चंबा में 2 सितंबर को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पन्न वित्तीय संवेदनशीलता को कम करने के विषय पर विशेष परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में हुई कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने की।
कार्यशाला में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ऑस्ट्रेलिया और क्रेया यूनिवर्सिटी चेन्नई के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान बाढ़ प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति, आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव, आपदा के बाद दीर्घकालिक पुनर्बहाली और भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
पूर्व तैयारी और जोखिम की पहचान पर जोर
उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने विशेषज्ञों को जिले की भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी देते हुए कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान कम करने के लिए पूर्व तैयारी और जोखिम की पहचान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय जानकारी के समुचित उपयोग से प्रभावित परिवारों की वित्तीय एवं सामाजिक संवेदनशीलता कम करने और उनकी पुनर्बहाली क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
परियोजना का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को केवल राहत और पुनर्बहाली तक सीमित न रखते हुए पूर्व तैयारी, वित्तीय सुरक्षा, आजीविका की निरंतरता और दीर्घकालिक आपदा-लचीलापन मजबूत करना है। अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने विशेषज्ञों के साथ जिले में बाढ़ से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सहायक अभियंता जल शक्ति गौरव कुमार ने चंबा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उठाए जा रहे विभागीय कदमों की जानकारी दी।
कार्यशाला में डॉ. सागर, डॉ. सवीना, प्रो. दीपा सरकार, येसमीन, वरिष्ठ शोधकर्ता देवोपरना पोंडर और ऋतुराज महंता सहित विभिन्न विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

