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  • सत्य निकेतन PG हादसा: घटनास्थल से 100 मीटर दूर था संचालक, CDR की जांच कर रही पुलिस

    सत्य निकेतन PG हादसा: घटनास्थल से 100 मीटर दूर था संचालक, CDR की जांच कर रही पुलिस

    दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, PG संचालक सुधांशु हादसे के समय घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर अपने कार्यालय में मौजूद था। घटना की जानकारी मिलने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचा और कुछ फोन करने के बाद वहां से चला गया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, सुधांशु को आशंका थी कि स्थानीय लोग उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। पुलिस अब उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

    भजनपुरा निवासी सुधांशु वर्ष 2022 से अपने दोस्त शुभम त्यागी के साथ PG संचालन का कारोबार कर रहा था। दोनों सत्य निकेतन में “Hostel Daze” नाम से PG चला रहे थे। पुलिस के अनुसार, वे इस इलाके में सात PG या अकोमोडेशन संचालित कर रहे थे। हादसे वाली इमारत को अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपये प्रति माह के किराये पर लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इमारत की जर्जर हालत के कारण इसे कम किराये पर लिया गया था।

    संभावित खतरे की जानकारी होने का दावा

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुधांशु को इमारत में मरम्मत और निर्माण कार्य से पैदा होने वाले संभावित खतरे की जानकारी थी, लेकिन उसने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सूत्रों का कहना है कि PG संचालकों ने इमारत में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं किया था। वहां केवल दीवारों पर पेंट कराने के साथ सेकेंड हैंड AC, बेड, अलमारी और टेबल लगाए गए थे। सुधांशु का कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी अभी फरार है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश कर रही हैं और हादसे में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

    ठेकेदार से पूछताछ में सामने आईं जानकारियां

    पुलिस ने मंगलवार को बिल्डिंग मालिक महेश गुप्ता के लेबर ठेकेदार सनोज कुमार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया था। महेश गुप्ता ने उसे ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में निर्माण एवं मरम्मत का काम सौंपा था। पूछताछ में सामने आया कि सनोज करीब 10 दिन से इमारत में मरम्मत का काम कर रहा था। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को एक स्तर पर लाने का काम किया जा रहा था और पुलिस सूत्रों के अनुसार, बेसमेंट में करीब तीन ट्रक मलबा भरा गया था।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने में एक दीवार बाधा बन रही थी और हादसे वाले दिन कथित तौर पर उसे तोड़ा गया था। पुलिस का दावा है कि दीवार हटने के बाद इमारत का ढांचा भार नहीं सह सका और पूरी इमारत ढह गई। घटना के समय वहां काम कर रहे मजदूर भोजन करने गए थे, जिससे ठेकेदार और मजदूर हादसे की चपेट में आने से बच गए। भोजनावकाश के बाद लौटे सनोज ने इमारत को गिरी हुई हालत में देखा।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन की 13 FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

    जंतर-मंतर प्रदर्शन की 13 FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

    दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच हुए CJP प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने यशोवर्धन आजाद और अन्य की याचिका में दाखिल अर्जी में कहा है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई 2026 के फैसले के बाद वह इन मामलों में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती। इसके साथ ही पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों की भूमिका की सीमित जांच के लिए अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है।

    दंगा, हत्या की कोशिश और तोड़फोड़ के आरोप

    अर्जी के साथ दिए गए चार्ट के अनुसार, ये FIR 21, 22, 25 और 26 जुलाई को अलग-अलग थानों में दर्ज की गई थीं। इनमें दंगा, हत्या की कोशिश और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं। एक FIR में लूट का आरोप भी दर्ज किया गया है।

    2,873 लोगों की भूमिका की जांच की मांग

    दिल्ली पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर आपराधिक मामलों में पहले शामिल रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। पुलिस के मुताबिक, इन लोगों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा में है। प्रस्तावित अलग FIR की जांच यह पता लगाने तक सीमित रहेगी कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की हिंसा या सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में कोई भूमिका थी या नहीं।

    पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि अर्जी में शामिल घटनाओं को लेकर इसके बाद कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। यदि इन्हीं घटनाओं से जुड़ी कोई अन्य FIR सामने आती है तो प्रभावित पक्ष के इसी तरह की राहत मांगने पर पुलिस उसका विरोध नहीं करेगी।

    अनुच्छेद 142 के तहत राहत का अनुरोध

    दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 13 FIR रद्द करने और 2,873 लोगों से जुड़ी सीमित जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। पुलिस ने कहा है कि आदेश मौजूदा मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रखा जाए और भविष्य के मामलों में इसे मिसाल के तौर पर इस्तेमाल न किया जाए। यह अर्जी 31 अगस्त 2026 को दाखिल की गई और इसके साथ दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर अजय कृष्ण शर्मा का हलफनामा भी लगाया गया है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन की 13 एफआईआर रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

    जंतर-मंतर प्रदर्शन की 13 एफआईआर रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

    दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच हुए CJP प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने यशोवर्धन आजाद और अन्य की याचिका में यह अर्जी दाखिल की है। साथ ही पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की भूमिका की सीमित जांच के लिए अलग एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है।

    दिल्ली पुलिस ने अर्जी में कहा है कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के बाद वह इन 13 एफआईआर में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती। इसलिए पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन मामलों को समाप्त करने की मांग की है।

    एफआईआर में दंगा और तोड़फोड़ समेत कई आरोप

    अर्जी के साथ दिए गए चार्ट के अनुसार, ये एफआईआर 21, 22, 25 और 26 जुलाई को अलग-अलग थानों में दर्ज की गई थीं। इनमें दंगा, हत्या की कोशिश और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे। एक एफआईआर में लूट का आरोप भी दर्ज है।

    2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए अलग मांग

    पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर आपराधिक मामलों में पहले शामिल रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। पुलिस के मुताबिक, इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा में है। प्रस्तावित एफआईआर की जांच केवल यह पता लगाने तक सीमित रहेगी कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की हिंसा या सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में कोई भूमिका थी या नहीं।

    दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि अर्जी में शामिल घटनाओं को लेकर इसके बाद कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। यदि इन्हीं घटनाओं से जुड़ी कोई अन्य एफआईआर सामने आती है तो प्रभावित पक्ष की ओर से इसी तरह की राहत मांगे जाने पर पुलिस उसका विरोध नहीं करेगी।

    अनुच्छेद 142 के तहत राहत की अपील

    पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल कर 13 एफआईआर रद्द करने और 2,873 लोगों से जुड़ी सीमित जांच के लिए नई एफआईआर की अनुमति देने का अनुरोध किया है। पुलिस ने यह भी कहा है कि आदेश मौजूदा मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया जाए और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। यह अर्जी 31 अगस्त 2026 को दाखिल की गई और इसके साथ दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर अजय कृष्ण शर्मा का हलफनामा लगाया गया है।