80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया। करीब 75 मिनट के भाषण की शुरुआत उन्होंने वंदे मातरम् और तिरंगे के उल्लेख से की। उन्होंने कहा कि देश नए संकल्पों और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को इसलिए भी ऐतिहासिक बताया क्योंकि स्वतंत्रता के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले से वंदे मातरम् गूंजा। इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी सहित स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने देशवासियों से बड़े सपने देखने का आह्वान करते हुए कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। बड़े सपने सोच और संभावनाओं का विस्तार करते हैं तथा प्रगति की गति बढ़ाते हैं।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है। उनके अनुसार, यह लक्ष्य 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास, परिश्रम और भागीदारी से पूरा होगा। उन्होंने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी और ग्रामोद्योग पांच गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सात गुना, रेलवे कोच निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या चार गुना और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा क्षमता दो गीगावॉट से बढ़कर 160 गीगावॉट हो गई, जबकि पाइप गैस कनेक्शन वाले शहरों की संख्या 70 से बढ़कर 700 हो गई है।
आत्मनिर्भरता और नई तकनीक पर जोर
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तीन बड़े संयंत्र स्थापित हो चुके हैं और उनसे निर्यात शुरू हो गया है। अगले सात से आठ वर्षों में पांच से आठ अन्य संयंत्र स्थापित करने की योजना है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने और हाइड्रोजन ट्रेन पर आगे बढ़ने का भी उल्लेख किया गया।
सप्तधारा से विकास का संकल्प
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर की सात शक्ति धाराओं का आह्वान किया। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति शृंखला का केंद्र बनाने के लिए लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के स्तर पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हो चुके हैं, जिनसे छोटे उद्योगों, किसानों और मछुआरों को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने युवा शक्ति को विकसित भारत का सबसे बड़ा इंजन बताया। उन्होंने एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से संबंधित कौशल प्रशिक्षण देने का संकल्प भी व्यक्त किया। इसके साथ ही छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने की घोषणा की गई।
