत ‘टॉक्सिक’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और फिल्म ने पहले दिन 101 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया। दूसरे दिन इसने 37.65 करोड़, तीसरे दिन 27.20 करोड़, चौथे दिन 25.15 करोड़, पांचवें दिन 23 करोड़ और छठे दिन 7.65 करोड़ रुपये कमाए। सातवें दिन इसका कलेक्शन 8.20 करोड़ रुपये रहा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ‘टॉक्सिक’ अब तक भारत में 229.95 करोड़ रुपये का नेट और 272.80 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। विदेशों में फिल्म ने 40 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं, जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 313.55 करोड़ रुपये बताया गया है।

    यश को फिल्म जगत से मिला समर्थन

    ‘टॉक्सिक’ की दैनिक कमाई में गिरावट के बीच फिल्म और यश को दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक समर्थन मिला है। ‘धुरंधर’ के निर्देशक आदित्य धर ने एक पोस्ट के माध्यम से फिल्म और यश का समर्थन किया। उनसे पहले कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप ने भी ‘टॉक्सिक’ जैसी फिल्म बनाने का जोखिम उठाने के लिए यश की सराहना की थी।

  • हिमाचल की 9 से 12 ग्लेशियल झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में: IIT मंडी अध्ययन

    हिमाचल की 9 से 12 ग्लेशियल झीलें गंभीर खतरे की श्रेणी में: IIT मंडी अध्ययन

    आईआईटी मंडी के एक अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 9 से 12 ग्लेशियल झीलों को गंभीर खतरे वाली श्रेणी में रखे जाने की बात सामने आई है। अध्ययन के अनुसार ग्लेशियर पिघलने से इन झीलों का दायरा बढ़ रहा है और इनके टूटने पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटना बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती है।

    एक दशक में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा आकार

    आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर और संस्थापक चेयरपर्सन डेरिक्स पी. शुक्ला के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियरों से बनी कई झीलों का आकार पिछले 10 वर्षों के दौरान 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने प्रदेश की 2,000 से अधिक झीलों और कई ग्लेशियरों पर शोध किया है। दो तरह के सर्वे के आधार पर 9 से 12 झीलों को गंभीर स्थिति में माना जा सकता है।

    शुक्ला के अनुसार आम लोगों के लिए घेपन झील, योचे और काली कुंड से सबसे अधिक खतरा है, क्योंकि इनमें लगातार बदलाव हो रहा है और इनका आकार हर साल बढ़ रहा है। वासुकी झील के आकार में भी बदलाव दर्ज किया गया है, लेकिन उसके नीचे कई किलोमीटर तक मानव बस्तियां नहीं होने के कारण उससे जुड़ा खतरा अपेक्षाकृत कम बताया गया है।

    NDMA ने चार झीलों पर तत्काल ध्यान देने को कहा

    नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने हिमाचल प्रदेश की चार ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जो भविष्य में खतरा बन सकती हैं। इनमें घेपन झील, वासुकी झील, काशांग झील और बास्पा के पास स्थित एक झील शामिल है। अध्ययन में इन झीलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।

    पर्यटन और प्रदूषण से पिघलने की प्रक्रिया तेज

    शुक्ला के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन, वाहनों की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों से निकलने वाला कार्बन तथा धूल ग्लेशियरों पर जमा हो रहे हैं। इससे बर्फ की सतह पर काली परत बनती है, जो सूर्य की ऊर्जा अधिक अवशोषित करती है और ग्लेशियर पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में संपर्क सुविधाओं का विकास नियंत्रित तरीके से किया जाना चाहिए। सुरंगों के निर्माण से पर्वतीय क्षेत्रों में पूरे साल पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे प्रदूषण और धूल का असर ग्लेशियरों तक पहुंच रहा है।

    पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से बढ़ता है भूस्खलन का खतरा

    हिमालयी क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट भी मौजूद है। यह धरती के नीचे चट्टान, मिट्टी और रेत की लगातार जमी रहने वाली परत होती है। तापमान बढ़ने पर इसके पिघलने से ऊपरी सतह अस्थिर हो जाती है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    नेपाल की बाढ़ के बाद बढ़ी अध्ययन की अहमियत

    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आईआईटी मंडी के इस अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों की एक थ्योरी के अनुसार ग्लेशियर का एक हिस्सा ल्हेंदे खोला नदी में गिरने से कृत्रिम झील बनी और उसके टूटने पर पानी का प्रवाह भोटेकोशी नदी में पहुंचा। बाढ़ के बाद हाइड्रो पावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। कई सुरंगों में भारी मात्रा में मिट्टी भर जाने से राहत कार्य में मुश्किलें आईं।

  • IND vs AFG T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित, तीन ओपनरों में चयन की चुनौती

    IND vs AFG T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित, तीन ओपनरों में चयन की चुनौती

    भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए बीसीसीआई ने भारतीय टीम घोषित कर दी है। श्रेयस अय्यर को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। संजू सैमसन की वापसी के बाद टीम में तीन ओपनर हो गए हैं, जिससे अंतिम एकादश में सलामी बल्लेबाजों का चयन कप्तान के लिए अहम फैसला होगा।

    दिल्ली में खेले जाएंगे तीनों मुकाबले

    अफगानिस्तान की टीम भारत दौरे पर 13 से 17 सितंबर तक तीन टी20 मैचों की सीरीज खेलेगी। सभी मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे, जबकि सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड करेगा। पिछली भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज से इस टीम में कई बदलाव किए गए हैं। उस सीरीज में संजू सैमसन की जगह प्रभसिमरन सिंह को टीम में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला था।

    तीन ओपनरों में से चुनने होंगे दो खिलाड़ी

    भारतीय टीम में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी पहले से मौजूद हैं, जबकि अब संजू सैमसन की भी वापसी हुई है। तीनों खिलाड़ी पारी की शुरुआत करते हैं, इसलिए अंतिम एकादश में किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है। अभिषेक शर्मा आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी हैं। संजू सैमसन ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में प्रभावी बल्लेबाजी की थी, जबकि युवा वैभव सूर्यवंशी को बीसीसीआई की ओर से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में 13 सितंबर को होने वाले पहले मुकाबले में सलामी जोड़ी का चयन महत्वपूर्ण रहेगा।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम

    श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा। नीतीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा का चयन फिटनेस क्लियरेंस के अधीन है।

    https://twitter.com/BCCI/status/2094755984770224596
  • हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत के नियम

    हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत के नियम

    हरतालिका तीज, जिसे बड़ी तीज भी कहा जाता है, 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखे जाने वाले इस व्रत में महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास करती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती हैं।

    आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हरतालिका तीज को गौरी हब्बा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में मनाया जाता है। आमतौर पर यह गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले पड़ता है, लेकिन 2026 में तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन होने के कारण दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे।

    हरतालिका तीज 2026 की तिथि और पूजा मुहूर्त

    हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। प्रातःकाल पूजा करना उत्तम माना जाता है। सुबह पूजा संभव न हो तो प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है।

    हरतालिका तीज की पूजा विधि

    पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद बालू से निर्मित भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां पीले वस्त्र पर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनने की भी परंपरा है। व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और रात में जागरण करती हैं।

    अगले दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर व्रत खोला जाता है।

    हरतालिका तीज व्रत के नियम

    इस व्रत में अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि बीमार या गर्भवती महिलाएं फलाहार ले सकती हैं। व्रत की रात जागरण का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान मंदिर में अखंड दीपक जलाने और महिलाओं के 16 शृंगार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद बीच में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

  • नेपाल बाढ़: त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक ने चीनी सुपरवाइजर पर लगाए गंभीर आरोप

    नेपाल बाढ़: त्रिशूली सुरंग से बचे श्रमिक ने चीनी सुपरवाइजर पर लगाए गंभीर आरोप

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से सुरक्षित निकले श्रमिक राज क्षेत्री ने वहां के हालात को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्षेत्री के मुताबिक, बाढ़ के समय टनल नंबर-3 में करीब 265 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि खतरे की आशंका जताने के बावजूद वहां मौजूद चीनी सुपरवाइजर ने श्रमिकों को काम जारी रखने के लिए कहा और खुद बाहर चला गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग कार्यों का ठेका चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन को मिला हुआ है। क्षेत्री का कहना है कि प्रोजेक्ट में कंपनी के सुपरवाइजरों की निगरानी में काम किया जाता है।

    सुरंग में तेज आवाज के बाद बिगड़े हालात

    राज क्षेत्री ने बताया कि सैलाब आने के समय वे सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज सुनाई दी और आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया। उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से कुछ गड़बड़ होने की आशंका जताते हुए बाहर जाने की अनुमति मांगी। क्षेत्री का आरोप है कि सुपरवाइजर ने उनसे काम जारी रखने को कहा और बाहर की स्थिति देखने की बात कहकर सुरंग से निकल गया, लेकिन वापस नहीं आया।

    मलबे के साथ आया सैलाब

    क्षेत्री के अनुसार, कुछ देर बाद सुरंग के ऊपर से मलबे के साथ तेज सैलाब आने लगा। खतरे को देखते हुए वह अपने साथियों के साथ सुरंग के मुहाने की ओर भागे और बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि उनके साथ चार लोग मुहाने तक पहुंचे थे, जिनमें से दो अब भी लापता हैं। उनका दावा है कि खतरे की चेतावनी मिलते ही सभी श्रमिकों को बाहर निकलने के लिए कहा जाता तो कई लोगों की जान बच सकती थी।

    सुरंग से आवाजें सुनाई देने का दावा

    राज क्षेत्री ने दावा किया कि सुरंग के भीतर कई शव पड़े थे और कुछ लोगों के जीवित होने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। उन्होंने कहा कि मदद मांग रहे लोगों को नहीं बचा पाने का उन्हें दुख है, लेकिन उस समय उनके सामने अपनी जान बचाने या दूसरों की सहायता करने की कोशिश के बीच कठिन स्थिति थी।

    जंगल में पेड़ के नीचे बिताई रात

    क्षेत्री ने बताया कि बाढ़ से बचने के लिए वह पहाड़ी पर स्थित जंगल में चले गए। उन्होंने शुरुआती दिन जंगल में बिताए और पेड़ के नीचे रात गुजारी। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का साधन भी उपलब्ध नहीं था। सैलाब के बाद मोबाइल नेटवर्क बंद हो गया था।

    पूर्व चेतावनी नहीं मिलने का आरोप

    राज क्षेत्री ने आरोप लगाया कि चीन की ओर से समय पर चेतावनी मिलती तो जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था। उनका दावा है कि चीन को बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की पहले से जानकारी थी। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। त्रिशूली-3A की सुरंग में फंसे लोगों, मृतकों और सुरक्षित निकले श्रमिकों का आधिकारिक एवं पूर्ण आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    स्रोत सामग्री के अनुसार, नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब में मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि करीब चार हजार लोग लापता हैं। मलबे के बीच बचाव अभियान जारी है।

  • ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कलेक्शन में ‘टॉक्सिक’ को पीछे छोड़ा

    ‘हनुमान अंश’ ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़ रुपये, दैनिक कलेक्शन में ‘टॉक्सिक’ को पीछे छोड़ा

    आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने रिलीज के चौथे सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर रफ्तार पकड़ी है। फिल्म ने 26वें दिन 8.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि इसी दिन यश की एक्शन-थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ ने 8.20 करोड़ रुपये कमाए।

    26वें दिन कमाई में 54.55 फीसदी की बढ़त

    ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ ने 25वें दिन 5.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। अगले दिन इसका नेट कलेक्शन बढ़कर 8.50 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह एक दिन में फिल्म की कमाई में करीब 54.55 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

    भारत में कुल कलेक्शन 54.13 करोड़ रुपये

    ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 26 दिनों के दौरान 54.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है, जबकि इसका इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 63.82 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म ने पहले सप्ताह में 1.08 करोड़ और दूसरे सप्ताह में 40 लाख रुपये कमाए थे। तीसरे सप्ताह में इसके कारोबार में उछाल आया और फिल्म ने 10.40 करोड़ रुपये जुटाए। चौथे सप्ताह में इसकी दैनिक कमाई और तेज हुई है।

    ‘टॉक्सिक’ का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन

    यश की ‘टॉक्सिक’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और इसने 101 करोड़ रुपये से अधिक की ओपनिंग की। फिल्म ने दूसरे दिन 37.65 करोड़, तीसरे दिन 27.20 करोड़, चौथे दिन 25.15 करोड़, पांचवें दिन 23 करोड़ और छठे दिन 7.65 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। सातवें दिन इसकी कमाई 8.20 करोड़ रुपये रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, ‘टॉक्सिक’ अब तक भारत में 229.95 करोड़ रुपये का नेट और 272.80 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। विदेशों में फिल्म ने 40 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं, जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 313.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    यश के समर्थन में आए फिल्मी कलाकार

    ‘टॉक्सिक’ को लेकर यश को दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग से लेकर बॉलीवुड तक समर्थन मिला है। ‘धुरंधर’ के निर्देशक आदित्य धर ने एक पोस्ट साझा कर फिल्म और यश के प्रति समर्थन जताया। इससे पहले कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप ने भी चुनौतीपूर्ण फिल्म बनाने का जोखिम उठाने के लिए यश की प्रशंसा की थी।