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  • हल छठ 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

    हल छठ 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

    हल छठ का पर्व वर्ष 2026 में 2 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि में मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता भगवान बलराम को समर्पित है। महिलाएं इस दिन संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी जोड़ा गया है।

    हल षष्ठी 2026 की तारीख

    षष्ठी तिथि 2 सितंबर 2026 को सुबह 6:12 बजे शुरू होगी और 3 सितंबर को सुबह 4:25 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर हल षष्ठी यानी हरछठ का पर्व 2 सितंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है।

    हल षष्ठी 2026 के शुभ मुहूर्त

    इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:29 से 5:14 बजे तक और प्रातः संध्या सुबह 4:52 से 5:59 बजे तक रहेगी। विजय मुहूर्त दोपहर 2:28 से 3:18 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:42 से 7:04 बजे तक और सायाह्न संध्या शाम 6:42 से 7:50 बजे तक रहेगी। अमृत काल रात 9:06 से 10:38 बजे तक बताया गया है।

    क्यों मनाया जाता है हल छठ का पर्व?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को भगवान बलराम का जन्म हुआ था। इसी कारण यह पर्व बलराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसे ललही छठ, चन्दन छठ, कमर छठ और खमर छठ के नाम से जाना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इसके ऊब छठ, चन्द्र छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, चानन छठ और चना छठ जैसे नाम भी प्रचलित हैं।

    हल षष्ठी व्रत की परंपराएं

    हल को भगवान बलराम का शस्त्र माना गया है। इसी मान्यता के कारण व्रत रखने वाली महिलाएं हल से जोती गई फसल से प्राप्त वस्तुओं का सेवन नहीं करतीं। व्रत में सरोवर और तालाब जैसे जलस्रोतों में उगी वस्तुओं का सेवन किया जाता है, जबकि गाय के दूध और दही से बनी चीजें नहीं खाई जातीं। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन महुआ की दातुन करने के साथ महुआ का सेवन भी करती हैं।